कैनाल-टॉप फोटोवोल्टिक क्या है?
कैनाल–टॉप फोटोवोल्टिक (CTPV) में सिंचाई नहरों के ऊपर खास तौर पर डिज़ाइन किए गए स्ट्रक्चर पर सोलर पैनल लगाना शामिल है। फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट के उलट, जहाँ पैनल सीधे पानी पर रखे प्लेटफॉर्म पर लगाए जाते हैं, CTPV सिस्टम नहर के ऊपर ऊंचाई पर रहते हैं।
नहर की चौड़ाई, दिशा और इंजीनियरिंग ज़रूरतों के आधार पर ये स्ट्रक्चर नहर के ऊपर फैले हो सकते हैं या उसके किनारों पर लगाए जा सकते हैं। इनका डिज़ाइन ऐसा होना चाहिए कि पानी का बहाव न रुके और साथ ही सोलर बिजली बनाने के लिए सही सतह भी मिले।
CTPV के दोहरे फ़ायदे
CTPV का मुख्य फ़ायदा यह है कि यह बिना ज़्यादा ज़मीन लिए रिन्यूएबल बिजली पैदा कर सकता है। पंजाब में, 20-MW के कैनाल–टॉप प्रोजेक्ट से लगभग 100 एकड़ ज़मीन बचाने का अनुमान है।
सोलर पैनल से नहर के हिस्सों को ढकने से पानी पर सीधी धूप नहीं पड़ती, जिससे वाष्पीकरण (evaporation) से होने वाला पानी का नुकसान कम होता है। यह उन इलाकों के लिए खास तौर पर ज़रूरी है जहाँ पानी की कमी है और सिंचाई के पानी को बचाना अहम है।
पैनल के नीचे मौजूद पानी ठंडक भी दे सकता है, जिससे ज़्यादा तापमान के समय सोलर पैनल बेहतर काम कर सकते हैं।
स्टैटिक GK फैक्ट: फोटोवोल्टिक टेक्नोलॉजी सेमीकंडक्टर-आधारित सोलर सेल के ज़रिए सूरज की रोशनी को सीधे बिजली में बदलती है।
भारत के शुरुआती CTPV प्रोजेक्ट
भारत एक दशक से ज़्यादा समय से कैनाल–टॉप सोलर प्रोजेक्ट पर प्रयोग कर रहा है। गुजरात के मेहसाणा में नर्मदा नहर पर 2012 में शुरू किया गया 1-MW का सिस्टम इसका एक शुरुआती उदाहरण है।
बताया जाता है कि यह प्रोजेक्ट हर साल लगभग 1.6 मिलियन यूनिट बिजली पैदा करता है और साथ ही हर साल लगभग 9 मिलियन लीटर पानी बचाता है।
इसके बाद, 2014-17 के दौरान गुजरात के वड़ोदरा में दो 10-MW के सिस्टम शुरू किए गए, जबकि 2017-18 के दौरान पंजाब में लगभग 20 MW क्षमता के सिस्टम लगाए गए।
सितंबर 2025 में, पंजाब एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी ने राज्य के बड़े नहर नेटवर्क पर 40 MW के कैनाल–टॉप फोटोवोल्टिक प्रोजेक्ट के लिए ‘एक्सप्रेशन ऑफ़ इंटरेस्ट‘ (रुचि की अभिव्यक्ति) आमंत्रित किए। हरियाणा ने चुनिंदा सिंचाई नहरों पर CTPV (कैनाल–टॉप फोटोवोल्टिक) लगाने की संभावनाओं पर भी काम किया है।
पॉलिसी सपोर्ट
नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) ने 2014 में ग्रिड से जुड़े CTPV और नहर-किनारे (कैनाल–बैंक) प्रोजेक्ट्स के लिए एक पायलट–कम–डेमोंस्ट्रेशन स्कीम शुरू की थी।
इस स्कीम में नहर–ऊपर (कैनाल–टॉप) और नहर–किनारे (कैनाल–बैंक) प्रोजेक्ट्स के लिए 50-50 MW की क्षमता का लक्ष्य रखा गया था। CTPV के लिए वित्तीय सहायता की सीमा ₹3 करोड़ प्रति MW और नहर-किनारे प्रोजेक्ट्स के लिए ₹1.5 करोड़ प्रति MW, या प्रोजेक्ट लागत का 30% (जो भी कम हो) तय की गई थी।
स्टैटिक GK टिप: MNRE भारत में नवीकरणीय ऊर्जा के विकास और उसे लागू करने के लिए जिम्मेदार केंद्रीय मंत्रालय है।
भारत में बड़ी संभावना
‘सेंटर फॉर स्टडी ऑफ़ साइंस, टेक्नोलॉजी एंड पॉलिसी‘ के 2024 के एक आकलन में भारत की नहर-ऊपर और नहर-किनारे सोलर क्षमता का कुल अनुमान लगभग 131 GW लगाया गया।
इस आकलन में सोलर रेडिएशन, नहर की विशेषताओं, सबस्टेशन और संरक्षित क्षेत्रों से निकटता जैसे कारकों पर विचार किया गया। सबसे अधिक क्षमता वाले राज्यों में उत्तर प्रदेश, बिहार, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और पंजाब शामिल थे।
CTPV का विस्तार क्यों नहीं हो पाया?
अपनी क्षमता के बावजूद, CTPV अभी भी एक खास (niche) तकनीक बनी हुई है। मुख्य चुनौती प्रोजेक्ट की अधिक लागत है, क्योंकि ऊंचे स्ट्रक्चर के लिए अतिरिक्त स्टील, नींव और विशेष इंजीनियरिंग की आवश्यकता होती है।
रखरखाव भी अधिक कठिन होता है क्योंकि पैनल चालू नहरों के ऊपर लगाए जाते हैं। नहर नेटवर्क का घुमावदार और सीधा स्वरूप प्रोजेक्ट डिज़ाइन, ग्रिड कनेक्टिविटी और बिजली ट्रांसमिशन को और अधिक जटिल बना सकता है।
आगे का रास्ता
PM सूर्य सरोवर योजना, जिसमें फ्लोटिंग सोलर क्षमता का 5,000 MW का लक्ष्य रखा गया है, जलाशयों पर सोलर बिजली उत्पादन में बढ़ती रुचि को दर्शाती है। इसी तरह की पॉलिसी से नहर–ऊपर (कैनाल–टॉप) प्रोजेक्ट्स को भी बढ़ावा मिल सकता है।
CTPV के विस्तार के लिए सही जगह का चयन, मानक तकनीकी स्पेसिफिकेशन, आसान मंज़ूरी प्रक्रिया, किफायती फाइनेंस और नवीकरणीय ऊर्जा व सिंचाई एजेंसियों के बीच तालमेल की आवश्यकता होगी।
इस बात की संभावना कम है कि CTPV पारंपरिक ज़मीन पर लगे (ग्राउंड–माउंटेड) या छत पर लगे (रूफटॉप) सोलर सिस्टम की जगह ले पाएगा। हालाँकि, बिजली उत्पादन के लिए मौजूदा नहर इंफ्रास्ट्रक्चर का उपयोग नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का विस्तार कर सकता है और साथ ही ज़मीन बचा सकता है और पानी की बर्बादी को कम कर सकता है।
स्टैटिक उस्तादियन करेंट अफेयर्स टेबल
| तथ्य | विवरण |
| तकनीक | कैनाल-टॉप फोटोवोल्टिक्स |
| मुख्य उद्देश्य | नहरों के ऊपर सौर बिजली उत्पादन |
| प्रमुख लाभ | भूमि की बचत और जल वाष्पीकरण में कमी |
| भारत की प्रारंभिक परियोजना | नर्मदा नहर, मेहसाणा, गुजरात |
| प्रारंभिक परियोजना का वर्ष | 2012 |
| उदाहरण क्षमता | 1 मेगावाट |
| रिपोर्टेड वार्षिक बिजली उत्पादन | 16 लाख यूनिट |
| रिपोर्टेड वार्षिक जल बचत | लगभग 90 लाख लीटर |
| MNRE पायलट योजना | 2014 |
| संयुक्त अनुमानित क्षमता | लगभग 131 गीगावाट |
| उच्च संभावनाओं वाले राज्य | उत्तर प्रदेश, बिहार, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और पंजाब |
| प्रमुख चुनौती | उच्च अवसंरचना और रखरखाव लागत |
| संबंधित योजना | पीएम सूर्य सरोवर योजना |





