नई स्पेस मैन्युफैक्चरिंग पहल
तमिलनाडु TIDCO Space Propellant Park की स्थापना के माध्यम से अपने अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत कर रहा है। यह पार्क आगामी ISRO लॉन्च साइट कुलसेकरपट्टिनम के पास विकसित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य भारत की छोटे उपग्रह प्रक्षेपण क्षमता को बढ़ाना और प्रोपेलेंट, स्पेस-ग्रेड सामग्री तथा प्रिसीजन कंपोनेंट बनाने वाली कंपनियों को एक औद्योगिक क्लस्टर में लाना है।
Static GK fact: TIDCO की स्थापना 1970 में तमिलनाडु में औद्योगिक और बुनियादी ढांचा विकास को बढ़ावा देने के लिए की गई थी।
कुलसेकरपट्टिनम का सामरिक लाभ
कुलसेकरपट्टिनम लॉन्च कॉम्प्लेक्स से दक्षिण दिशा में सीधे समुद्र के ऊपर लॉन्च संभव है। इससे किसी भी प्रकार के मार्ग-परिवर्तन या डॉगलेग manoeuvre की आवश्यकता नहीं रहती। यह बदलाव ईंधन की बचत के साथ-साथ पेलोड क्षमता बढ़ाता है और मिशन की दक्षता में उल्लेखनीय सुधार करता है।
Static GK Tip: श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर 1971 में शुरू हुआ था और भारत का प्रमुख स्पेसपोर्ट है।
लॉन्च लागत में कमी
इस साइट से होने वाले प्रक्षेपणों में लगभग 30% तक लागत में कमी आने का अनुमान है। यह छोटे उपग्रह प्रक्षेपण वाहन (SSLV) के लिए विशेष रूप से लाभदायक है, जो कम लागत और त्वरित प्रक्षेपण सेवाओं पर आधारित है। कम लागत विदेशी और वाणिज्यिक ग्राहकों को आकर्षित करेगी।
प्रोपेलेंट पार्क की स्थापना
प्रोपेलेंट पार्क को लॉन्च स्थल से कम से कम 25 किमी दूरी पर स्थापित किया जाएगा ताकि राष्ट्रीय सुरक्षा और विस्फोटक पदार्थ मानकों का पालन हो सके। यह बफर जोन ठोस, अर्ध-ठोस और तरल प्रोपेलेंट पर कार्य करने वाली कंपनियों के लिए सुरक्षित संचालन सुनिश्चित करेगा।
Static GK fact: राष्ट्रीय विस्फोटक सुरक्षा मानकों के अनुसार उच्च-ऊर्जा सामग्री इकाइयों के लिए न्यूनतम बफर दूरी अनिवार्य होती है।
कॉमन फैसिलिटी सेंटर
₹100 करोड़ की स्वीकृत निधि से एक कॉमन फैसिलिटी सेंटर स्थापित किया जा रहा है। यह केंद्र परीक्षण सुविधा, वैलिडेशन सिस्टम और साझा क्लीन-रूम निर्माण अवसंरचना प्रदान करेगा। इससे MSME और स्टार्टअप इकाइयों के लिए प्रवेश लागत कम होगी।
Static GK Tip: तमिलनाडु विनिर्माण उत्पादन में भारत के शीर्ष राज्यों में शामिल है।
अंतरिक्ष क्षेत्र में नवाचार को प्रोत्साहन
प्रोपेलेंट, सामग्री और कंपोनेंट निर्माण कंपनियों के एकत्र होने से निजी क्षेत्र की भूमिका तेजी से बढ़ेगी। यह IN-SPACe के तहत भारत की वाणिज्यिक अंतरिक्ष नीतियों के अनुरूप है। इससे वैश्विक सहयोग, तकनीकी हस्तांतरण और निर्यात-उन्मुख उत्पादन को भी बढ़ावा मिलेगा।
क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती
यह परियोजना दक्षिण तमिलनाडु को उच्च-तकनीकी केंद्र के रूप में विकसित करेगी। इंजीनियरिंग, परीक्षण और औद्योगिक डिज़ाइन क्षेत्रों में नए रोजगार सृजित होंगे। स्थानीय शैक्षणिक संस्थान R&D गतिविधियों से जुड़े जाएंगे, जिससे दीर्घकालिक प्रतिभा पाइपलाइन बनेगी।
Static GK fact: अंतरराष्ट्रीय अनुमान के अनुसार 2040 तक भारत की स्पेस इकॉनमी USD 40 बिलियन तक पहुंच सकती है।
स्टैटिक उस्तादियन करंट अफेयर्स टेबल
| विषय | विवरण |
| स्थान | कुलसेकरपट्टिनम, तमिलनाडु के पास प्रस्तावित प्रोपेलेंट पार्क |
| लॉन्च रणनीति | डॉगलेग manoeuvre से बचते हुए सीधा दक्षिण दिशा में प्रक्षेपण |
| लागत प्रभाव | SSLV मिशनों की लॉन्च लागत में लगभग 30% कमी |
| सुरक्षा आवश्यकता | पार्क लॉन्च साइट से कम से कम 25 किमी दूर स्थित |
| बजट आवंटन | कॉमन फैसिलिटी सेंटर के लिए ₹100 करोड़ |
| उद्देश्य | परीक्षण, वैलिडेशन और साझा विनिर्माण समर्थन |
| प्रमुख एजेंसी | Tamil Nadu Industrial Development Corporation (TIDCO) |
| मुख्य लाभ | निजी क्षेत्र और MSME की भागीदारी में वृद्धि |
| राष्ट्रीय संबंध | भारत के बढ़ते वाणिज्यिक अंतरिक्ष क्षेत्र को समर्थन |
| उद्योग फोकस | प्रोपेलेंट, स्पेस सामग्री और प्रिसीजन कंपोनेंट |





