जलवायु प्रशासन ढांचा
तमिलनाडु ने Tamil Nadu Green Climate Company (TNGCC) के माध्यम से एक संगठित जलवायु शासन प्रणाली विकसित की है। यह संस्था जलवायु परिवर्तन, हरित आवरण विस्तार, आर्द्रभूमि संरक्षण और तटीय पारितंत्र पुनर्स्थापन से संबंधित सभी प्रमुख मिशनों का समन्वय करती है। यह विभिन्न विभागों के बीच योजना तथा निगरानी को एकीकृत करने वाला केंद्रीय मंच है।
Static GK fact: तमिलनाडु भारत का पहला राज्य है जिसने तीन विशिष्ट मिशनों के साथ एक समर्पित जलवायु कंपनी स्थापित की।
कार्यक्रम और मिशन
TNGCC चार प्रमुख कार्यक्रमों का संचालन करती है—जलवायु परिवर्तन मिशन, आर्द्रभूमि पुनर्जीवन, हरित आवरण विस्तार, और तटीय क्षेत्र पुनर्स्थापन। यह मिशन संरचना राज्य को दीर्घकालिक सतत विकास लक्ष्यों को जिला-स्तरीय जलवायु जोखिमों के साथ जोड़ने में सहायता करती है।
उत्सर्जन रुझान और GHG डेटा
तमिलनाडु ने 2019 के लिए अपना ग्रीनहाउस गैस (GHG) इन्वेंटरी जारी किया। राज्य ने भारत के कुल उत्सर्जन में लगभग 7% योगदान दिया, जो उसकी औद्योगिक और ऊर्जा-केंद्रित प्रोफ़ाइल को दर्शाता है। डेटा-आधारित यह दृष्टिकोण लक्षित डीकार्बोनाइज़ेशन प्रयासों में मदद करता है।
Static GK Tip: भारत का पहला आधिकारिक GHG इन्वेंटरी 2010 में राष्ट्रीय रिपोर्टिंग के लिए प्रकाशित किया गया था।
उत्सर्जन तीव्रता में कमी
राज्य ने 2005 से 2019 के बीच GDP प्रति इकाई उत्सर्जन तीव्रता में लगभग 60% कमी दर्ज की। यह उपलब्धि तमिलनाडु को भारत की अग्रणी निम्न-उत्सर्जन अर्थव्यवस्थाओं में स्थान देती है। यह सुधार नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार, स्वच्छ प्रौद्योगिकी अपनाने और अधिक कुशल औद्योगिक प्रक्रियाओं के कारण संभव हुआ।
नवीकरणीय ऊर्जा में नेतृत्व
तमिलनाडु, स्थापित बिजली क्षमता में लगभग 60% गैर-जीवाश्म स्रोतों से प्राप्त होने के कारण, भारत का अग्रणी नवीकरणीय ऊर्जा राज्य है। राज्य अपनी कुल बिजली का लगभग 30% पवन, सौर और जल स्रोतों से उत्पन्न करता है। इससे कोयला-आधारित बिजली पर निर्भरता कम होती है।
Static GK fact: तमिलनाडु भारत की सबसे बड़ी पवन ऊर्जा क्षमता वाला राज्य है।
आर्द्रभूमि और रामसर संरक्षण
राज्य में अब 20 रामसर-घोषित आर्द्रभूमियाँ हैं, जो भारत के रामसर नेटवर्क में सबसे बड़े योगदानों में से एक है। ये आर्द्रभूमियाँ जैव विविधता, जल पुनर्भरण और जलवायु अनुकूलन का समर्थन करती हैं। सरकार ने कुल भूमि क्षेत्रफल के 30% हिस्से को संरक्षित घोषित किया है, जिससे पारिस्थितिक लचीलापन बढ़ा है।
जिला-स्तरीय जलवायु एकीकरण
तमिलनाडु अपने सभी 38 जिलों में जलवायु शासन को एकीकृत कर रहा है। यह जिला-स्तरीय ढांचा स्थानीय निकायों को बाढ़, सूखा, तटीय कटाव और गर्मी की लहरों जैसी जोखिमों के अनुरूप कार्य योजनाएँ तैयार करने में सक्षम बनाता है।
तटीय और हरित आवरण पहल
तटीय क्षेत्रों में बड़े पुनर्स्थापन कार्यक्रम समुद्री तूफानों और चरम मौसम से तटीय समुदायों की सुरक्षा करते हैं। साथ ही, हरित आवरण बढ़ाने वाले कार्यक्रम कार्बन अवशोषण तथा शहरी जलवायु लचीलापन को बढ़ावा देते हैं। ये प्रयास दीर्घकालिक सततता को मजबूत करते हैं।
स्टैटिक उस्तादियन करंट अफेयर्स टेबल
| विषय | विवरण |
| जलवायु कंपनी | Tamil Nadu Green Climate Company जलवायु मिशनों का समन्वय करती है |
| कार्यक्रमों की संख्या | जलवायु, आर्द्रभूमि, हरित आवरण और तटीय पुनर्स्थापन — कुल चार |
| उत्सर्जन योगदान | 2019 में भारत के कुल उत्सर्जन का लगभग 7% |
| उत्सर्जन तीव्रता | 2005 से 2019 के बीच लगभग 60% कमी |
| नवीकरणीय ऊर्जा हिस्सा | कुल स्थापित क्षमता का लगभग 60% |
| बिजली उत्पादन | लगभग 30% नवीकरणीय स्रोतों से |
| रामसर स्थल | कुल 20 आर्द्रभूमियाँ |
| संरक्षित भूमि | कुल भूमि क्षेत्र का 30% हिस्सा |
| जिला कवरेज | सभी 38 जिलों में जलवायु शासन का एकीकरण |
| प्रमुख फोकस क्षेत्र | न्यूनीकरण, अनुकूलन, जैव विविधता और लचीलापन |





