मार्च 19, 2026 8:01 अपराह्न

‘थालीकु थंगम’ योजना और कल्याणकारी नीतियों पर न्यायिक सीमाएँ

समसामयिक घटनाएँ: ‘थालीकु थंगम’ योजना, मद्रास उच्च न्यायालय, अनुच्छेद 226, मूवलुर राममिरथम अम्मायर विवाह सहायता योजना, न्यूनतम वेतन अधिनियम, कल्याणकारी योजनाएँ, तमिलनाडु की सामाजिक नीति, स्वर्ण सहायता, उच्च शिक्षा आश्वासन योजना

Thalikku Thangam Scheme and Judicial Limits on Welfare Policy

कल्याणकारी योजना की पृष्ठभूमि

थालीकु थंगमयोजना तमिलनाडु सरकार द्वारा शुरू की गई एक विवाह सहायता पहल थी, जिसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमज़ोर परिवारों की मदद करना था। इस योजना के तहत युवतियों के विवाह के लिए स्वर्ण सहायता (सोने के रूप में मदद) प्रदान की जाती थी, जिससे परिवारों को विवाह से जुड़े पारंपरिक खर्चों को पूरा करने में मदद मिलती थी।
यह योजना आधिकारिक तौर पर मूवलुर राममिरथम अम्मायर स्मारक विवाह सहायता योजना का ही एक हिस्सा थी, जिसे वर्ष 2011 में शुरू किया गया था। इस योजना का लक्ष्य ऐसे परिवार थे जिनकी मासिक आय ₹6,000 से कम थी; इसके तहत परिवारों को आर्थिक सहायता के साथ-साथ थाली‘ (मंगलसूत्र) बनवाने के लिए सोना भी दिया जाता था।
स्थैतिक सामान्य ज्ञान (Static GK) तथ्य: मूवलुर राममिरथम अम्मायर तमिलनाडु की एक जानी-मानी समाज सुधारक और स्वतंत्रता सेनानी थीं, जिन्होंने महिलाओं के अधिकारों और देवदासी प्रथाको समाप्त करने के लिए बड़े पैमाने पर काम किया था।

मद्रास उच्च न्यायालय का फैसला

न्यायिक क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण घटना तब घटी, जब मद्रास उच्च न्यायालय की खंडपीठ‘ (Division Bench) ने 12 अगस्त, 2024 को एक एकल न्यायाधीश‘ (Single Judge) द्वारा पारित पिछले आदेश को रद्द कर दिया। एकल न्यायाधीश ने अपने आदेश में यह निर्देश दिया था कि इस योजना का लाभ उन परिवारों तक भी बढ़ाया जाना चाहिए जिनकी मासिक आय ₹12,000 तक है।
हालाँकि, खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि इस तरह का विस्तार (आय सीमा में वृद्धि) उस रिट याचिका के दायरे से बाहर था। यह मामला मूल रूप से केवल इस बात को तय करने पर केंद्रित था कि क्या याचिकाकर्ता की मासिक आय ₹6,000 से कम थी—जो कि इस योजना के तहत पात्रता की निर्धारित सीमा थी।
न्यायालय ने यह टिप्पणी की कि आय सीमा का विस्तार करना, असल में सरकारी नीति में बदलाव करने जैसा है; और ऐसा बदलाव न्यायिक निर्देशों के माध्यम से नहीं किया जा सकता है।

न्यायिक हस्तक्षेप की सीमाएँ

खंडपीठ ने यह स्पष्ट किया कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 226′ के तहत इस तरह के निर्देश जारी करना उचित नहीं है। अनुच्छेद 226 उच्च न्यायालयों को यह शक्ति प्रदान करता है कि वे मौलिक अधिकारों और अन्य कानूनी अधिकारों को लागू करवाने के लिए रिट‘ (आदेश) जारी कर सकें।
न्यायाधीशों ने इस बात पर ज़ोर दिया कि न्यायालय, कार्यपालिका द्वारा बनाई गई नीति के स्थान पर अपनी कोई नई नीति लागू नहीं कर सकते हैं। कल्याणकारी योजनाओं का निर्माण सरकार की कार्यपालिकाशाखा द्वारा किया जाता है, और उनमें किसी भी प्रकार का संशोधन न्यायिक आदेशों के बजाय प्रशासनिक निर्णयों के माध्यम से ही किया जाना चाहिए।
कोर्ट ने उन दलीलों को भी खारिज कर दिया जो आय की पात्रता को न्यूनतम वेतन अधिनियम से जोड़ रही थीं, यह देखते हुए कि कोई भी कानूनी प्रावधान इस योजना के लिए ऐसे विस्तार को अनिवार्य नहीं बनाता है।
स्टेटिक GK टिप: अनुच्छेद 226 हाई कोर्ट्स को हैबियस कॉर्पस, मैंडमस, प्रोहिबिशन, सर्टिओरारी और क्वो वारंटो जैसी रिट जारी करने का अधिकार देता है।

योजना का पुनर्गठन

कोर्ट द्वारा उजागर किया गया एक और महत्वपूर्ण पहलू यह था कि स्वर्ण सहायता योजना को 2 अगस्त, 2022 से बंद कर दिया गया था। सरकार ने इसकी जगह मूवलुर राममिरथम अम्मायर उच्च शिक्षा आश्वासन योजना शुरू की।
इस पुनर्गठन ने ध्यान विवाह सहायता से हटाकर महिलाओं की शिक्षा पर केंद्रित कर दिया, जिसका उद्देश्य तमिलनाडु में लड़कियों के लिए उच्च शिक्षा के अवसरों को बढ़ावा देना था।
कोर्ट ने आगे कहा कि बंद हो चुकी योजना का विस्तार करने से राज्य पर भारी वित्तीय बोझ पड़ेगा, खासकर सोने की बढ़ती कीमतों के कारण। कल्याणकारी योजनाओं को सामाजिक उद्देश्यों और वित्तीय स्थिरता के बीच संतुलन बनाना चाहिए।

याचिकाकर्ता के लिए निहितार्थ

इस मामले में याचिकाकर्ता ने 2021 में इस योजना के लिए आवेदन किया था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसके आवेदन पर तभी विचार किया जा सकता है, जब उसके परिवार की आय ₹6,000 प्रति माह से कम हो, जैसा कि मूल नीति के तहत आवश्यक था।
चूंकि नीति स्वयं कानूनी चुनौती के दायरे में नहीं थी, इसलिए कोर्ट ने माना कि पात्रता मानदंडों को न्यायिक व्याख्या के माध्यम से संशोधित नहीं किया जा सकता है
यह फैसला शक्तियों के पृथक्करण के संवैधानिक सिद्धांत को उजागर करता है, जहां नीति निर्माण कार्यपालिका की जिम्मेदारी बनी रहती है, जबकि कोर्ट्स वैधता और संवैधानिक अनुपालन सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित करते हैं।

Static Usthadian Current Affairs Table

Topic Detail
योजना का नाम थालिक्कु थंगम योजना
मूल योजना मूवलूर रामामिर्थम अम्मैयार स्मारक विवाह सहायता योजना
प्रारंभ वर्ष 2011
पात्रता मानदंड प्रति माह ₹6,000 से कम आय वाले परिवार
प्रमुख लाभ युवतियों के विवाह के लिए सोने की सहायता
संबंधित न्यायालय मद्रास उच्च न्यायालय की डिवीजन बेंच
संवैधानिक प्रावधान भारतीय संविधान का अनुच्छेद 226
न्यायालय का अवलोकन न्यायपालिका कार्यपालिका की नीति का स्थानापन्न नहीं हो सकती
योजना की स्थिति 2 अगस्त 2022 से बंद
प्रतिस्थापन योजना मूवलूर रामामिर्थम अम्मैयार उच्च शिक्षा आश्वासन योजना
Thalikku Thangam Scheme and Judicial Limits on Welfare Policy
  1. थालिक्कु थंगमयोजना तमिलनाडु सरकार द्वारा शुरू की गई थी।
  2. इस योजना के तहत युवतियों के विवाह के लिए सोने के रूप में सहायता प्रदान की जाती थी।
  3. यह ‘मूवलुर राममिरथम अम्मायर विवाह सहायता योजना‘ का ही एक हिस्सा थी।
  4. यह कल्याणकारी कार्यक्रम वर्ष 2011 में शुरू किया गया था।
  5. इस योजना के लिए पात्रता मानदंड के अनुसार, परिवार की मासिक आय ₹6,000 से कम होनी चाहिए थी।
  6. इस सहायता से परिवारों को विवाह से जुड़े पारंपरिक खर्चों (जिसमें ‘थाली‘ के लिए सोना भी शामिल है) को पूरा करने में मदद मिलती थी।
  7. मूवलुर राममिरथम अम्मायर एक समाज सुधारक थीं, जिन्होंने महिलाओं के अधिकारों की वकालत की थी।
  8. मद्रास उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने इस योजना की पात्रता से जुड़े मुद्दे की समीक्षा की।
  9. खंडपीठ ने 12 अगस्त, 2024 को एक एकलन्यायाधीश द्वारा दिए गए आदेश को रद्द कर दिया।
  10. पिछले आदेश में पात्रता का दायरा बढ़ाकर उन परिवारों तक करने का प्रयास किया गया था, जिनकी मासिक आय ₹12,000 थी।
  11. न्यायालय ने यह निर्णय दिया कि इस प्रकार का विस्तार (दायरे में वृद्धि) रिट याचिका के मूल विषयक्षेत्र से बाहर था।
  12. यह मामला मूल रूप से याचिकाकर्ता की आयसंबंधी पात्रता के सत्यापन से जुड़ा हुआ था।
  13. न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि न्यायपालिका, कार्यपालिका द्वारा बनाई गई कल्याणकारी नीतियों में संशोधन नहीं कर सकती है।
  14. इस निर्णय में संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत प्राप्त शक्तियों का संदर्भ दिया गया था।
  15. अनुच्छेद 226 उच्च न्यायालयों को कानूनी अधिकारों की रक्षा हेतु ‘रिट‘ (आदेश) जारी करने का अधिकार प्रदान करता है।
  16. न्यायालय ने उन तर्कों को अस्वीकार कर दिया, जिनमें इस योजना को ‘न्यूनतम मजदूरी अधिनियम‘ के प्रावधानों से जोड़ने का प्रयास किया गया था।
  17. सोने की सहायता प्रदान करने वाले इस कार्यक्रम को 2 अगस्त, 2022 को बंद कर दिया गया था।
  18. इसके स्थान पर ‘मूवलुर राममिरथम अम्मायर उच्च शिक्षा आश्वासन योजनाशुरू की गई।
  19. नीति में किए गए इस बदलाव का उद्देश्य बालिकाओं के लिए उच्च शिक्षा के अधिक अवसर उपलब्ध कराना है।
  20. यह निर्णय शासनप्रशासन में ‘शक्तियों के पृथक्करण‘ के संवैधानिक सिद्धांत को परिलक्षित करता है।

Q1. थालिक्कु थंगम योजना तमिलनाडु सरकार के किस कार्यक्रम का हिस्सा थी?


Q2. किस न्यायालय ने ₹12,000 मासिक आय वाले परिवारों तक योजना का विस्तार करने वाले पहले आदेश को रद्द किया?


Q3. मूल योजना के तहत परिवारों की पात्रता के लिए मासिक आय सीमा कितनी थी?


Q4. कौन-सा संवैधानिक प्रावधान उच्च न्यायालयों को रिट जारी करने की शक्ति देता है?


Q5. थालिक्कु थंगम योजना को 2022 में किस योजना द्वारा प्रतिस्थापित किया गया, जो महिलाओं की शिक्षा को बढ़ावा देती है?


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