न्यायिक निगरानी में बदलाव
सुप्रीम कोर्ट ने प्रदूषित नदियों पर 2021 में शुरू की गई अपनी स्वतः संज्ञान (suo motu) कार्रवाई बंद कर दी है और निगरानी की मुख्य ज़िम्मेदारी नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) को सौंप दी है। अदालत ने कहा कि पाँच वर्षों की सीमित प्रगति के बाद पर्यावरण न्याय की निगरानी को अब संस्थागत ढांचे में लाया जाना चाहिए।
कोर्ट ने दोहराया कि इंसानी गरिमा और स्वच्छ पर्यावरण में रहने का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 का हिस्सा है। यह व्याख्या पर्यावरण संरक्षण को एक मौलिक अधिकार के रूप में और मजबूत करती है।
स्टैटिक GK फैक्ट: NGT की स्थापना 2010 में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल एक्ट के तहत पर्यावरण मामलों के तेज़ और प्रभावी निपटारे के लिए की गई थी।
भारत में नदी प्रदूषण की स्थिति
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की 2025 रिपोर्ट के अनुसार, 645 नदियों में से 271 नदियों में 296 प्रदूषित नदी हिस्सों (PRS) की पहचान की गई है। ये हिस्से 32 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में फैले हुए हैं।
किसी नदी हिस्से को प्रदूषित तब माना जाता है जब बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (BOD) 3 mg/L से अधिक हो। BOD पानी में मौजूद ऑर्गेनिक पदार्थों को तोड़ने के लिए आवश्यक ऑक्सीजन की मात्रा को मापता है और यह जल गुणवत्ता का महत्वपूर्ण संकेतक है।
महाराष्ट्र में सबसे अधिक 54 प्रदूषित हिस्से दर्ज किए गए। प्रभावित नदियों में यमुना, साबरमती, चंबल, तुंगभद्रा और तमिलनाडु की सरबंगा शामिल हैं।
स्टैटिक GK टिप: CPCB की स्थापना 1974 में वॉटर (प्रिवेंशन एंड कंट्रोल ऑफ पॉल्यूशन) एक्ट के तहत की गई थी।
प्रदूषण के मुख्य स्रोत
बिना ट्रीट किया हुआ सीवेज सबसे बड़ा कारण है। CPCB के अनुसार, रोज़ाना 60% से अधिक अनुपचारित सीवेज नदियों में बहाया जाता है, जिससे ऑर्गेनिक लोड बढ़ता है और घुलित ऑक्सीजन घटती है।
इंडस्ट्रियल कचरा, विशेषकर केमिकल, चीनी, कागज़ और टेनरी यूनिट से निकलने वाला अपशिष्ट भी नदी प्रदूषण में बड़ा योगदान देता है।
अन्य कारणों में म्युनिसिपल सॉलिड वेस्ट डंपिंग, कृषि अपवाह (फर्टिलाइज़र और पेस्टीसाइड), अवैध रेत खनन और नदी तटों पर अतिक्रमण शामिल हैं।
सरकारी प्रयास और टेक्नोलॉजी
2014 में शुरू किया गया नमामि गंगे कार्यक्रम गंगा बेसिन में सीवेज ट्रीटमेंट, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट और बायोडायवर्सिटी संरक्षण पर केंद्रित है।
1993 में शुरू हुआ यमुना एक्शन प्लान यमुना नदी में प्रदूषण कम करने के लिए बनाया गया था। नेशनल रिवर कंज़र्वेशन प्लान (NRCP) गंगा बेसिन के बाहर की नदियों पर ध्यान देता है।
तकनीकी हस्तक्षेप भी बढ़ रहे हैं। LiDAR मैपिंग और ड्रोन सर्वे के माध्यम से बिना ट्रीट किए गए नालों की पहचान संभव हो रही है, जिससे रियल-टाइम मॉनिटरिंग और लक्षित प्रवर्तन मजबूत होता है।
स्टैटिक GK फैक्ट: गंगा भारत की सबसे लंबी नदी है, जबकि गोदावरी को “दक्षिण गंगा” कहा जाता है।
संरचित पर्यावरण शासन की ओर
सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय अस्थायी न्यायिक हस्तक्षेप से हटकर संस्थागत और संरचित पर्यावरण शासन की दिशा में बदलाव को दर्शाता है। अब NGT की प्रभावी निगरानी और प्रवर्तन पर भारत में नदी पुनर्जीवन की सफलता निर्भर करेगी।
Static Usthadian Current Affairs Table
| विषय | विवरण |
| न्यायिक विकास | 2026 में सर्वोच्च न्यायालय ने नदी प्रदूषण निगरानी की ज़िम्मेदारी राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) को सौंपी |
| संवैधानिक आधार | स्वच्छ पर्यावरण को अनुच्छेद 21 (जीवन के अधिकार) से जोड़ा गया |
| सीपीसीबी 2025 आँकड़े | 271 नदियों में 296 प्रदूषित खंड |
| प्रदूषित नदी खंड (PRS) मानदंड | बीओडी स्तर 3 मि.ग्रा./लीटर से अधिक |
| सर्वाधिक प्रभावित राज्य | महाराष्ट्र (54 प्रदूषित खंड) |
| प्रमुख योजना 1 | नमामि गंगे कार्यक्रम (2014) |
| प्रमुख योजना 2 | यमुना कार्य योजना (1993) |
| निगरानी प्रौद्योगिकी | लाइडार और ड्रोन आधारित जलनिकासी मानचित्रण |





