गुजरात पुलिस ने ‘ऑपरेशन मिलाप’ शुरू किया
गुजरात पुलिस ने ‘ऑपरेशन मिलाप‘ नाम के एक खास राज्य-व्यापी अभियान के तहत एक महीने में 1,470 लापता लोगों का पता लगाया। 7 मई 2026 को शुरू की गई इस पहल का मकसद लापता लोगों को ढूंढना, उन्हें उनके परिवारों से मिलाना और कानून-व्यवस्था बनाए रखने वाली एजेंसियों में जनता का भरोसा बढ़ाना था।
इस ऑपरेशन में हाल के और लंबे समय से लंबित लापता लोगों के मामलों को सुलझाने के लिए टेक्नोलॉजी–आधारित जांच, फील्ड वेरिफिकेशन और अंतर–राज्यीय समन्वय का इस्तेमाल किया गया।
स्टैटिक GK फैक्ट: गुजरात का गठन 1 मई 1960 को पूर्व बॉम्बे राज्य के बंटवारे के बाद हुआ था। इसकी राजधानी गांधीनगर है।
ऑपरेशन मिलाप के उद्देश्य
ऑपरेशन मिलाप को राज्य भर में लापता लोगों के अनसुलझे मामलों की समीक्षा करके लोगों पर केंद्रित पुलिसिंग को मज़बूत करने के लिए डिज़ाइन किया गया था। इस अभियान में समय पर जांच और समाज के कमज़ोर वर्गों की सुरक्षा पर ज़ोर दिया गया।
इसके मुख्य उद्देश्यों में लापता लोगों का पता लगाना, परिवारों को मिलाना, लंबित जांचों की समीक्षा करना, पुलिसिंग में जनता का भरोसा बढ़ाना और महिलाओं व बच्चों की सुरक्षा में सुधार करना शामिल था।
स्टैटिक GK टिप: भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची के तहत कानून-व्यवस्था राज्य का विषय है, इसलिए पुलिसिंग और सार्वजनिक सुरक्षा की ज़िम्मेदारी राज्य पुलिस की होती है।
टेक्नोलॉजी और जांच से मिली सफलता
ऑपरेशन मिलाप की सफलता डिजिटल टूल्स और पारंपरिक पुलिसिंग तरीकों के मेल से मिली। पुलिस टीमों ने पुराने केस फाइलों की समीक्षा की और फील्ड जांच के ज़रिए नई जानकारियां जुटाईं।
जांचकर्ताओं ने मोबाइल फोन रिकॉर्ड का विश्लेषण किया, सोशल मीडिया गतिविधियों पर नज़र रखी, ट्रांसपोर्ट हब और शेल्टर होम में जानकारी की पुष्टि की, शिकायतकर्ताओं से दोबारा बात की और कई राज्यों के पुलिस विभागों के साथ समन्वय किया। लापता लोगों का पता लगाने में परिवार की काउंसलिंग ने भी अहम भूमिका निभाई।
स्टैटिक GK फैक्ट: क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम्स (CCTNS) एक देशव्यापी प्रोजेक्ट है जो पुलिस रिकॉर्ड को डिजिटल बनाता है और पूरे भारत में पुलिस स्टेशनों के बीच समन्वय को बेहतर बनाता है।
महिलाओं और बच्चों पर मुख्य ध्यान
पता लगाए गए 1,470 लोगों में से 852 महिलाएं, 342 पुरुष, 234 नाबालिग लड़कियां और 42 नाबालिग लड़के थे। पुलिस ने पाया कि 14-17 साल की लड़कियां सबसे ज़्यादा जोखिम वाले ग्रुप में शामिल थीं।
जांच से पता चला कि लोगों के गायब होने के मुख्य कारण पारिवारिक झगड़े, प्रेम संबंध, पढ़ाई में असफलता, काम के लिए पलायन और घरेलू विवाद थे। इस ऑपरेशन ने समय रहते कार्रवाई करने और समुदाय के सहयोग के महत्व को उजागर किया।
स्टैटिक GK टिप: भारत में लापता बच्चों के मामलों की निगरानी ‘ट्रैकचाइल्ड‘ (TrackChild) जैसे प्लेटफॉर्म के ज़रिए की जाती है, जिसे महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने विकसित किया है।
सूरत शहर ने रिकवरी अभियान में सबसे आगे रहकर काम किया
गुजरात की सभी पुलिस यूनिट में से, सूरत शहर की पुलिस ने सबसे ज़्यादा 341 लोगों को ढूंढ निकाला। राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, असम, झारखंड और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में भी कई लापता लोगों का पता लगाया गया, जो राज्यों के बीच पुलिस के प्रभावी तालमेल को दिखाता है।
‘ऑपरेशन मिलाप‘ नागरिकों पर केंद्रित पुलिसिंग के प्रति गुजरात पुलिस की प्रतिबद्धता को दर्शाता है और तकनीक, सहयोग तथा मानवीय पुलिसिंग के ज़रिए सार्वजनिक सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए एक मॉडल के तौर पर काम करता है।
स्टैटिक GK फैक्ट: सूरत भारत के प्रमुख व्यावसायिक शहरों में से एक है और अपनी वैश्विक हीरा कटिंग और पॉलिशिंग इंडस्ट्री के कारण इसे ‘भारत का डायमंड सिटी‘ (हीरा नगरी) भी कहा जाता है।
उस्तादियन समसामयिकी स्थायी तथ्य तालिका
| तथ्य | विवरण |
| अभियान | ऑपरेशन मिलाप |
| कार्यान्वयन एजेंसी | गुजरात पुलिस |
| शुरुआत की तिथि | 7 मई 2026 |
| खोजे गए कुल व्यक्ति | 1,470 |
| खोजी गई महिलाएँ | 852 |
| खोजी गई नाबालिग लड़कियाँ | 234 |
| सर्वाधिक खोज करने वाली इकाई | सूरत शहर पुलिस |
| प्रमुख उद्देश्य | परिवारों का पुनर्मिलन और नागरिक-केंद्रित पुलिस व्यवस्था |
| जांच के तरीके | डिजिटल इंटेलिजेंस, क्षेत्रीय सत्यापन और अंतरराज्यीय समन्वय |
| गुजरात के गृह मंत्री | हर्ष संघवी |





