नई डेयरी कोशिशों का बैकग्राउंड
भारत सरकार ने कोऑपरेटिव–ड्रिवन फ्रेमवर्क के माध्यम से डेयरी सेक्टर को मजबूत करने के लिए व्हाइट रेवोल्यूशन 2.0 की शुरुआत की है। इस पहल का उद्देश्य पाँच वर्षों के भीतर डेयरी कोऑपरेटिव द्वारा दूध की खरीद में 50% वृद्धि करना है।
2028-29 तक दैनिक खरीद का लक्ष्य 1,007 लाख किलोग्राम प्रतिदिन तय किया गया है, जिससे भारत की दुनिया के सबसे बड़े दूध उत्पादक देश की स्थिति और सुदृढ़ होगी।
स्टैटिक GK फैक्ट: भारत ने 1998 में दूध उत्पादन में United States को पीछे छोड़ दिया था और वर्तमान में वैश्विक दूध उत्पादन का 20% से अधिक योगदान देता है।
यह कार्यक्रम पहली व्हाइट रेवोल्यूशन पर आधारित है, जिसे Operation Flood के नाम से जाना जाता है और जिसे National Dairy Development Board (NDDB) के तहत डॉ. वर्गीस कुरियन के नेतृत्व में लागू किया गया था।
मुख्य उद्देश्य
इस योजना का फोकस उन गांवों और पंचायतों में नई डेयरी कोऑपरेटिव सोसाइटीज़ स्थापित करना है, जहाँ अभी डेयरी संरचना मौजूद नहीं है। इसका उद्देश्य दूध खरीद प्रणाली को सुदृढ़ करना, बाजार तक पहुंच बढ़ाना और छोटे व सीमांत किसानों की आय में वृद्धि करना है।
संगठित डेयरी सेक्टर में कोऑपरेटिव की हिस्सेदारी बढ़ाने के साथ-साथ न्यूट्रिशनल सिक्योरिटी को भी सुदृढ़ करने पर जोर दिया गया है, क्योंकि दूध प्रोटीन, कैल्शियम और आवश्यक माइक्रोन्यूट्रिएंट्स का प्रमुख स्रोत है।
स्टैटिक GK टिप: NDDB की स्थापना 1965 में हुई थी और इसका मुख्यालय गुजरात के आनंद में स्थित है, जिसे “भारत की मिल्क कैपिटल” कहा जाता है।
दोतरफा विस्तार की रणनीति
कार्यक्रम के तहत दोहरी रणनीति अपनाई गई है। पहली, लगभग 75,000 नई डेयरी कोऑपरेटिव सोसाइटीज़ (DCS) उन क्षेत्रों में स्थापित की जाएंगी जहाँ डेयरी नेटवर्क नहीं है। इससे अधिक किसान औपचारिक सप्लाई चेन से जुड़ सकेंगे।
दूसरी, लगभग 46,422 मौजूदा DCS को बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, मार्केट लिंकेज और ऑपरेशनल एफिशिएंसी के माध्यम से मजबूत किया जाएगा।
कोऑपरेटिव मॉडल किसानों को सही मूल्य, कलेक्टिव बारगेनिंग पावर और ट्रांसपेरेंट पेमेंट सिस्टम सुनिश्चित करता है।
इंफ्रास्ट्रक्चर और फाइनेंशियल सपोर्ट
इस पहल की रीढ़ मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर है। इसमें ऑटोमैटिक मिल्क कलेक्शन यूनिट (AMCU), डेटा प्रोसेसिंग सिस्टम, मिल्क टेस्टिंग इक्विपमेंट और बल्क मिल्क कूलर जैसी सुविधाएं शामिल हैं।
वित्तीय सहायता नेशनल डेयरी डेवलपमेंट प्रोग्राम 2.0 (NPDD 2.0) के अंतर्गत प्रदान की जाती है, जिसे Department of Animal Husbandry and Dairying लागू करता है।
स्टैटिक GK फैक्ट: यह विभाग Ministry of Fisheries, Animal Husbandry and Dairying के अंतर्गत कार्य करता है, जिसे 2019 में एक अलग मंत्रालय के रूप में स्थापित किया गया था।
महिलाओं और न्यूट्रिशन पर फोकस
भारत की लगभग 70% डेयरी वर्कफोर्स महिलाएं हैं, लेकिन उनका योगदान प्रायः अनौपचारिक क्षेत्र में सीमित रहता है। व्हाइट रेवोल्यूशन 2.0 का उद्देश्य महिलाओं के नेतृत्व वाली कोऑपरेटिव को बढ़ावा देकर और निर्णय-निर्माण में उनकी भागीदारी बढ़ाकर जेंडर इक्विटी और फाइनेंशियल इनक्लूजन को मजबूत करना है।
दूध की बढ़ी हुई उपलब्धता से विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में न्यूट्रिशनल स्टेटस में सुधार होगा। प्रोटीन और माइक्रोन्यूट्रिएंट्स की बेहतर पहुंच सीधे तौर पर फूड सिक्योरिटी को सुदृढ़ करेगी।
यह पहल भारत के ग्रामीण विकास, कृषि-आधारित आजीविका और पोषण सुरक्षा को एकीकृत रूप से मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
स्टैटिक उस्थादियन करंट अफेयर्स तालिका
| विषय | विवरण |
| पहल का नाम | व्हाइट रेवोल्यूशन 2.0 |
| प्रारंभिक प्राधिकरण | Ministry of Cooperation |
| दूध खरीद लक्ष्य | 2028–29 तक 1,007 लाख किलोग्राम प्रतिदिन |
| विस्तार योजना | 75,000 नए DCS तथा 46,422 मौजूदा DCS का सुदृढ़ीकरण |
| वित्तीय समर्थन | राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम 2.0 |
| महिला सहभागिता | डेयरी कार्यबल का लगभग 70% |
| ऐतिहासिक संदर्भ | Dr. Verghese Kurien द्वारा संचालित ऑपरेशन फ्लड |
| भारत की वैश्विक रैंक | विश्व का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश |





