भारत ने परफ़ॉर्मेंस-लिंक्ड एनवायरनमेंटल अवार्ड शुरू किया
भारत ने हवा, पानी और ज़मीन के प्रदूषण में वेरिफ़ाइड कमी को इनाम देने के लिए अपना पहला रिज़ल्ट–बेस्ड एनवायरनमेंटल अवार्ड – “ज़ीरो प्राइज़” लॉन्च किया है। इस पहल की शुरुआत नई दिल्ली में ₹5 करोड़ के कॉर्पस के साथ की गई।
पारंपरिक अवार्ड्स के विपरीत, ज़ीरो प्राइज़ सीधे फ़ाइनेंशियल इंसेंटिव को इंडिपेंडेंटली वेरिफ़ाइड एनवायरनमेंटल नतीजों से जोड़ता है। केवल मापने योग्य और ज़मीनी प्रदूषण में वास्तविक कमी ही पुरस्कार के लिए पात्र होगी।
स्टैटिक GK फैक्ट: नई दिल्ली में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) का मुख्यालय स्थित है, जो पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करता है।
₹5 करोड़ के कॉर्पस का स्ट्रक्चर
कुल ₹5 करोड़ की राशि तीन प्रमुख श्रेणियों में बाँटी जाएगी, प्रत्येक में ₹1 करोड़ का पुरस्कार:
- एयर पॉल्यूशन में कमी
• वॉटर पॉल्यूशन में कमी
• लैंड पॉल्यूशन में कमी
प्रतिभागियों को एक डॉक्यूमेंटेड बेसलाइन स्थापित करनी होगी और 12 महीने की अवधि में मापने योग्य कमी दिखानी होगी। अंतिम चयन से पहले थर्ड–पार्टी इंडिपेंडेंट वैलिडेशन अनिवार्य है।
यह मॉडल विश्व स्तर पर उन चुनिंदा संरचित प्रणालियों में शामिल है जो एनवायरनमेंटल अकाउंटेबिलिटी को सीधे मॉनिटरी रिवॉर्ड से जोड़ते हैं।
साइंटिफिक मेज़रमेंट और वेरिफिकेशन
ज़ीरो प्राइज़ CPCB के वैज्ञानिक प्रोटोकॉल के अनुरूप कार्य करेगा।
एयर पॉल्यूशन के लिए:
PM2.5 और PM10 जैसे पार्टिकुलेट मैटर में कमी को फिक्स्ड–लोकेशन मॉनिटरिंग सिस्टम से मापा जाएगा। मौसम संबंधी एडजस्टमेंट भी लागू होंगे।
वॉटर पॉल्यूशन के लिए:
BOD (बायोलॉजिकल ऑक्सीजन डिमांड), COD (केमिकल ऑक्सीजन डिमांड) और न्यूट्रिएंट लोड जैसे पैरामीटर को रेगुलेटरी स्टैंडर्ड के अनुसार मापा जाएगा।
लैंड पॉल्यूशन के लिए:
कचरे के लीकेज और अनुचित निस्तारण को वज़न–आधारित ऑडिट और थर्ड-पार्टी मॉनिटरिंग से सत्यापित किया जाएगा।
स्टैटिक GK टिप: PM2.5 2.5 माइक्रोमीटर से छोटे कण होते हैं जो सीधे रक्तप्रवाह में प्रवेश कर सकते हैं, इसलिए इन्हें अत्यधिक खतरनाक माना जाता है।
एलिजिबिलिटी और पार्टिसिपेशन
यह अवार्ड पूरे भारत में:
• स्टार्ट-अप
• NGO
• कॉर्पोरेट
• म्युनिसिपल बॉडी
• रिसर्च इंस्टीट्यूशन
• इंडिविजुअल इनोवेटर
के लिए खुला है।
केवल वही प्रोजेक्ट पात्र होंगे जो शहरी या पेरी-अर्बन क्षेत्रों में रियल–वर्ल्ड पायलट प्रोजेक्ट लागू कर रहे हों। केवल कॉन्सेप्ट-आधारित प्रस्ताव स्वीकार नहीं किए जाएंगे।
प्रतिभागियों को इंडिपेंडेंट मॉनिटरिंग के लिए सहमत होना अनिवार्य है, जिससे यह पहल परफ़ॉर्मेंस–बेस्ड एनवायरनमेंटल गवर्नेंस को मजबूत करती है।
नेशनल मिशन के साथ अलाइनमेंट
ज़ीरो प्राइज़ निम्न राष्ट्रीय मिशनों के साथ जुड़ा है:
- नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम
• नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा
• स्वच्छ भारत मिशन 2.0
स्टैटिक GK फैक्ट: नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम 2019 में नॉन-अटेनमेंट शहरों में पार्टिकुलेट पॉल्यूशन कम करने के उद्देश्य से शुरू किया गया था।
लीडरशिप का नज़रिया
डाबर इंडिया लिमिटेड के वाइस चेयरमैन साकेत बर्मन ने कहा कि ज़ीरो प्राइज़ सैद्धांतिक चर्चाओं के बजाय साबित फील्ड–बेस्ड इनोवेशन को प्राथमिकता देता है।
स्कूल ऑफ़ पॉलिसी एंड गवर्नेंस के चेयर रुचिर पंजाबी ने इसे शोधकर्ताओं और इनोवेटर्स को मापने योग्य पर्यावरणीय परिणामों की दिशा में प्रेरित करने वाला एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
रणनीतिक बदलाव
ज़ीरो प्राइज़ भारत के एनवायरनमेंटल गवर्नेंस मॉडल में एक रणनीतिक बदलाव का संकेत देता है।
यह पहल इरादे के बजाय परिणामों को पुरस्कृत करती है और नीति निर्माण तथा जमीनी कार्यान्वयन के बीच की दूरी को कम करती है।
Static Usthadian Current Affairs Table
| विषय | विवरण |
| पहल का नाम | ज़ीरो प्राइज़ |
| पुरस्कार का स्वरूप | परिणाम-आधारित पर्यावरणीय पुरस्कार |
| कुल कोष | ₹5 करोड़ |
| प्रति श्रेणी पुरस्कार | ₹1 करोड़ प्रत्येक |
| श्रेणियाँ | वायु, जल, भूमि प्रदूषण में कमी |
| सत्यापन विधि | स्वतंत्र तृतीय-पक्ष सत्यापन |
| निगरानी मानक | केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) अनुरूप प्रोटोकॉल |
| चुनौती अवधि | 12 माह |
| संबद्ध योजनाएँ | राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनकैप), नमामि गंगे मिशन, स्वच्छ भारत मिशन 2.0 |
| मुख्य उद्देश्य | मापनीय और सत्यापित प्रदूषण में कमी सुनिश्चित करना |





