परिचय
अक्टूबर 2025 में भारत की थोक मुद्रास्फीति (WPI) नकारात्मक क्षेत्र में और गहराई तक पहुँच गई, जिससे प्रमुख वस्तु समूहों में व्यापक गिरावट दिखाई दी।
WPI -1.21% पर रहा, जबकि सितंबर में यह -0.13% था—जो थोक स्तर पर कीमतों में तेज़ गिरावट का संकेत है।
यह रुझान खाद्य, ऊर्जा और धातु श्रेणियों में कमजोर मूल्य दबावों को दर्शाता है, जिससे उत्पादक स्तर पर अपस्फीति की स्थिति बन रही है।
Static GK fact: WPI वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी किया जाता है, जबकि CPI राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा प्रकाशित होता है।
WPI क्या है?
थोक मूल्य सूचकांक (WPI) उन कीमतों में औसत परिवर्तन को मापता है जो खुदरा बाजार तक पहुंचने से पहले थोक स्तर पर देखे जाते हैं।
यह उत्पादक क्षेत्र में प्रारंभिक मुद्रास्फीति रुझानों का मूल्यांकन करने में उपयोग होता है।
वहीं, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) घरेलू स्तर पर खुदरा कीमतों को ट्रैक करता है।
Static GK Tip: भारत ने WPI के आधार वर्ष को 2004–05 से बदलकर 2011–12 किया था ताकि इसे वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाया जा सके।
अक्टूबर 2025 के प्रमुख रुझान
डेटा दर्शाता है कि कई प्रमुख WPI घटकों में लगातार गिरावट रही:
• WPI Food Index: -5.00% (लगातार दो महीने से गिरावट)
• Primary Articles: -6.18% (सब्जियों और अनाज की कीमतों में कमी)
• Fuel and Power: -2.55% (वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के कारण)
• Manufactured Products: 1.54% (सितंबर के 2.33% से कम)
Static GK fact: WPI टोकरी में Fuel & Power का वज़न 13.15% है, इसलिए वैश्विक ऊर्जा उतार-चढ़ाव भारत के थोक रुझानों को प्रभावित करते हैं।
अपस्फीति के प्रमुख कारण
कई कारकों ने WPI में गहरी अपस्फीति को बढ़ावा दिया:
– खाद्य कीमतों में व्यापक गिरावट, विशेषकर नाशवान वस्तुओं और अनाज में
– वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट
– कमजोर वैश्विक मांग के कारण धातु कीमतों में गिरावट
इन घरेलू और वैश्विक प्रभावों ने थोक बाजारों में मूल्य दबावों को कम कर दिया है।
CPI रुझानों के साथ संबंध
WPI में गिरावट, खुदरा मुद्रास्फीति में कमी के अनुरूप है।
अक्टूबर 2025 में CPI घटकर 0.25% तक आ गया—जो ऐतिहासिक रूप से कम स्तर है।
थोक और खुदरा दोनों सूचकांकों में गिरावट से संकेत मिलता है कि भारत एक दुर्लभ “समानांतर मुद्रास्फीति कमी चरण” से गुजर रहा है।
Static GK Tip: CPI में खाद्य उत्पादों का वज़न लगभग 45% है—इसलिए खाद्य कीमतें खुदरा मुद्रास्फीति पर भारी प्रभाव डालती हैं।
आर्थिक प्रभाव
थोक स्तर पर लंबे समय तक अपस्फीति विनिर्माण में मांग की कमजोरी का संकेत हो सकती है।
हालाँकि, यह उद्योगों पर लागत दबाव कम कर राहत भी देती है।
नीति निर्माता यह देखेंगे कि यह रुझान अस्थायी है या लंबे समय तक जारी रहने वाला, क्योंकि लंबे समय तक अपस्फीति से उत्पादक लाभप्रदता प्रभावित हो सकती है।
स्टैटिक उस्तादियन करंट अफेयर्स टेबल
| विषय (Topic) | विवरण (Detail) |
| अक्टूबर 2025 WPI मुद्रास्फीति | -1.21% |
| WPI फूड इंडेक्स | -5.00% |
| प्राथमिक लेख | -6.18% |
| ईंधन और ऊर्जा (Fuel & Power) | -2.55% |
| विनिर्मित उत्पाद | 1.54% |
| अक्टूबर 2025 CPI मुद्रास्फीति | 0.25% |
| WPI आधार वर्ष | 2011–12 |
| WPI जारी करने वाला मंत्रालय | वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय |





