उपकरण का परिचय
स्किंटिलोमीटर एक प्रकाश आधारित वैज्ञानिक यंत्र है, जिसका उपयोग भूमि सतह और वायुमंडल के बीच ऊष्मा और नमी के आदान–प्रदान को मापने के लिए किया जाता है। यह दो निश्चित बिंदुओं के बीच प्रकाश किरण भेजकर काम करता है। वायुमंडलीय अशांति से उत्पन्न होने वाले उतार–चढ़ाव (स्किंटिलेशन) का विश्लेषण करके यह ‘संवेदी ऊष्मा प्रवाह’ का प्रत्यक्ष अनुमान देता है।
स्थिर सामान्य ज्ञान तथ्य: स्किंटिलेशन का अर्थ है वायु अशांति के कारण प्रकाश की तीव्रता में तेज़ उतार–चढ़ाव।
टीआरआरआई में स्थापना
यह उपकरण कावेरी क्षेत्र के प्रमुख धान अनुसंधान केंद्र, तमिलनाडु राइस रिसर्च इंस्टीट्यूट (टीआरआरआई), अदुथुरै में स्थापित किया गया है। टीआरआरआई, तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय (टीएनएयू) के अधीन कार्य करता है और धान–आधारित प्रणालियों पर केंद्रित अनुसंधान का एक प्रमुख केंद्र है।
स्थिर सामान्य ज्ञान तथ्य: टीआरआरआई की स्थापना 1912 में हुई थी और बाद में इसे समर्पित धान अनुसंधान के लिए टीएनएयू के अंतर्गत लाया गया।
एक महत्त्वपूर्ण वैज्ञानिक परियोजना का हिस्सा
यह स्थापना क्रिटिकल ज़ोन ऑब्ज़र्वेटरी (सीज़ेडओ) का हिस्सा है, जिसे टीएनएयू ने राष्ट्रीय पृथ्वी विज्ञान अध्ययन केंद्र (एनसीईएसएस) के सहयोग से स्थापित किया है। यह केंद्र 2022 से पूरी तरह क्रियाशील है और तमिलनाडु में अपनी तरह का एकमात्र सीज़ेडओ है।
सीज़ेडओ मिट्टी, पानी, वायु और पारिस्थितिक तंत्र की पारस्परिक क्रियाओं की निगरानी करता है, जिससे यह क्षेत्र उन्नत पर्यावरणीय अनुसंधान के लिए एक जीवंत प्रयोगशाला बन गया है।
कृषि और जलवायु अनुसंधान में उपयोग
स्किंटिलोमीटर ऊष्मा प्रवाह और नमी परिवहन के उच्च–गुणवत्ता वाले सतत मापन उपलब्ध कराता है। इन आँकड़ों से वाष्पोत्सर्जन का अनुमान लगाया जाता है, जो जल–नुकसान को समझने के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।
ये मापन सिंचाई योजना, जलवायु पूर्वानुमान और जलवायु–स्मार्ट कृषि को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। कावेरी डेल्टा भारत के सबसे महत्त्वपूर्ण धान–उत्पादक क्षेत्रों में से एक है, जहाँ सटीक जल–मिट्टी–जलवायु आँकड़े अनिवार्य हैं।
स्थिर सामान्य ज्ञान तथ्य: कावेरी डेल्टा को “तमिलनाडु का धान कटोरा” कहा जाता है।
आँकड़ों का महत्व
तमिलनाडु में धान उत्पादन वर्षा और नहर–आधारित सिंचाई पर अत्यधिक निर्भर है। बदलते वर्षा–रुझानों के कारण वैज्ञानिक निगरानी बेहद ज़रूरी हो गई है।
स्किंटिलोमीटर, सीज़ेडओ में स्थित अन्य उपकरणों जैसे स्वचालित मौसम स्टेशन, मिट्टी–नमी सेंसर और पत्ती–आवरण निगरानी यंत्रों के साथ मिलकर अत्यंत सटीक फसल–जल मॉडल तैयार करने में मदद करता है।
दीर्घकालिक लाभ
समय के साथ यह उपकरण मौसम, जल, मिट्टी और फसली तत्वों से संबंधित विशाल डेटासेट तैयार करेगा। ये आँकड़े किसानों को सूखा, अत्यधिक तापमान या अनियमित वर्षा की स्थिति में वैज्ञानिक सलाह देने में अत्यंत सहायक होंगे।
यह डेटा दीर्घकालिक जलवायु परिवर्तन और खाद्य सुरक्षा पर उसके प्रभाव को समझने में भी उपयोगी होगा।
स्थिर सामान्य ज्ञान तथ्य: भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा धान उत्पादक देश है।
Static Usthadian Current Affairs Table
| विषय | विवरण |
| उपकरण | ऊष्मा और नमी आदान–प्रदान मापने वाला स्किंटिलोमीटर |
| स्थान | तमिलनाडु राइस रिसर्च इंस्टीट्यूट (टीआरआरआई), अदुथुरै |
| संबंधित परियोजना | टीएनएयू के अधीन क्रिटिकल ज़ोन ऑब्ज़र्वेटरी |
| सहयोगी संस्था | राष्ट्रीय पृथ्वी विज्ञान अध्ययन केंद्र (एनसीईएसएस) |
| क्रियाशील स्थिति | 2022 से पूर्ण रूप से कार्यरत |
| विशिष्टता | तमिलनाडु का एकमात्र सीज़ेडओ केंद्र |
| प्रमुख उपयोग | सिंचाई योजना, जलवायु पूर्वानुमान, जलवायु–स्मार्ट कृषि |
| लाभार्थी क्षेत्र | कावेरी डेल्टा – प्रमुख धान उत्पादन क्षेत्र |
| मुख्य मापन | संवेदी ऊष्मा प्रवाह, नमी परिवहन, वाष्पोत्सर्जन |
| अनुसंधान लाभ | कृषि हेतु दीर्घकालिक जल–चक्र एवं जलवायु डेटा |





