विधेयक की पृष्ठभूमि
तमिलनाडु विधान सभा ने 24 जनवरी 2026 को तमिलनाडु जल संसाधन (विनियमन, प्रबंधन और संवर्धन) विधेयक, 2026 पारित किया। यह कानून जनसंख्या वृद्धि, शहरीकरण और जलवायु परिवर्तनशीलता के कारण सतही जल और भूजल पर बढ़ते दबाव का समाधान करता है।
तमिलनाडु भारत के सबसे अधिक जल संकट वाले राज्यों में से एक है, जिसका कारण असमान वर्षा वितरण और मानसून पर निर्भर स्रोतों पर अत्यधिक निर्भरता है। इस विधेयक का उद्देश्य राज्य भर में सभी श्रेणियों के जल संसाधनों को विनियमित और प्रबंधित करने के लिए एक समान कानूनी ढांचा तैयार करना है।
स्टेटिक जीके तथ्य: तमिलनाडु को अपनी वार्षिक वर्षा का लगभग 48% उत्तर-पूर्वी मानसून से प्राप्त होता है, जो अधिकांश भारतीय राज्यों से अलग है जो दक्षिण-पश्चिमी मानसून पर निर्भर हैं।
TNWRMA की स्थापना
यह विधेयक तमिलनाडु जल संसाधन प्रबंधन प्राधिकरण (TNWRMA) के गठन का प्रावधान करता है। यह प्राधिकरण तमिलनाडु में जल शासन के लिए सर्वोच्च निकाय के रूप में कार्य करेगा।
मुख्य सचिव अध्यक्ष के रूप में कार्य करेंगे, जबकि जल संसाधन सचिव सदस्य सचिव के रूप में कार्य करेंगे। यह संरचना राज्य सरकार के उच्चतम स्तर पर प्रशासनिक समन्वय सुनिश्चित करती है।
इस प्राधिकरण में सिंचाई, पेयजल, कृषि और शहरी विकास से संबंधित कई विभागों के प्रतिनिधि होंगे।
उद्देश्य और दायरा
विधेयक का प्राथमिक उद्देश्य तमिलनाडु में सभी जल संसाधनों को विनियमित, प्रबंधित और संवर्धित करना है। इसमें सतही जल, भूजल, जलाशय, टैंक, नदियाँ, नहरें और पुन: उपयोग किया गया या उपचारित जल शामिल है।
यह विधेयक एकीकृत जल संसाधन प्रबंधन दृष्टिकोण अपनाता है। यह जल को एक सीमित सार्वजनिक संसाधन के रूप में मान्यता देता है जिसे संरक्षित, समान रूप से वितरित और स्थायी रूप से उपयोग किया जाना चाहिए।
स्टेटिक जीके टिप: एकीकृत जल संसाधन प्रबंधन (IWRM) एक विश्व स्तर पर स्वीकृत सिद्धांत है जिसे संयुक्त राष्ट्र द्वारा स्थायी जल शासन के लिए बढ़ावा दिया जाता है।
राज्य जल नीति और योजना
TNWRMA को राज्य जल नीति तैयार करने का अधिकार है। यह नीति दीर्घकालिक योजना, जल उपयोग की प्राथमिकता और सभी क्षेत्रों में संरक्षण रणनीतियों का मार्गदर्शन करेगी।
इसके अलावा, प्राधिकरण राज्य जल संसाधन प्रबंधन योजना तैयार करेगा। यह योजना तमिलनाडु के भीतर जल उपलब्धता, मांग अनुमान और क्षेत्रीय असंतुलन का आकलन करेगी। प्लानिंग फ्रेमवर्क में सूखे और बाढ़ से निपटने के लिए क्लाइमेट एडैप्टेशन के उपाय भी शामिल होंगे।
पानी के इस्तेमाल का रेगुलेशन
बिल का एक महत्वपूर्ण प्रावधान कमर्शियल पानी के इस्तेमाल के लिए टैरिफ तय करने की अथॉरिटी की शक्ति है। इंडस्ट्रीज़, बड़े पानी के कंज्यूमर्स और कमर्शियल संस्थानों से इस्तेमाल और उपलब्धता के आधार पर चार्ज लिया जा सकता है।
यह बिल TNWRMA को बिना इजाज़त पानी निकालने, खासकर ग्राउंडवॉटर सोर्स से, पर जुर्माना लगाने का भी अधिकार देता है। इसका मकसद अवैध बोरवेल और ज़्यादा पानी निकालने पर रोक लगाना है।
स्टैटिक GK फैक्ट: तमिलनाडु में 41,000 से ज़्यादा सिंचाई टैंक हैं, जो भारत में सबसे पुरानी पारंपरिक जल प्रबंधन प्रणालियों में से एक हैं।
जल सुरक्षा के लिए महत्व
यह बिल तमिलनाडु में जल शासन के लिए संस्थागत तंत्र को मज़बूत करता है। एक ही अथॉरिटी के तहत रेगुलेशन को केंद्रीकृत करके, पॉलिसी में बिखराव कम होता है।
यह टैरिफ सिस्टम और जुर्माने लागू करके जवाबदेही को भी बढ़ावा देता है। यह पीने के पानी और कृषि प्राथमिकताओं की रक्षा करते हुए पानी के इस्तेमाल को सस्टेनेबिलिटी लक्ष्यों के साथ जोड़ता है।
Static Usthadian Current Affairs Table
| विषय | विवरण |
| विधेयक का नाम | तमिलनाडु जल संसाधन (विनियमन, प्रबंधन एवं संवर्धन) विधेयक, 2026 |
| पारित होने की तिथि | 24 जनवरी 2026 |
| शीर्ष प्राधिकरण | तमिलनाडु जल संसाधन प्रबंधन प्राधिकरण |
| अध्यक्ष | तमिलनाडु के मुख्य सचिव |
| सदस्य सचिव | जल संसाधन सचिव |
| प्रमुख कार्य | सभी जल संसाधनों का विनियमन और संवर्धन |
| नीति भूमिका | राज्य जल नीति का निर्माण |
| योजना भूमिका | राज्य जल संसाधन प्रबंधन योजना |
| नियामक शक्ति | वाणिज्यिक जल उपयोग के लिए शुल्क निर्धारण |
| प्रवर्तन शक्ति | अनधिकृत जल दोहन पर दंड |





