नवम्बर 30, 2025 11:03 पूर्वाह्न

भारत को खिलाने वाला व्यक्ति: एम.एस. स्वामीनाथन की जीवनी

चालू घटनाएँ: एम.एस. स्वामीनाथन, The Man Who Fed India, प्रियम्बदा जयकुमार, जीवनी विमोचन, चेन्नई, हरित क्रांति, भारतीय कृषि, खाद्य सुरक्षा, आनुवंशिक अनुसंधान, ICAR

The Man Who Fed India: Biography of M.S. Swaminathan

भारत के कृषि दूरदर्शी को नई श्रद्धांजलि

‘The Man Who Fed India’ शीर्षक से नई जीवनी, जिसे प्रियम्बदा जयकुमार ने लिखा है, चेन्नई में प्रकाशित की गई।
यह पुस्तक भारत के महान कृषि वैज्ञानिक डॉ. एम.एस. स्वामीनाथन के अद्भुत जीवन को समर्पित है — जिन्होंने भारत को भूखमरी से आत्मनिर्भरता की दिशा में अग्रसर किया।
जीवनी उनके तमिलनाडु में साधारण प्रारंभ से लेकर वैश्विक कृषि परिवर्तन के प्रतीक बनने तक की यात्रा का विस्तार से वर्णन करती है।

हरित क्रांति में डॉ. स्वामीनाथन की भूमिका

डॉ. मोंकोम्बु संबासिवन स्वामीनाथन, जिन्हें “भारतीय हरित क्रांति के जनक” के रूप में जाना जाता है, ने 1960 के दशक में भारत को खाद्यान्न संकट से बाहर निकालने में केंद्रीय भूमिका निभाई।
उन्होंने नॉर्मन ई. बोरलॉग के साथ मिलकर उच्च उपज वाली गेहूं और धान की किस्में (HYVs) विकसित कीं, जिससे उत्पादन में क्रांतिकारी वृद्धि हुई।

स्थैतिक जीके तथ्य: भारत में हरित क्रांति की शुरुआत 1965 में प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री और कृषि मंत्री सी. सुब्रमणियम के नेतृत्व में हुई, जबकि वैज्ञानिक मोर्चे पर डॉ. स्वामीनाथन ने नेतृत्व संभाला।

जीवनी का मुख्य फोकस

यह जीवनी डॉ. स्वामीनाथन की वैज्ञानिक उपलब्धियों के साथ-साथ उनके किसानों के कल्याण, सतत कृषि और खाद्य सुरक्षा के प्रति आजीवन समर्पण पर भी केंद्रित है।
लेखिका प्रियम्बदा जयकुमार ने बताया है कि डॉ. स्वामीनाथन ने पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के समन्वय से ग्रामीण भारत में समान और टिकाऊ विकास का मार्ग दिखाया।

स्थैतिक जीके टिप: डॉ. स्वामीनाथन ने 1988 में एम.एस. स्वामीनाथन रिसर्च फाउंडेशन (MSSRF) की स्थापना की, जिसका मुख्यालय चेन्नई में है। यह संस्था सतत ग्रामीण विकास और जैव विविधता संरक्षण पर केंद्रित है।

वैश्विक प्रभाव और सम्मान

अपने जीवनकाल में डॉ. स्वामीनाथन ने अनेक प्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त किए —
पद्मश्री (1967), पद्मभूषण (1972) और पद्मविभूषण (1989)
उन्होंने भारत के साथ-साथ संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) और UNEP के साथ भी कार्य किया, जहाँ उन्होंने सतत कृषि नीति को आकार दिया।

स्थैतिक जीके तथ्य: डॉ. स्वामीनाथन 2007 से 2013 तक राज्यसभा सदस्य रहे और उन्होंने किसान अधिकार विधेयक तथा खाद्य सुरक्षा अधिनियम पर महत्वपूर्ण योगदान दिया।

उनकी अमर विरासत

डॉ. स्वामीनाथन के निधन (सितम्बर 2023) के बाद चेन्नई में इस जीवनी का विमोचन उनके योगदान के प्रति एक भावनात्मक श्रद्धांजलि है।
उनका प्रसिद्ध कथन —
“If agriculture goes wrong, nothing else will have a chance to go right.”
आज भी नीति-निर्माताओं और पर्यावरणविदों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

यह पुस्तक इस बात की याद दिलाती है कि दृष्टि, विज्ञान और करुणा का संगम एक राष्ट्र की नियति को बदल सकता है।
डॉ. स्वामीनाथन ने सुनिश्चित किया कि भारत की भूमि पर आशा के बीज कभी सूखें नहीं।

Static Usthadian Current Affairs Table

विषय विवरण
पुस्तक का शीर्षक The Man Who Fed India
लेखिका प्रियम्बदा जयकुमार
विषय डॉ. एम.एस. स्वामीनाथन की जीवनी
विमोचन स्थल चेन्नई, तमिलनाडु
प्रमुख योगदान भारत की हरित क्रांति में नेतृत्व
स्थापित फाउंडेशन एम.एस. स्वामीनाथन रिसर्च फाउंडेशन (1988)
प्रमुख पुरस्कार पद्मश्री, पद्मभूषण, पद्मविभूषण
सहयोग नॉर्मन ई. बोरलॉग के साथ हरित क्रांति में
संसदीय भूमिका राज्यसभा सदस्य (2007–2013)
विरासत उद्धरण “If agriculture goes wrong, nothing else will have a chance to go right.”
The Man Who Fed India: Biography of M.S. Swaminathan
  1. भारत को खिलाने वाला व्यक्ति” (The Man Who Fed India) की जीवनी चेन्नई में जारी की गई।
  2. प्रियंबदा जयकुमार द्वारा लिखित, यह पुस्तक डॉ. एम.एस. स्वामीनाथन को श्रद्धांजलि है।
  3. डॉ. स्वामीनाथन को भारत में हरित क्रांति का जनक माना जाता है।
  4. उन्होंने 1960 के दशक में नॉर्मन . बोरलॉग के साथ सहयोग किया।
  5. हरित क्रांति (Green Revolution) 1965 में लाल बहादुर शास्त्री के नेतृत्व में शुरू हुई।
  6. इसने भारत में उच्च उपज देने वाली गेहूँ और चावल की किस्मों को पेश किया।
  7. इस क्रांति ने भारत को खाद्य उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाया।
  8. डॉ. स्वामीनाथन ने 1988 मेंS. Swaminathan Research Foundation (MSSRF) की स्थापना की।
  9. MSSRF का कार्यक्षेत्र सतत ग्रामीण विकास और जैव विविधता संरक्षण पर केंद्रित है।
  10. उन्हें पद्म श्री (1967), पद्म भूषण (1972) और पद्म विभूषण (1989) से सम्मानित किया गया।
  11. उन्होंने FAO और UNEP जैसे अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के साथ वैश्विक खाद्य नीतियों पर काम किया।
  12. राज्यसभा सदस्य (2007–2013) के रूप में कार्यरत रहे।
  13. उन्होंने किसान अधिकार विधेयक और खाद्य सुरक्षा कानून की वकालत की।
  14. यह पुस्तक उनके पारंपरिक और आधुनिक कृषि विज्ञान के संतुलित दृष्टिकोण को उजागर करती है।
  15. डॉ. स्वामीनाथन का निधन सितंबर 2023 में हुआ।
  16. उनका प्रसिद्ध दर्शन: “यदि कृषि गलत हो जाती है, तो कुछ भी सही नहीं होगा।
  17. उनके शोध ने भारत की खाद्य और पोषण सुरक्षा को सुनिश्चित किया।
  18. उन्होंने किसानों के कल्याण को भारत के विकास का केंद्र बनाया।
  19. यह जीवनी भारत के अपने कृषि दूरदर्शी के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक है।
  20. उनकी विरासत सतत और समावेशी ग्रामीण विकास को प्रेरित करती है।

Q1. ‘The Man Who Fed India’ जीवनी के लेखक कौन हैं?


Q2. डॉ. एम. एस. स्वामीनाथन को किस आंदोलन के जनक के रूप में जाना जाता है?


Q3. डॉ. स्वामीनाथन ने 1988 में कौन-सा अनुसंधान संस्थान स्थापित किया था?


Q4. हरित क्रांति के दौरान डॉ. स्वामीनाथन ने किसके साथ सहयोग किया था?


Q5. कृषि पर डॉ. स्वामीनाथन का प्रसिद्ध कथन क्या है?


Your Score: 0

Current Affairs PDF November 10

Descriptive CA PDF

One-Liner CA PDF

MCQ CA PDF​

CA PDF Tamil

Descriptive CA PDF Tamil

One-Liner CA PDF Tamil

MCQ CA PDF Tamil

CA PDF Hindi

Descriptive CA PDF Hindi

One-Liner CA PDF Hindi

MCQ CA PDF Hindi

News of the Day

Premium

National Tribal Health Conclave 2025: Advancing Inclusive Healthcare for Tribal India
New Client Special Offer

20% Off

Aenean leo ligulaconsequat vitae, eleifend acer neque sed ipsum. Nam quam nunc, blandit vel, tempus.