समारोह का उद्घाटन
7 नवम्बर 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष के समारोह का उद्घाटन किया। यह कार्यक्रम 7 नवम्बर 2026 तक चलने वाले वर्षभर के स्मरण का आरंभ है। उद्घाटन ने भारत की सांस्कृतिक पहचान और राष्ट्रीय एकीकरण को रेखांकित किया—उस गीत की अक्षय भावना को सलाम करते हुए जिसने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान देशवासियों को एक सूत्र में बाँधा।
कार्यक्रम की प्रमुख झलकियाँ
समारोह में स्मारक डाक-टिकट और स्मारक सिक्का जारी किए गए। नागरिक सहभागिता को बढ़ावा देने हेतु पोर्टल — vandemataram150.in लॉन्च किया गया, जहाँ लोग गीत की अपनी प्रस्तुति अपलोड कर डिजिटल प्रमाणपत्र प्राप्त कर सकते हैं।
सुबह 10 बजे देशभर के स्कूलों, सरकारी दफ्तरों और सार्वजनिक संस्थानों में ‘वंदे मातरम्’ का पूर्ण संस्करण सामूहिक गान आयोजित हुआ।
विशेष कॉन्सर्ट “Vande Mataram: Naad Ekam, Roopam Anekam” में लगभग 75 कलाकारों ने प्रस्तुति दी, और एक प्रदर्शनी ने गीत की साहित्यिक उत्पत्ति से लेकर स्वतंत्रता आंदोलन में उसकी भूमिका तक की ऐतिहासिक यात्रा को दर्शाया।
स्थैतिक जीके तथ्य: नई दिल्ली का इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम भारत का सबसे बड़ा इंडोर खेल परिसर है, जिसका उद्घाटन 1982 एशियाई खेलों के लिए हुआ था।
प्रधानमंत्री का संबोधन
प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ “एक मंत्र, एक ऊर्जा, एक स्वप्न और एक संकल्प” है—जो 140 करोड़ भारतीयों को भावनात्मक सूत्र में पिरोता है। उनके अनुसार यह गीत मात्र एक रचना नहीं, बल्कि भारत माता के प्रति भक्ति और एकता व प्रगति के साझा आदर्शों का प्रतीक है।
‘वंदे मातरम्’ का ऐतिहासिक महत्व
बंकिम चंद्र चट्टर्जी ने अक्षय नवमी (लगभग 7 नवम्बर 1875) के आसपास इस गीत की रचना की, जो प्रथम बार उनके उपन्यास ‘आनंदमठ’ में प्रकाशित हुआ और ‘बंगदर्शन’ पत्रिका के माध्यम से प्रसारित हुआ। यह गीत शीघ्र ही स्वतंत्रता आंदोलन का उद्घोष बन गया।
स्थैतिक जीके टिप: ‘वंदे मातरम्’ का पहला सार्वजनिक गायन 1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस अधिवेशन (कलकत्ता) में रवीन्द्रनाथ टैगोर ने किया था।
1950 में डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने इसके स्वतंत्रता संग्राम में ऐतिहासिक योगदान को मान्यता देते हुए घोषणा की कि ‘वंदे मातरम्’ को राष्ट्रीय गान ‘जन गण मन’ के समकक्ष दर्जा दिया जाएगा—और इसके प्रथम दो अंतरे भारत के राष्ट्रीय गीत के रूप में स्वीकृत हुए।
सांस्कृतिक व नागरिक प्रभाव
यह 150-वर्षीय उत्सव केवल एक ऐतिहासिक श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि नागरिक सहभागिता और डिजिटल समावेशन को प्रोत्साहित करने की पहल भी है। देशभक्ति की भावना को आधुनिक तकनीक से जोड़कर कार्यक्रम का उद्देश्य नए पीढ़ी को भारत की स्वतंत्रता-धरोहर और भाषिक विविधता से और अधिक जोड़ना है।
स्थैतिक जीके तथ्य: “वंदे मातरम्” का अर्थ है—“हे माँ, मैं तुम्हें नमन करता/करती हूँ”; यह मातृभूमि के प्रति श्रद्धा का प्रतीक है।
Static Usthadian Current Affairs Table
| विषय | विवरण |
| कार्यक्रम | “वंदे मातरम्” के 150 वर्ष का उत्सव |
| उद्घाटनकर्ता | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी |
| तिथि | 7 नवम्बर 2025 |
| स्थल | इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम, नई दिल्ली |
| अवधि | 7 नवम्बर 2025 – 7 नवम्बर 2026 |
| पोर्टल | vandemataram150.in |
| रचयिता | बंकिम चंद्र चट्टर्जी |
| उपन्यास | आनंदमठ (1875) |
| पहला सार्वजनिक गायन | 1896, कांग्रेस अधिवेशन (कलकत्ता) — रवीन्द्रनाथ टैगोर |
| राष्ट्रीय गीत के रूप में मान्यता | 1950, डॉ. राजेंद्र प्रसाद द्वारा (प्रथम दो अंतरे) |
| राष्ट्रीय एकता का प्रतीक | “Vande Mataram: Naad Ekam, Roopam Anekam” कॉन्सर्ट |
| डाक-टिकट व सिक्का | जारी |
| थीम | सांस्कृतिक एकता और राष्ट्रीय गौरव |
| आयोजक | संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार |
| सहभागिता | नागरिक — डिजिटल पोर्टल के माध्यम से |





