अगस्त 28, 2026 2:29 अपराह्न

LRLACM के सफल परीक्षण से भारत की सटीक हमला करने की क्षमता मजबूत हुई

करंट अफेयर्स: लॉन्ग रेंज लैंड अटैक क्रूज़ मिसाइल (LRLACM), DRDO, डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप, ओडिशा, क्रूज़ मिसाइल, इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज, एरोनॉटिकल डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट, आत्मनिर्भर भारत, सटीक हमला (precision strike), रक्षा तकनीक

India Strengthens Precision Strike Capability with Successful LRLACM Test

DRDO ने स्वदेशी मिसाइल के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की

रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने 15 जून, 2026 को ओडिशा तट पर स्थित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से लॉन्ग रेंज लैंड अटैक क्रूज़ मिसाइल (LRLACM) का सफल उड़ान परीक्षण किया। मिसाइल ने मिशन के सभी लक्ष्यों को सफलतापूर्वक पूरा किया, जो भारत की स्वदेशी लंबी दूरी की सटीक हमला करने की क्षमता में एक महत्वपूर्ण प्रगति है।

इस सफल परीक्षण ने मिसाइल के प्रदर्शन, नेविगेशन, गाइडेंस और कंट्रोल सिस्टम की पुष्टि की। चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज (ITR) द्वारा तैनात कई ट्रैकिंग उपकरणों ने पूरी उड़ान के दौरान मिसाइल पर नज़र रखी।

स्टैटिक GK तथ्य: DRDO रक्षा मंत्रालय के अधीन काम करता है और स्वदेशी रक्षा तकनीकों और रणनीतिक हथियार प्रणालियों को विकसित करने के लिए भारत की प्रमुख एजेंसी है।

लॉन्ग रेंज लैंड अटैक क्रूज़ मिसाइल को समझना

लॉन्ग रेंज लैंड अटैक क्रूज़ मिसाइल (LRLACM) एक स्वदेशी रूप से विकसित सटीकनिर्देशित (precision-guided) क्रूज़ मिसाइल है, जिसे लंबी दूरी पर ज़मीन पर स्थित रणनीतिक लक्ष्यों को नष्ट करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। बैलिस्टिक मिसाइलों के विपरीत, क्रूज़ मिसाइलें कम ऊंचाई पर उड़ान भरती हैं, जिससे दुश्मन के रडार सिस्टम के लिए इनका पता लगाना और इन्हें रोकना मुश्किल हो जाता है।

यह मिसाइल सैन्य बुनियादी ढांचे, कमांड सेंटरों, लॉजिस्टिक्स हब और अन्य महत्वपूर्ण लक्ष्यों पर सटीक हमला करने में सक्षम है। इसका उन्नत नेविगेशन सिस्टम इसे बहुत सटीकता के साथ पहले से तय उड़ान पथ का पालन करने में मदद करता है।

LRLACM की मुख्य विशेषताएं

इस मिसाइल में कई उन्नत तकनीकें शामिल हैं जो इसकी परिचालन प्रभावशीलता को बढ़ाती हैं। इसकी कम ऊंचाई वाली उड़ान प्रोफ़ाइल दुश्मन के वायु रक्षा प्रणालियों के खिलाफ इसके बचे रहने की क्षमता (survivability) को काफी बढ़ा देती है और साथ ही सटीक हमले भी सुनिश्चित करती है।

बेंगलुरु स्थित एरोनॉटिकल डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट (ADE) ने इस परियोजना के लिए नोडल प्रयोगशाला के रूप में काम किया, जिसमें DRDO की कई प्रयोगशालाओं और भारतीय रक्षा उद्योगों ने मिसाइल के विकास में योगदान दिया। यह स्वदेशी रक्षा निर्माण में भारत की बढ़ती क्षमता को दर्शाता है।

स्टैटिक GK टिप: क्रूज़ मिसाइलें आम तौर पर एरोडायनामिक लिफ्ट का उपयोग करके पृथ्वी के वायुमंडल के भीतर उड़ान भरती हैं, जबकि बैलिस्टिक मिसाइलें एक ऊंचे चाप वाले रास्ते (high-arching trajectory) का पालन करती हैं और अपने लक्ष्यों पर हमला करने से पहले वायुमंडल में फिर से प्रवेश करती हैं।

भारत की रक्षा तैयारियों के लिए महत्व

इस सफल उड़ान परीक्षण से भारत की लंबी दूरी तक पारंपरिक हमले करने की क्षमता मजबूत होती है और रणनीतिक प्रतिरोध (strategic deterrence) बढ़ता है। सटीक निशाना लगाने वाली क्रूज़ मिसाइलें आधुनिक युद्ध का अहम हिस्सा बनती जा रही हैं क्योंकि ये कम से कम नुकसान के साथ महत्वपूर्ण लक्ष्यों को नष्ट कर सकती हैं।

यह विकास आयातित मिसाइल प्रणालियों पर निर्भरता कम करके और स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देकर सरकार की आत्मनिर्भर भारत पहल का भी समर्थन करता है। यह उन्नत मिसाइल तकनीकों और रणनीतिक रक्षा क्षमताओं में आत्मनिर्भरता की दिशा में भारत की प्रगति को दर्शाता है।

आधुनिक युद्ध में क्रूज़ मिसाइलें

आधुनिक क्रूज़ मिसाइलें सैन्य अभियानों के दौरान सशस्त्र बलों को लचीलापन, सटीकता और सुरक्षित रहने की क्षमता (survivability) प्रदान करती हैं। ज़मीन के करीब उड़ान भरने की उनकी क्षमता उन्हें रडार की पकड़ से बचने में मदद करती है, साथ ही पूरे मिशन के दौरान सटीक निशाना बनाए रखती है।

ऐसी मिसाइल प्रणालियों का इस्तेमाल दुश्मन के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे के खिलाफ गहरे हमले (deep-strike) वाले अभियानों के लिए बड़े पैमाने पर किया जाता है और ये किसी देश की प्रतिरोधक क्षमता को काफी बढ़ाती हैं। जैसे-जैसे भू-राजनीतिक सुरक्षा चुनौतियां बदल रही हैं, राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए स्वदेशी लंबी दूरी की मिसाइल क्षमताएं और भी महत्वपूर्ण होती जा रही हैं।

स्टैटिक GK तथ्य: डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप (जिसे पहले व्हीलर द्वीप के नाम से जाना जाता था) ओडिशा के तट पर स्थित है और रणनीतिक रक्षा प्रणालियों के लिए भारत की प्रमुख मिसाइल परीक्षण सुविधाओं में से एक है।

उस्तादियन समसामयिकी स्थायी तथ्य तालिका

तथ्य विवरण
परीक्षण की गई मिसाइल लंबी दूरी की भूमि-आक्रमण क्रूज़ मिसाइल (LRLACM)
परीक्षण करने वाली संस्था रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO)
परीक्षण की तिथि 15 जून 2026
प्रक्षेपण स्थल डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम द्वीप, ओडिशा
नोडल प्रयोगशाला वैमानिकी विकास प्रतिष्ठान (ADE), बेंगलुरु
मिसाइल का प्रकार लंबी दूरी की सटीक-निर्देशित क्रूज़ मिसाइल
निगरानी सुविधा एकीकृत परीक्षण रेंज (ITR), चांदीपुर
प्रमुख उद्देश्य भारत की स्वदेशी लंबी दूरी की सटीक प्रहार क्षमता को मजबूत करना
रक्षा पहल आत्मनिर्भर भारत
रणनीतिक महत्व भारत की सटीक प्रहार और प्रतिरोधक क्षमताओं को बढ़ाना
India Strengthens Precision Strike Capability with Successful LRLACM Test
  1. DRDO ने 15 जून, 2026 को लॉन्ग रेंज लैंड अटैक क्रूज़ मिसाइल (LRLACM) का सफल परीक्षण किया।
  2. इस मिसाइल को ओडिशा के तट पर स्थित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से लॉन्च किया गया था।
  3. LRLACM ने उड़ान परीक्षण के दौरान मिशन के सभी लक्ष्यों को सफलतापूर्वक हासिल किया।
  4. यह मिसाइल भारत की स्वदेशी लंबी दूरी की सटीक हमला करने की क्षमता को मजबूत करती है।
  5. DRDO रक्षा मंत्रालय के अधीन काम करता है।
  6. LRLACM स्वदेशी रूप से विकसित सटीक-निर्देशित (precision-guided) क्रूज़ मिसाइल है।
  7. इस मिसाइल को लंबी दूरी पर स्थित रणनीतिक ज़मीनी लक्ष्यों पर हमला करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
  8. क्रूज़ मिसाइलें कम ऊंचाई पर उड़ती हैं, जिससे दुश्मन के रडार के लिए इनका पता लगाना मुश्किल होता है।
  9. यह मिसाइल सैन्य बुनियादी ढांचे, कमांड सेंटरों और लॉजिस्टिक्स हब को सटीक रूप से निशाना बना सकती है।
  10. बेंगलुरु स्थित एरोनॉटिकल डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट (ADE) इस प्रोजेक्ट के लिए नोडल प्रयोगशाला थी।
  11. मिसाइल के विकास मेंDRDO की कई प्रयोगशालाओं और भारतीय रक्षा उद्योगों ने योगदान दिया।
  12. क्रूज़ मिसाइलें एरोडायनामिक लिफ्ट का उपयोग करके पृथ्वी के वायुमंडल के भीतर उड़ती हैं।
  13. बैलिस्टिक मिसाइलें वायुमंडल में दोबारा प्रवेश करने से पहले ऊंचे चाप वाले रास्ते (trajectory) का अनुसरण करती हैं।
  14. यह मिसाइल रक्षा निर्माण मेंआत्मनिर्भर भारत’ पहल का समर्थन करती है।
  15. चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज (ITR) ने उड़ान के दौरान मिसाइल की निगरानी की।
  16. इस सफल परीक्षण से भारत की रणनीतिक प्रतिरोध क्षमता (strategic deterrence capability) बढ़ती है।
  17. सटीक-निर्देशित क्रूज़ मिसाइलें कम से कम नुकसान (collateral damage) के साथ महत्वपूर्ण लक्ष्यों को नष्ट कर सकती हैं।
  18. डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप को पहले व्हीलर द्वीप के नाम से जाना जाता था।
  19. डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप भारत की प्रमुख मिसाइल परीक्षण सुविधाओं में से एक है।
  20. LRLACM उन्नत मिसाइल तकनीक में भारत की आत्मनिर्भरता को मजबूत करती है।

 

Q1. 15 जून 2026 को लंबी दूरी की भूमि-आक्रमण क्रूज मिसाइल (LRLACM) का सफल उड़ान परीक्षण किस संगठन ने किया?


Q2. लंबी दूरी की भूमि-आक्रमण क्रूज मिसाइल (LRLACM) का सफल परीक्षण कहां से किया गया?


Q3. LRLACM के विकास के लिए DRDO की कौन-सी प्रयोगशाला नोडल प्रयोगशाला थी?


Q4. LRLACM जैसी क्रूज मिसाइलों की कौन-सी विशेषता उन्हें पहचानना और रोकना कठिन बनाती है?


Q5. LRLACM का सफल स्वदेशी विकास भारत सरकार की किस पहल को समर्थन देता है?


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