दूर-दराज के इलाकों में आउटरीच
ऑप दृष्टि प्रोग्राम इंडियन आर्मी ने 18-22 नवंबर 2025 तक उधमपुर (J&K) में नॉर्दर्न कमांड के कमांड हॉस्पिटल में चलाया था। 2,000 से ज़्यादा लोगों की स्क्रीनिंग की गई और मोतियाबिंद, ग्लूकोमा और रेटिना डिसऑर्डर जैसी बीमारियों के लिए 400 से ज़्यादा एडवांस्ड आई सर्जरी की गईं।
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पुंछ, डोडा, किश्तवाड़ और राजौरी जैसे दूर-दराज के जिलों के लोगों को, जहाँ स्पेशलिस्ट आँखों की सेवाएँ कम हैं, कैंप से सीधे फ़ायदा हुआ। ऐसे आउटरीच में आर्मी की मौजूदगी बताती है कि कैसे नॉन-कॉम्बैट काम देश की भलाई में मदद करते हैं।
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मेडिकल हाई-परफॉर्मेंस टीम
नई दिल्ली में आर्मी हॉस्पिटल (रिसर्च एंड रेफरल) की एक स्पेशल टीम, जिसका नेतृत्व ब्रिगेडियर एसके मिश्रा (हेड-ऑप्थैल्मोलॉजी) कर रहे थे, ने नॉर्दर्न कमांड के मेडिकल स्टाफ के साथ मिलकर काम किया। टीम ने फील्ड-कैंप सेटिंग में भी हाई-प्रिसिजन सर्जरी करने के लिए वर्ल्ड-क्लास इक्विपमेंट का इस्तेमाल किया।
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लाभार्थियों में पुंछ के एक 72 साल के बुज़ुर्ग भी थे, जिन्हें सालों तक अंधे रहने के बाद नज़र वापस मिली और उन्होंने इलाज के लिए गांव के दूसरे लोगों को इकट्ठा किया। एक 96 साल की महिला की भी सर्जरी हुई, जिससे पता चलता है कि इस आउटरीच में उम्र के लोगों को भी शामिल किया गया है। ये उदाहरण दिखाते हैं कि नज़र वापस पाना कैसे सामाजिक सम्मान और कम्युनिटी से जुड़ाव में बदलता है।
दवा से परे स्ट्रेटेजिक वैल्यू
क्लिनिकल केयर से परे, ऑपरेशन दृष्टि ने एक सेंसिटिव बॉर्डर इलाके में सिविल-मिलिट्री रिश्तों को मज़बूत किया। J&K के लेफ्टिनेंट-गवर्नर मनोज सिन्हा, केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह और आर्मी चीफ की भागीदारी ने ऐसे मिशनों की हाई-लेवल पहचान को दिखाया।
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लंबे समय के फायदे
यह कैंप मुश्किल इलाकों में भविष्य के मेडिकल आउटरीच के लिए एक मॉडल के तौर पर काम करता है। यह लोकल इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाता है, स्पेशलिस्ट सर्विसेज़ को दूर-दराज के इलाकों की आबादी से जोड़ता है और दिखाता है कि डिफेंस रिसोर्स कैसे पब्लिक हेल्थ के लिए काम आ सकते हैं।
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Static Usthadian Current Affairs Table
| Topic | Detail |
| अभियान का नाम | ऑप दृष्टि |
| अवधि | 18–22 नवम्बर 2025 |
| स्थान | कमांड अस्पताल, नॉर्दर्न कमांड, उधमपुर (जम्मू-कश्मीर) |
| जाँच किए गए व्यक्ति | 2,000 से अधिक |
| किए गए ऑपरेशन | 400 से अधिक |
| मुख्य सर्जन | ब्रिगेडियर एस. के. मिश्रा |
| उपचारित प्रमुख अवस्थाएँ | मोतियाबिंद, ग्लूकोमा, रेटिना विकार |
| मुख्य लाभार्थी समूह | सामान्य नागरिक, पूर्व सैनिक, वीर नारियाँ |





