अभ्यास का अवलोकन
भारतीय सेना की दक्षिणी कमान ने मार्च 2026 में बबीना फील्ड फायरिंग रेंज में ‘अमोघ ज्वाला‘ अभ्यास आयोजित किया। इस अभ्यास का उद्देश्य भारत की युद्ध की तैयारी और मशीनीकृत युद्ध क्षमता का प्रदर्शन करना था। यह प्रौद्योगिकी–संचालित सैन्य अभियानों के प्रति सेना के बदलते दृष्टिकोण को दर्शाता है।
इस उच्च–तीव्रता वाले अभ्यास में थल, वायु और तकनीकी संसाधनों को एकीकृत किया गया। इसने आधुनिक युद्धक्षेत्र की चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए भारत की तैयारी को प्रदर्शित किया।
स्टेटिक GK तथ्य: भारतीय सेना की दक्षिणी कमान का मुख्यालय पुणे, महाराष्ट्र में स्थित है, और यह सेना की सबसे पुरानी कमानों में से एक है।
बहु–क्षेत्रीय युद्ध पर फोकस
इस अभ्यास ने बहु–क्षेत्रीय युद्ध (Multi-Domain Warfare) की अवधारणा को रेखांकित किया, जिसमें थल, वायु, साइबर और अंतरिक्ष – इन सभी क्षेत्रों में एक साथ अभियान चलाए जाते हैं। यह दृष्टिकोण संघर्ष के दौरान त्वरित प्रतिक्रिया और बेहतर समन्वय सुनिश्चित करता है।
हमलावर हेलीकॉप्टर, लड़ाकू विमान, ड्रोन और ड्रोन–रोधी प्रणालियों जैसे संसाधनों का सक्रिय रूप से उपयोग किया गया। यह पारंपरिक युद्ध शैली से एकीकृत युद्ध प्रणालियों की ओर हो रहे बदलाव को दर्शाता है।
स्टेटिक GK टिप: बहु–क्षेत्रीय युद्ध एक प्रमुख सिद्धांत है जिसका पालन संयुक्त राज्य अमेरिका के सशस्त्र बलों जैसी उन्नत सेनाओं द्वारा किया जाता है।
कार्यरत उन्नत प्रौद्योगिकियां
इस अभ्यास की एक प्रमुख विशेषता वास्तविक समय (real-time) में ड्रोन निगरानी और लक्ष्य–निर्धारण प्रणालियों का उपयोग था। इन प्रौद्योगिकियों ने सटीक हमले करने और युद्धक्षेत्र का सटीक आकलन करने में सहायता की। इसने मारक क्षमता (firepower) और युद्धाभ्यास इकाइयों के बीच प्रभावी समन्वय सुनिश्चित किया।
इलेक्ट्रॉनिक युद्ध (EW) और वायु रक्षा (AD) प्रणालियों के एकीकरण ने परिचालन क्षमता को और अधिक सुदृढ़ किया। रात्रि–युद्ध प्रौद्योगिकियों का भी परीक्षण किया गया, जिसने चौबीसों घंटे युद्ध के लिए तैयार रहने की क्षमता को प्रदर्शित किया।
स्टेटिक GK तथ्य: इलेक्ट्रॉनिक युद्ध (EW) में शत्रु की संचार प्रणालियों को बाधित करने के लिए विद्युतचुंबकीय स्पेक्ट्रम को नियंत्रित करना शामिल होता है।
परिचालन तत्परता में वृद्धि
इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य संयुक्त अभियानों और त्वरित निर्णय लेने की क्षमता में सुधार करना था। इसने आधुनिक युद्ध में ‘खुफिया, निगरानी और टोही‘ (ISR) गतिविधियों के महत्व पर ज़ोर दिया। ISR वास्तविक समय की जानकारी प्रदान करता है, जिससे कमांडरों को सटीक और समय पर निर्णय लेने में सहायता मिलती है।
इस अभ्यास ने यह प्रदर्शित किया कि किस प्रकार ‘नेटवर्क–केंद्रित युद्ध‘ (network-centric warfare) युद्धक्षेत्र की दक्षता को बढ़ाता है। यह विभिन्न इकाइयों के बीच डेटा के निर्बाध आदान–प्रदान को संभव बनाता है, जिससे समन्वय और मिशन की सफलता सुनिश्चित होती है।
Static GK टिप: नेटवर्क–केंद्रित युद्ध की अवधारणा को 1990 के दशक के आखिर में संयुक्त राज्य अमेरिका ने लोकप्रिय बनाया था।
नेतृत्व और रणनीतिक दृष्टिकोण
आर्मी कमांडर, लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने सैनिकों की पेशेवरता और ऑपरेशनल उत्कृष्टता की सराहना की। उन्होंने भविष्य के लिए तैयार सेना बनाने में तकनीकी अपनाने और आपसी तालमेल के महत्व पर ज़ोर दिया।
इस अभ्यास ने भारत की अपनी रक्षा क्षमताओं को मज़बूत करने की प्रतिबद्धता को और पुख्ता किया। यह तेज़ी से बदलते वैश्विक माहौल में उभरती सुरक्षा चुनौतियों के अनुरूप ढलने की दिशा में रणनीतिक प्रयास को भी दर्शाता है।
Static GK तथ्य: भारतीय सेना की स्थापना 1895 में ब्रिटिश शासन के दौरान हुई थी और बाद में आज़ादी के बाद इसका पुनर्गठन किया गया।
Static Usthadian Current Affairs Table
| विषय | विवरण |
| अभ्यास का नाम | अभ्यास अमोघ ज्वाला |
| संचालन करने वाली संस्था | भारतीय सेना की दक्षिणी कमान |
| स्थान | बबीना फील्ड फायरिंग रेंज |
| वर्ष | 2026 |
| प्रमुख फोकस | बहु-क्षेत्रीय युद्ध और मैकेनाइज्ड ऑपरेशन्स |
| प्रयुक्त प्रौद्योगिकियाँ | ड्रोन, ईडब्ल्यू सिस्टम, एडी सिस्टम |
| मुख्य अवधारणा | भूमि, वायु, साइबर और अंतरिक्ष का एकीकरण |
| ISR का अर्थ | इंटेलिजेंस, सर्विलांस और रिकॉनिसेंस |
| नेतृत्व | लेफ्टिनेंट जनरल धीरज |
| रणनीतिक लक्ष्य | युद्धक तैयारी और भविष्य के युद्ध कौशल को मजबूत करना |





