गहरी पहचान वाली सांस्कृतिक क्राफ्ट
अरुणाचल दाओ हाथ से बनी एक ब्लेड है जो अरुणाचल प्रदेश के कई आदिवासी समुदायों की सांस्कृतिक भावना को दिखाती है। इसका इस्तेमाल रोज़ाना के कामों, खास फंक्शन और सम्मान के निशान के तौर पर किया जाता है। GI टैग इस ब्लेड को औपचारिक तौर पर एक अनोखी क्राफ्ट के तौर पर पहचान देता है जो इसकी ज्योग्राफिकल शुरुआत से जुड़ी है।
यह पहचान पीढ़ियों से चली आ रही मेटलवर्क की सदियों पुरानी जानकारी को सुरक्षित रखती है। यह पारंपरिक लोहार कबीलों की पहचान को मज़बूत करती है जो खास कबीलों से जुड़े अलग-अलग आकार में दाओ डिज़ाइन करते हैं।
स्टैटिक GK फैक्ट: अरुणाचल प्रदेश को “भोर से जगमगाते पहाड़ों की भूमि” के नाम से जाना जाता है, जो भूटान, चीन और म्यांमार की सीमा से लगा हुआ है।
सुरक्षा के लिए GI टैग क्यों ज़रूरी है
एक ज्योग्राफिकल इंडिकेशन उन प्रोडक्ट्स को सुरक्षित रखता है जो खास तौर पर किसी खास इलाके से जुड़े होते हैं। यह सर्टिफ़िकेशन बिना इजाज़त के मैन्युफैक्चरिंग, पहचान का गलत इस्तेमाल और बड़े पैमाने पर नकली चीज़ों के प्रोडक्शन को रोकता है।
यह स्टेटस असलीपन को बढ़ावा देने में मदद करेगा और यह पक्का करेगा कि सिर्फ़ असली अरुणाचल के आदिवासी कारीगर ही असली दाओ की मार्केटिंग कर सकें। इससे पारंपरिक फोर्जिंग के तरीकों को बचाने में मदद मिलती है, जो सटीक हथौड़े से पीटने और देसी चीज़ों पर निर्भर करते हैं।
स्टैटिक GK फैक्ट: भारत का GI सिस्टम जियोग्राफ़िकल इंडिकेशन्स ऑफ़ गुड्स (रजिस्ट्रेशन एंड प्रोटेक्शन) एक्ट, 1999 के तहत काम करता है।
रोज़ी-रोटी और मार्केट तक पहुँच बढ़ाना
GI टैग से मार्केट में मौजूदगी बढ़ने और ग्रामीण कारीगरों की इनकम बढ़ने की उम्मीद है। बेहतर पैकेजिंग, ब्रांडिंग और सर्टिफ़िकेशन से ज़्यादा कमर्शियल वैल्यू मिलेगी।
राज्य के अधिकारी स्किल अपग्रेडेशन प्रोग्राम, हाई-क्वालिटी प्रोडक्शन ट्रेनिंग और नेशनल क्राफ्ट मार्केटप्लेस से बिज़नेस लिंकेज की योजना बनाते हैं। यह पहचान सांस्कृतिक विरासत और आर्थिक मज़बूती के बीच एक पुल बन जाती है।
अरुणाचल प्रदेश का बढ़ता GI पोर्टफ़ोलियो
अरुणाचल प्रदेश भारत के GI इकोसिस्टम में एक मज़बूत योगदान देने वाले के तौर पर तेज़ी से उभर रहा है। दाओ मौजूदा विरासत वाले प्रोडक्ट्स में शामिल हो गया है जो सांस्कृतिक रिचनेस दिखाते हैं। अरुणाचल प्रदेश की कई खास चीज़ों को GI स्टेटस मिला है:
- वाकरो संतरा
- इदु मिश्मी टेक्सटाइल
- खामती चावल
- याक चुरपी
- वांचो लकड़ी का क्राफ्ट
ये पहचान मिलकर राज्य की देसी पहचान और पारंपरिक रोज़ी-रोटी के क्लस्टर को सपोर्ट करती हैं।
स्टेटिक GK फैक्ट: भारत में खेती, हैंडलूम और हैंडीक्राफ्ट से जुड़े 500+ रजिस्टर्ड GI प्रोडक्ट हैं।
भविष्य का विज़न और पॉलिसी की दिशा
अधिकारियों का लक्ष्य 2030 तक राज्य से 50 GI-सर्टिफाइड प्रोडक्ट हासिल करना है। अरुणाचल दाओ की विज़िबिलिटी ज़्यादा कम्युनिटी को हेरिटेज क्राफ्ट को बचाने के लिए प्रेरित करेगी।
फोकस हेरिटेज से जुड़े ग्रामीण विकास पर है, जिससे यह पक्का हो सके कि कारीगरों को सही मुआवज़ा और पहचान मिले। पॉलिसी में टूरिज्म टाई-अप, ग्लोबल मार्केटिंग चैनल और ट्राइबल वेलफेयर इंटीग्रेशन शामिल होंगे।
GI प्रोटेक्शन को मज़बूत करना, लोकल प्रोडक्ट को दुनिया भर में प्रमोट करके और आने वाली पीढ़ियों के लिए पारंपरिक ज्ञान को सुरक्षित करके आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्यों के साथ है।
Static Usthadian Current Affairs Table
| Topic | Detail |
| मान्यता प्राप्त उत्पाद | अरुणाचल दाओ |
| प्रदान की गई स्थिति | भौगोलिक संकेत (GI) टैग |
| मूल क्षेत्र | अरुणाचल प्रदेश |
| विधिक ढाँचा | भौगोलिक संकेत अधिनियम 1999 |
| प्रमुख लाभार्थी | जनजातीय लोहार समुदाय |
| प्रमुख उद्देश्य | विरासत की सुरक्षा और कारीगरों की आय में वृद्धि |
| संबद्ध शिल्प | पारंपरिक फोर्जिंग तकनीकें |
| राज्य के अन्य GI उत्पाद | वक़रो ऑरेंज, खामती चावल, याक चुर्पी |
| राज्य का लक्ष्य | 2030 तक 50 GI उत्पाद |
| राष्ट्रीय GI प्रशासन | वाणिज्य मंत्रालय के अंतर्गत GI रजिस्ट्री इंडिया |





