अप्रैल 30, 2026 11:20 अपराह्न

भारत जैव विविधता शासन परियोजना को मिली गति

समसामयिक मामले: MoEFCC, UNDP, वैश्विक पर्यावरण सुविधा, राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण, जैव विविधता शासन, तमिलनाडु, मेघालय, सतत आजीविका, GPDP, संरक्षण नीति

India Biodiversity Governance Project Gains Momentum

परियोजना का अवलोकन

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) और राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) ने पाँच वर्षीय जैव विविधता परियोजना (2025–2030) शुरू की है। इसे संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) और वैश्विक पर्यावरण सुविधा (GEF) का समर्थन प्राप्त है, जिसके लिए 4.88 मिलियन अमेरिकी डॉलर की फंडिंग दी गई है।
जैव विविधता संरक्षण प्रतिबद्धताओं को सुरक्षित करने के लिए संस्थागत क्षमताओं को सुदृढ़ बनाना” नामक इस पहल का मुख्य उद्देश्य जैव विविधता को स्थानीय शासन में एकीकृत करना है। इसका लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि संरक्षण ग्रामीण नियोजन की दैनिक प्रक्रिया का एक अभिन्न अंग बन जाए।
स्टेटिक GK तथ्य: भारत को अपनी समृद्ध जैविक विविधता के कारण दुनिया के 17 ‘मेगाडाइवर्स‘ (अत्यधिक विविध) देशों में से एक के रूप में वर्गीकृत किया गया है।

जमीनी स्तर के शासन पर फोकस

यह परियोजना जैव विविधता को ग्राम पंचायत विकास योजनाओं (GPDPs) में समाहित करती है। यह सुनिश्चित करता है कि पर्यावरण संरक्षण ग्रामीण विकास की प्राथमिकताओं के साथ तालमेल बिठाकर आगे बढ़े।
पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) और जैव विविधता प्रबंधन समितियों (BMCs) जैसी संस्थाओं को सुदृढ़ बनाया जाएगा। ये निकाय स्थानीय जैविक संसाधनों के प्रबंधन और संरक्षण में प्रत्यक्ष भूमिका निभाएंगे।
स्टेटिक GK सुझाव: पंचायती राज एक त्रिस्तरीय प्रणाली है, जिसमें ग्राम, ब्लॉक और जिला स्तर शामिल होते हैं।

कवर किए गए प्रमुख क्षेत्र

यह पहल तमिलनाडु और मेघालय के पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों को लक्षित करती है।

तमिलनाडु का परिदृश्य

यह परियोजना सत्यमंगलम के आसपास के उन क्षेत्रों को कवर करती है जो पश्चिमी घाट और पूर्वी घाट को आपस में जोड़ते हैं। इसमें मुदुमलाई टाइगर रिज़र्व और सत्यमंगलम टाइगर रिज़र्व शामिल हैं।
ये क्षेत्र महत्वपूर्ण वन्यजीव गलियारों (wildlife corridors) के रूप में कार्य करते हैं, जिससे विभिन्न प्रजातियों का आवागमन संभव हो पाता है। पारंपरिक पारिस्थितिक ज्ञान रखने वाले स्थानीय समुदाय संरक्षण नियोजन में सक्रिय रूप से भाग लेंगे।
स्टेटिक GK तथ्य: पश्चिमी घाट एक UNESCO विश्व धरोहर स्थल है, जो अपनी उच्च जैव विविधता के लिए जाना जाता है।

मेघालय का परिदृश्य

गारो हिल्स क्षेत्र में, इस परियोजना के अंतर्गत नोकरेक बायोस्फीयर रिज़र्व, बालपक्रम राष्ट्रीय उद्यान और सिजू वन्यजीव अभयारण्य शामिल हैं।
यहाँ, ग्राम रोजगार परिषदें (VECs) पंचायतों के समान ही कार्य करती हैं। ये परिषदें संरक्षण प्रयासों का नेतृत्व करेंगी, जिससे समुदाय का स्वामित्व और भागीदारी सुनिश्चित हो सके।
स्टेटिक GK सुझाव: नोकरेक बायोस्फीयर रिज़र्व अपनी दुर्लभ खट्टे फलों की प्रजातियों और समृद्ध वन्यजीवों के लिए जाना जाता है।

मुख्य उद्देश्य

इस प्रोजेक्ट का मकसद जैव विविधता को स्थानीय विकास योजना के ढांचों में शामिल करना है। यह संरक्षण को आर्थिक और सामाजिक फायदों से जोड़कर शासन को मज़बूत बनाता है।
यह टिकाऊ वित्तपोषण के तरीके पेश करता है, जैसे कि एक्सेस एंड बेनिफिट शेयरिंग (ABS)। इससे यह पक्का होता है कि समुदायों को जैविक संसाधनों के संरक्षण के लिए इनाम मिले।
दूसरे उपायों में CSR के तहत मिलकर वित्तपोषण करना और हरित सूक्ष्म-उद्यमों को बढ़ावा देना शामिल है। ये कदम संरक्षण और आजीविका पैदा करने के बीच सीधा जुड़ाव बनाते हैं।

सामाजिक समावेश और क्षमता निर्माण

यह पहल ज़मीनी स्तर पर क्षमता निर्माण और ज्ञान साझा करने पर ज़ोर देती है। इसका मकसद सफल संरक्षण मॉडलों को पूरे देश में बड़े पैमाने पर लागू करना है।
महिलाओं, अनुसूचित जातियों (SCs) और आदिवासी समुदायों पर खास ध्यान दिया जाता है। इससे जैव विविधता के शासन में सभी की समावेशी और निष्पक्ष भागीदारी पक्की होती है।
स्टेटिक GK तथ्य: भारतीय संविधान का अनुच्छेद 48A राज्य को पर्यावरण की रक्षा करने और उसे बेहतर बनाने का निर्देश देता है।

राष्ट्रीय और वैश्विक प्रासंगिकता

यह प्रोजेक्ट भारत की राष्ट्रीय जैव विविधता रणनीति और कार्य योजना (2024–2030) के अनुरूप है। यह वैश्विक जैव विविधता ढांचे के तहत 30×30 लक्ष्य का भी समर्थन करता है।
इसके अलावा, यह पेरिस समझौते के तहत भारत के राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदानों (NDCs) में भी योगदान देता है। इससे जलवायु और जैव विविधता लक्ष्यों के प्रति भारत की प्रतिबद्धता और मज़बूत होती है।

स्टैटिक उस्थादियन करेंट अफेयर्स टेबल

विषय विवरण
परियोजना का नाम जैव विविधता के लिए संस्थागत क्षमताओं को सुदृढ़ करना
अवधि 2025 से 2030
वित्तपोषण 4.88 मिलियन अमेरिकी डॉलर
कार्यान्वयन निकाय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय तथा राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण
सहयोगी एजेंसियाँ संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम और वैश्विक पर्यावरण सुविधा
प्रमुख राज्य तमिलनाडु और मेघालय
मुख्य फोकस स्थानीय शासन में जैव विविधता का समावेशन
प्रमुख तंत्र जीपीडीपी, एबीएस, सीएसआर फंडिंग
India Biodiversity Governance Project Gains Momentum
  1. MoEFCC और NBA ने 2025–2030 की अवधि के लिए जैव विविधता शासन परियोजना शुरू की।
  2. इस परियोजना को UNDP और Global Environment Facility से वित्तीय सहायता मिली है।
  3. जैव विविधता संरक्षण की पहलों के लिए कुल 88 मिलियन अमेरिकी डॉलर की फंडिंग दी गई है।
  4. यह पहल जैव विविधता को स्थानीय शासन और ग्रामीण नियोजन के ढांचों में एकीकृत करती है।
  5. भारत उन 17 ‘मेगाडाइवर्सदेशों में से एक है, जिनके पास समृद्ध जैविक विविधता संसाधन हैं।
  6. यह परियोजना स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए जैव विविधता को ग्राम पंचायत विकास योजनाओं में शामिल करती है।
  7. PRI और BMC स्थानीय जैविक संसाधनों का प्रभावी प्रबंधन और संरक्षण करेंगे।
  8. पंचायती राज व्यवस्था में गाँव, ब्लॉक और जिला स्तर के शासन शामिल हैं।
  9. यह परियोजना तमिलनाडु और मेघालय के जैव विविधता वाले क्षेत्रों पर केंद्रित है।
  10. सत्यमंगलम क्षेत्र पश्चिमी घाट और पूर्वी घाट के गलियारों को आपस में जोड़ता है।
  11. वन्यजीव गलियारे प्रजातियों की आवाजाही को संभव बनाते हैं और पारिस्थितिक संतुलन को प्रभावी ढंग से बनाए रखते हैं।
  12. मेघालय में नोकरेक बायोस्फीयर रिज़र्व और बालपक्रम राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र शामिल हैं।
  13. मेघालय के क्षेत्रों में संरक्षण प्रयासों का नेतृत्व ग्राम रोज़गार परिषदें‘ (Village Employment Councils) करती हैं।
  14. यह परियोजना सामुदायिक प्रोत्साहन के लिए पहुँच और लाभ साझाकरण‘ (Access and Benefit Sharing) की व्यवस्था लागू करती है।
  15. CSR फंडिंग हरित सूक्ष्मउद्यमों और सतत आजीविका सृजन की पहलों को सहायता प्रदान करती है।
  16. समावेशी शासन में भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए महिलाओं, SC और आदिवासी समुदायों पर विशेष ध्यान दिया गया है।
  17. संविधान का अनुच्छेद 48A राज्य को पर्यावरण की स्थिति की रक्षा करने और उसमें सुधार लाने का निर्देश देता है।
  18. यह परियोजना राष्ट्रीय जैव विविधता रणनीति और कार्य योजना 2024–2030′ के अनुरूप है।
  19. यह जैव विविधता के ढांचे के अंतर्गत पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण के लिए निर्धारित वैश्विक ’30×30 लक्ष्य का समर्थन करती है।
  20. यह पहल जलवायु लक्ष्यों और सतत विकास की रणनीतियों के प्रति भारत की प्रतिबद्धताओं को और अधिक सुदृढ़ बनाती है।

Q1. जैव विविधता शासन परियोजना (2025–2030) किस मंत्रालय द्वारा शुरू की गई?


Q2. इस परियोजना को कौन-कौन से अंतरराष्ट्रीय संगठन समर्थन दे रहे हैं?


Q3. इस परियोजना के लिए कुल वित्तपोषण कितना है?


Q4. इस परियोजना के अंतर्गत मुख्य रूप से कौन-से दो भारतीय राज्य शामिल हैं?


Q5. जैव विविधता संरक्षण में ABS का क्या अर्थ है?


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