कोविलूर मंदिर में ऐतिहासिक खोज
तमिलनाडु के तिरुवन्नामलाई जिले के कोविलूर स्थित शिव मंदिर में पुनर्निर्माण कार्य के दौरान एक असाधारण पुरातात्त्विक खोज हुई —
यहाँ से कुल 103 स्वर्ण मुद्राएँ (Gold Coins) बरामद हुईं।
विशेषज्ञों के अनुसार, ये सिक्के विजयनगर युग (लगभग 600 वर्ष पुराने) से संबंधित हैं।
मुद्राओं का ऐतिहासिक महत्व
इन सिक्कों पर पंच-चिह्न (Punch Marks) बने हैं और उन पर सूअर का प्रतीक (Pig Emblem) अंकित है —
यह प्रतीक विजयनगर शासकों का विशिष्ट राजचिह्न था।
साम्राज्य के राजाओं ने इसे विष्णु के वराह अवतार (Varaha Incarnation) से जोड़ा, जो उनके लिए शुभ और दैवीय शक्ति का प्रतीक माना जाता था।
Static GK Fact: सूअर (वराह) चिह्न विजयनगर साम्राज्य की राजकीय मुद्रा का प्रतीक था और इसे धर्म और सत्ता के संयोग के रूप में देखा जाता था।
विजयनगर साम्राज्य – दक्षिण भारत की गौरव गाथा
विजयनगर साम्राज्य की स्थापना 1336 ईस्वी में हरिहर प्रथम और बुका राय प्रथम ने संत विद्यारण्य के मार्गदर्शन में की थी।
यह साम्राज्य 17वीं शताब्दी के उत्तरार्ध तक दक्षिण भारत की सबसे शक्तिशाली और समृद्ध राजशक्ति के रूप में विकसित हुआ।
इसकी राजधानी हम्पी, तुंगभद्रा नदी के तट पर स्थित थी और यह व्यापार, संस्कृति और स्थापत्य कला का विश्व प्रसिद्ध केंद्र थी।
Static GK Tip: हम्पी (कर्नाटक) को यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल (UNESCO World Heritage Site) के रूप में मान्यता प्राप्त है।
आर्थिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्व
यह खोज विजयनगर साम्राज्य की आर्थिक समृद्धि और व्यापारिक गतिविधियों का प्रमाण है।
उनके शासनकाल में स्वर्ण सिक्के (वराह या पगोडा) न केवल व्यापारिक लेनदेन बल्कि मंदिर दान और धार्मिक अनुष्ठानों में भी प्रयुक्त होते थे।
यह एक संगठित मुद्रा प्रणाली (Monetary System) और सक्रिय व्यापारिक नेटवर्क की उपस्थिति को सिद्ध करता है।
Static GK Fact: विजयनगर शासकों ने सोने, चाँदी और ताँबे की मुद्राएँ जारी की थीं, जिन्हें “पगोडा (Pagoda)” या “वराह” कहा जाता था। ये मुद्राएँ दक्षिण एशिया में व्यापक रूप से स्वीकृत थीं।
पुरातात्त्विक और ऐतिहासिक महत्व
इन सिक्कों की खोज से उस काल के स्थानीय शासन, मंदिर संरक्षकता (Temple Patronage) और व्यापारिक नेटवर्क की नई जानकारी मिलती है।
तमिलनाडु राज्य पुरातत्व विभाग ने इन सिक्कों को संरक्षण और वैज्ञानिक अध्ययन के लिए अपने कब्जे में लिया है।
धार्मिक और सामाजिक जुड़ाव
विजयनगर काल में मंदिर केवल धार्मिक केंद्र ही नहीं बल्कि आर्थिक-सामाजिक गतिविधियों के केंद्र भी थे।
शिव मंदिर में इन मुद्राओं का पाया जाना इस बात का प्रमाण है कि धन का भंडारण “मंदिर निधि” के रूप में किया जाता था, जो श्रद्धा और राजकीय संरक्षण दोनों का प्रतीक था।
Static Usthadian Current Affairs Table
| विषय (Topic) | विवरण (Detail) |
| खोज का स्थान | कोविलूर शिव मंदिर, तिरुवन्नामलाई जिला, तमिलनाडु |
| बरामद सिक्कों की संख्या | 103 पंच-चिह्नित स्वर्ण मुद्राएँ |
| अनुमानित आयु | लगभग 600 वर्ष पुरानी |
| संबंधित राजवंश | विजयनगर साम्राज्य |
| मुद्राओं पर चिह्न | सूअर (वराह प्रतीक) |
| साम्राज्य के संस्थापक | हरिहर प्रथम और बुका राय प्रथम |
| राजधानी | हम्पी (वर्तमान कर्नाटक में) |
| साम्राज्य की अवधि | 1336 ईस्वी – 17वीं शताब्दी का उत्तरार्ध |
| धातु संरचना | स्वर्ण मुद्राएँ (वराह/पगोडा) |
| निगरानी संस्था | तमिलनाडु राज्य पुरातत्व विभाग |





