PAI 2.0 रिपोर्ट जारी
पंचायती राज मंत्रालय ने 24 अप्रैल को पंचायत उन्नति सूचकांक (PAI) 2.0 रिपोर्ट जारी की, जिसे राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह रिपोर्ट पूरे भारत में ग्राम पंचायतों के विकास प्रदर्शन का मूल्यांकन करती है और एक राष्ट्रीय ग्रामीण शासन रिपोर्ट कार्ड के रूप में कार्य करती है।
33 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की कुल 2.59 लाख ग्राम पंचायतों ने इस मूल्यांकन में भाग लिया। भागीदारी दर 97.30% तक पहुँच गई, जो सूचकांक के पिछले संस्करण की तुलना में एक बड़ी वृद्धि दर्शाती है।
स्थैतिक GK तथ्य: राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस हर साल 24 अप्रैल को मनाया जाता है क्योंकि 73वां संवैधानिक संशोधन अधिनियम, 1992 इसी तारीख को 1993 में लागू हुआ था।
अग्रणी पंचायतों की संख्या में वृद्धि
रिपोर्ट ने 3,635 ग्राम पंचायतों को ‘अग्रणी‘ (A ग्रेड) के रूप में पहचाना। लगभग 1,18,824 पंचायतों को ‘निष्पादक‘ (B ग्रेड) श्रेणी में रखा गया।
यह ग्रेडिंग प्रणाली सरकारों को उच्च-प्रदर्शन करने वाली पंचायतों और उन क्षेत्रों की पहचान करने में मदद करती है जिन्हें प्रशासनिक सहायता की आवश्यकता है। पंचायतों को समग्र अंकों के आधार पर पाँच श्रेणियों में विभाजित किया गया है।
इन श्रेणियों में शामिल हैं:
• उपलब्धि हासिल करने वाला (A+) – 90 से अधिक अंक
• अग्रणी (A) – 75 और 90 के बीच अंक
• निष्पादक (B) – 60 और 75 के बीच अंक
• आकांक्षी (C) – 40 और 60 के बीच अंक
• शुरुआती (D) – 40 से कम अंक
डेटा–आधारित शासन पर ज़ोर
PAI 2.0 के ढांचे को आसान कार्यान्वयन और पारदर्शिता के लिए सरल बनाया गया था। यह सूचकांक अब नौ विकास विषयों में 150 संकेतकों और 230 डेटा बिंदुओं का उपयोग करके पंचायतों का मूल्यांकन करता है।
अपडेट किए गए फ्रेमवर्क में किए गए बड़े सुधारों में एक सिंगल इंटीग्रेटेड डेटा एंट्री सिस्टम, रियल–टाइम मॉनिटरिंग डैशबोर्ड और ग्राम सभा से अनिवार्य मंज़ूरी शामिल हैं। स्थानीय भाषाओं के लिए समर्थन से स्थानीय निकायों की पहुँच भी बेहतर हुई है।
स्टैटिक GK टिप: ग्राम सभा में गाँव के सभी रजिस्टर्ड वोटर शामिल होते हैं और यह ग्रामीण भारत में स्थानीय स्वशासन की नींव के तौर पर काम करती है।
आजीविका और स्वास्थ्य के क्षेत्र में मज़बूत प्रदर्शन
रिपोर्ट में ‘गरीबी–मुक्त और बेहतर आजीविका‘ विषय के तहत हुई अहम प्रगति पर रोशनी डाली गई है। इस श्रेणी में लगभग 3,313 ग्राम पंचायतों को A+ ग्रेड मिला।
इससे गरीबी कम करने, ग्रामीण रोज़गार पैदा करने और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों में हुए सुधारों का पता चलता है। स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण उद्यमिता के बढ़ने से भी गाँव के विकास को बढ़ावा मिला।
‘स्वस्थ पंचायतें‘ श्रेणी में भी एक और बड़ी उपलब्धि देखने को मिली। लगभग 1,015 पंचायतों को निवारक स्वास्थ्य देखभाल, स्वच्छता, पोषण जागरूकता और साफ–सफाई की आदतों में सुधार के लिए A+ ग्रेड दिया गया।
स्टैटिक GK तथ्य: ग्रामीण भारत में विकेंद्रीकृत शासन और लोकतांत्रिक भागीदारी को मज़बूत करने के लिए साल 2004 में पंचायती राज मंत्रालय की स्थापना की गई थी।
राज्य–वार रुझान
उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और गुजरात जैसे बड़े राज्यों ने सर्वेक्षण प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर हिस्सा लिया।
केरल और त्रिपुरा जैसे राज्यों ने प्रभावी स्थानीय शासन और सामाजिक विकास मॉडल की वजह से बेहतर प्रदर्शन वाली श्रेणियों में मज़बूत उपस्थिति दर्ज कराई। हालाँकि, कई क्षेत्र अभी भी ‘आकांक्षी‘ (Aspirant) और ‘शुरुआती‘ (Beginner) श्रेणियों में ही बने रहे, जिससे ग्रामीण विकास में असमानता का पता चलता है।
यह रिपोर्ट पूरे भारत में समावेशी और टिकाऊ ग्रामीण विकास हासिल करने के लिए ज़मीनी स्तर के संस्थानों को मज़बूत बनाने के महत्व पर ज़ोर देती है।
Static Usthadian Current Affairs Table
| विषय | विवरण |
| संबंधित मंत्रालय | पंचायती राज मंत्रालय |
| जारी की गई रिपोर्ट | पंचायत एडवांसमेंट इंडेक्स 2.0 |
| जारी करने का अवसर | राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस |
| मनाए जाने की तिथि | 24 अप्रैल |
| कुल शामिल पंचायतें | लगभग 2.59 लाख |
| भागीदारी दर | 97.30% |
| फ्रंट रनर पंचायतें | 3,635 |
| परफॉर्मर पंचायतें | 1,18,824 |
| संवैधानिक आधार | 73वाँ संविधान संशोधन अधिनियम |
| प्रमुख फोकस क्षेत्र | आजीविका, स्वास्थ्य, शासन, स्वच्छता |





