पॉलिसी विजन और बैकग्राउंड
Tamil Nadu सरकार ने ग्रीन तमिलनाडु मिशन के तहत तमिलनाडु अर्बन ग्रीनिंग पॉलिसी 2026 पेश की है। इसका उद्देश्य शहरों को क्लाइमेट–रेसिलिएंट, सस्टेनेबल और रहने योग्य शहरी क्षेत्र में बदलना है।
तेज़ अर्बनाइजेशन के कारण शहरों में ट्री कवर और प्राकृतिक इकोसिस्टम घटे हैं। यह पॉलिसी शहरी प्लानिंग और गवर्नेंस में हरित तत्वों को व्यवस्थित रूप से शामिल करके इकोलॉजिकल गिरावट को सुधारने का प्रयास करती है।
स्टैटिक GK फैक्ट: तमिलनाडु का गठन 1956 में हुआ था और इसकी राजधानी चेन्नई है, जो भारत के प्रमुख महानगरों में से एक है।
शहरी इलाकों के लिए ग्रीन कवर लक्ष्य
पॉलिसी के अनुसार, अर्बन लोकल बॉडीज़ (ULBs) को यह सुनिश्चित करना होगा कि कुल शहरी क्षेत्र का कम से कम 15% हिस्सा ग्रीन कवर में रहे। इसमें पार्क, सड़क किनारे वृक्षारोपण, शहरी वन और पुनर्स्थापित वेटलैंड्स शामिल हैं।
यह पहल राज्य के दीर्घकालिक लक्ष्य—33% कुल वन और वृक्ष कवर—से जुड़ी है। यह लक्ष्य राष्ट्रीय वन नीति के अनुरूप है।
स्टैटिक GK टिप: National Forest Policy 1988 के अनुसार भारत का लक्ष्य देशभर में 33% वन कवर हासिल करना है।
ब्लू–ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर का एकीकरण
पॉलिसी ब्लू–ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर के सिद्धांत पर आधारित है, जिसमें जल स्रोतों और हरित क्षेत्रों को एकीकृत कर पारिस्थितिक संतुलन बढ़ाया जाता है।
शहरी वेटलैंड, झीलें, वर्षा जल निकासी चैनल और वृक्ष कॉरिडोर को मास्टर प्लान में शामिल किया जाएगा। इससे बाढ़ नियंत्रण, भूजल रिचार्ज, तापमान में कमी और जैव विविधता संरक्षण में मदद मिलेगी।
चेन्नई में 2015 और 2023 की शहरी बाढ़ ने इकोसिस्टम-आधारित प्लानिंग की आवश्यकता को रेखांकित किया है।
शहरी लोकल बॉडीज़ की भूमिका
इस पॉलिसी के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी मुख्य रूप से म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन, नगर पालिकाएँ और टाउन पंचायतें निभाएँगी। इन्हें लोकल ग्रीनिंग प्लान तैयार करने और वृक्षारोपण गतिविधियों की निगरानी करनी होगी।
कम्युनिटी भागीदारी और पब्लिक–प्राइवेट पार्टनरशिप को भी बढ़ावा दिया जाएगा। पेड़ों की गिनती, GIS मैपिंग और वैज्ञानिक मॉनिटरिंग से पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी।
स्टैटिक GK फैक्ट: तमिलनाडु में 38 जिले हैं और यह भारत के अधिक शहरीकृत राज्यों में से एक है।
क्लाइमेट चेंज और अर्बन हीट आइलैंड प्रभाव
शहरों में अर्बन हीट आइलैंड इफेक्ट के कारण तापमान अधिक रहता है। वृक्षों की संख्या बढ़ने से सतह का तापमान कम होता है और वायु गुणवत्ता सुधरती है।
शहरी वन कार्बन सिंक का कार्य करते हैं और शहरों के भीतर जैव विविधता को समर्थन देते हैं। यह पॉलिसी शहरी ग्रीनिंग को सीधे क्लाइमेट चेंज अडैप्टेशन और मिटिगेशन रणनीतियों से जोड़ती है।
तमिलनाडु पहले से ही नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन में अग्रणी राज्यों में शामिल है। शहरी सस्टेनेबिलिटी इस पर्यावरणीय नेतृत्व को और मजबूत करती है।
सस्टेनेबल अर्बन प्लानिंग की ओर
यह पॉलिसी पारंपरिक इंफ्रास्ट्रक्चर-केंद्रित विकास से हटकर नेचर–बेस्ड अर्बन प्लानिंग की ओर बदलाव का संकेत देती है।
इकोलॉजिकल सिद्धांतों को शहरी शासन में शामिल कर तमिलनाडु स्वस्थ, संतुलित और अधिक लचीले शहर बनाने का लक्ष्य रखता है।
इस पॉलिसी की सफलता वैज्ञानिक योजना, निरंतर फंडिंग और सामुदायिक स्वामित्व पर निर्भर करेगी।
स्टैटिक उस्तादियन करंट अफेयर्स तालिका
| विषय | विवरण |
| नीति का नाम | तमिलनाडु शहरी हरितीकरण नीति 2026 |
| कार्यान्वयन ढांचा | ग्रीन तमिलनाडु मिशन |
| शहरी हरित आवरण लक्ष्य | शहरी क्षेत्रों में न्यूनतम 15 प्रतिशत |
| राज्य वन आवरण लक्ष्य | 33 प्रतिशत वन एवं वृक्ष आवरण |
| प्रमुख अवधारणा | नीला-हरित अवसंरचना एकीकरण |
| कार्यान्वयन प्राधिकरण | शहरी स्थानीय निकाय |
| पर्यावरणीय फोकस | जलवायु सहनशीलता तथा ऊष्मा न्यूनीकरण |
| राष्ट्रीय संदर्भ | राष्ट्रीय वन नीति 1988 का लक्ष्य |





