खबरों में व्यक्तित्व
शहीद उधम सिंह की 126वीं जयंती 26 दिसंबर 2025 को मनाई गई, जिसमें भारत के सबसे दृढ़ क्रांतिकारी स्वतंत्रता सेनानियों में से एक के जीवन को याद किया गया। उनकी विरासत उपनिवेशवाद विरोधी प्रतिरोध और क्रांतिकारी राष्ट्रवाद पर चर्चाओं के केंद्र में बनी हुई है।
उधम सिंह को न केवल उनके बदले की कार्रवाई के लिए याद किया जाता है, बल्कि उन मूल्यों के लिए भी याद किया जाता है जिनका उन्होंने प्रतीक थे, जिसमें देशभक्ति, साहस और धर्मनिरपेक्ष एकता शामिल है। उनका जीवन ब्रिटिश शासन के दौरान क्रांतिकारी आंदोलनों की तीव्रता को दर्शाता है।
प्रारंभिक जीवन और पृष्ठभूमि
शहीद उधम सिंह का जन्म 1899 में पंजाब के संगरूर जिले में हुआ था, जो उस समय अविभाजित भारत का हिस्सा था। कम उम्र में अनाथ होने के कारण, उन्होंने अपने शुरुआती साल अनाथालयों में बिताए, जिसने उनके लचीलेपन और स्वतंत्र भावना को आकार दिया।
स्टेटिक जीके तथ्य: कठोर औपनिवेशिक नीतियों और कृषि संकट के कारण 20वीं सदी की शुरुआत में पंजाब क्रांतिकारी गतिविधि का एक प्रमुख केंद्र बनकर उभरा।
औपनिवेशिक दमन के तहत बड़े होने के कारण, उधम सिंह राष्ट्रवादी विचारों से गहराई से प्रभावित थे। ब्रिटिश शासन की क्रूर वास्तविकताओं ने उनकी राजनीतिक चेतना पर एक स्थायी छाप छोड़ी।
जलियांवाला बाग और क्रांतिकारी संकल्प
1919 का जलियांवाला बाग हत्याकांड उधम सिंह के जीवन में एक महत्वपूर्ण मोड़ था। अमृतसर में सैकड़ों निहत्थे नागरिकों की हत्या ने उन्हें बहुत प्रभावित किया।
इस घटना ने उनके गुस्से को औपनिवेशिक अन्याय के खिलाफ जीवन भर के मिशन में बदल दिया। उन्होंने उस समय के पंजाब के लेफ्टिनेंट गवर्नर माइकल ओ’डायर को इस हत्याकांड के लिए नैतिक रूप से जिम्मेदार ठहराया।
स्टेटिक जीके टिप: जलियांवाला बाग हत्याकांड 13 अप्रैल 1919 को रॉलेट एक्ट लागू होने के दौरान हुआ था।
उधम सिंह ने फैसला किया कि औपनिवेशिक अदालतों द्वारा नकारे गए न्याय को क्रांतिकारी कार्रवाई के माध्यम से प्राप्त किया जाना चाहिए।
माइकल ओ’डायर की हत्या
1940 में, उधम सिंह ने लंदन में माइकल ओ’डायर की हत्या कर दी, एक ऐसा कार्य जिसने भारत के स्वतंत्रता संग्राम पर वैश्विक ध्यान आकर्षित किया। इस कार्य का उद्देश्य प्रतीकात्मक रूप से जलियांवाला बाग त्रासदी का बदला लेना था।
हत्या के तुरंत बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और ब्रिटेन में उन पर मुकदमा चलाया गया। ऊधम सिंह ने बिना दया की भीख मांगे जिम्मेदारी स्वीकार कर ली।
उनकी फांसी ने उन्हें शहीद बना दिया और भारतीय राष्ट्रवादी आंदोलन के अंदर क्रांतिकारी विचारों को मजबूत किया।
विचारधारा और संगठनात्मक संबंध
ऊधम सिंह ने ‘राम मोहम्मद सिंह आज़ाद’ नाम अपनाया, जो हिंदू, मुस्लिम और सिख पहचानों के बीच एकता को दर्शाता है। यह नाम धर्मनिरपेक्षता और समावेशी राष्ट्रवाद के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का प्रतीक था।
वह ग़दर पार्टी और हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (HSRA) से जुड़े थे। ये संगठन औपनिवेशिक शासन के खिलाफ सशस्त्र प्रतिरोध की वकालत करते थे।
स्टेटिक जीके तथ्य: HSRA का लक्ष्य क्रांतिकारी तरीकों से एक समाजवादी गणराज्य स्थापित करना था।
ऊधम सिंह का मानना था कि आज़ादी के लिए संवैधानिक तरीकों से परे बलिदान की आवश्यकता होती है।
मूल्य और राष्ट्रीय महत्व
शहीद ऊधम सिंह वीरता, बलिदान और राष्ट्रीय एकता के प्रतीक हैं। उनका जीवन भारत के स्वतंत्रता संग्राम के भावनात्मक और नैतिक आयामों को दर्शाता है।
उनकी विरासत न्याय, प्रतिरोध और औपनिवेशिक उत्पीड़न की कीमत पर चर्चा को प्रेरित करती रहती है।
Static Usthadian Current Affairs Table
| विषय | विवरण |
| जन्म | 1899, संगरूर ज़िला, पंजाब |
| प्रमुख घटना | जलियांवाला बाग़ हत्याकांड, 1919 |
| प्रतिशोध की कार्रवाई | 1940 में माइकल ओ’ड्वायर की हत्या |
| अपनाया गया नाम | राम मोहम्मद सिंह आज़ाद |
| संगठन | ग़दर पार्टी, HSRA |
| मूल मूल्य | देशभक्ति, धर्मनिरपेक्षता, साहस |
| स्मरण | शहीद उधम सिंह की 126वीं जयंती — 26 दिसंबर 2025 |





