फोकस में राष्ट्रीय मिशन
संपूर्णता अभियान 2.0 नीति आयोग द्वारा 28 जनवरी, 2026 को शुरू किया गया एक 90-दिवसीय राष्ट्रीय अभियान है। यह अभियान एक समय-सीमा वाला सैचुरेशन अभियान है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि चुने हुए क्षेत्रों में हर पात्र नागरिक को ज़रूरी सरकारी सेवाएं मिलें।
यह पूरे भारत में 112 एस्पिरेशनल जिलों और 513 एस्पिरेशनल ब्लॉकों को लक्षित करता है। इसका मूल सिद्धांत धीरे-धीरे सुधार नहीं, बल्कि पूर्ण कवरेज है, जिसमें कोई भी लाभार्थी छूटे नहीं।
यह पहल प्रशासनिक रिपोर्टिंग के बजाय ज़मीनी स्तर पर दिखाई देने वाले बदलाव पर ध्यान केंद्रित करते हुए, परिणाम-आधारित शासन की ओर बदलाव को दर्शाती है।
अभियान के फोकस क्षेत्र
यह अभियान स्वास्थ्य, पोषण, स्वच्छता, शिक्षा और पशु स्वास्थ्य देखभाल पर केंद्रित है। ये क्षेत्र कम सेवा वाले क्षेत्रों में सबसे महत्वपूर्ण मानव विकास संकेतकों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
जोर अंतिम-मील सेवा वितरण पर है, यह सुनिश्चित करना कि योजनाएं घरों, स्कूलों और सामुदायिक संस्थानों तक पहुंचें। रणनीति योजना की घोषणाओं के बजाय सेवा तक पहुंच को प्राथमिकता देती है।
स्टेटिक जीके तथ्य: स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण और स्वच्छता भारत के मानव विकास सूचकांक (HDI) ढांचे के मुख्य स्तंभ हैं।
एस्पिरेशनल ब्लॉकों के लिए KPI
एस्पिरेशनल ब्लॉकों के लिए छह प्रमुख प्रदर्शन संकेतक (KPI) पहचाने गए हैं। इनमें ICDS के तहत पूरक पोषण, आंगनवाड़ी केंद्रों में विकास निगरानी, आंगनवाड़ियों में कार्यात्मक शौचालय और पीने का पानी, स्कूलों में लड़कियों के शौचालय और फुट एंड माउथ रोग के खिलाफ मवेशियों का टीकाकरण शामिल है।
ये संकेतक सीधे बच्चे के स्वास्थ्य, स्कूल में भागीदारी और ग्रामीण आजीविका को प्रभावित करते हैं। ब्लॉक-स्तरीय सैचुरेशन यह सुनिश्चित करता है कि परिवारों को मूलभूत सेवाएं लगातार मिलें।
एस्पिरेशनल जिलों के लिए KPI
पांच KPI एस्पिरेशनल जिलों में कार्यान्वयन का मार्गदर्शन करते हैं। इनमें नवजात शिशु का वजन, तपेदिक मामले की अधिसूचना, ग्राम और शहरी स्वास्थ्य स्वच्छता और पोषण दिवस, स्कूलों में कार्यात्मक लड़कियों के शौचालय और पशु टीकाकरण कवरेज शामिल हैं।
ये संकेतक सार्वजनिक स्वास्थ्य निगरानी, रोग निगरानी प्रणाली और शिक्षा बुनियादी ढांचे को मजबूत करते हैं। जिला-स्तरीय फोकस विभागों में प्रणालीगत समन्वय सुनिश्चित करता है।
स्टेटिक जीके टिप: भारत में तपेदिक निगरानी की निगरानी राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम (NTEP) के माध्यम से की जाती है।
कार्यान्वयन रणनीति
हर ज़िला और ब्लॉक तीन महीने का माइक्रो-एक्शन प्लान तैयार करता है। मासिक डेटा डैशबोर्ड और परफॉर्मेंस रिव्यू के ज़रिए प्रगति पर नज़र रखी जाती है। सामुदायिक जुड़ाव की गतिविधियाँ व्यवहार में बदलाव और जागरूकता को बढ़ावा देती हैं। नियमित फील्ड निरीक्षण परिणामों का ज़मीनी सत्यापन सुनिश्चित करते हैं।
NITI आयोग तेज़ निर्णय लेने और परिचालन सहायता के लिए केंद्रीय मंत्रालयों, राज्य सरकारों और स्थानीय प्रशासनों के साथ समन्वय करता है। यह संरचना एक निश्चित समय-सीमा के भीतर जवाबदेही, गति और मापने योग्य परिणामों को सुनिश्चित करती है।
आकांक्षी विकास ढाँचा
यह अभियान आकांक्षी ज़िला कार्यक्रम (2018) और आकांक्षी ब्लॉक कार्यक्रम (2023) पर आधारित है। ये कार्यक्रम विकास में तेज़ी लाने के लिए डेटा-संचालित शासन, प्रतिस्पर्धा और सहकारी संघवाद का उपयोग करते हैं।
सैचुरेशन मॉडल नीति को सीधे सेवा वितरण में बदलता है, जिससे शासन गाँव और वार्ड स्तर पर दिखाई देता है।
स्टेटिक GK तथ्य: आकांक्षी ज़िला कार्यक्रम में मूल रूप से कई विकास संकेतकों में 112 ज़िले शामिल थे।
मिशन के पीछे शासन संस्था
NITI आयोग भारत के राष्ट्रीय नीति थिंक टैंक के रूप में कार्य करता है। इसकी स्थापना 1 जनवरी 2015 को योजना आयोग की जगह की गई थी।
यह सहकारी संघवाद, नवाचार-संचालित विकास और क्षेत्रीय समानता को बढ़ावा देता है। इसकी संरचना नीति समन्वय के लिए केंद्रीय नेतृत्व को राज्य की भागीदारी के साथ एकीकृत करती है।
संपूर्णता अभियान 2.0 NITI आयोग के डेटा-फर्स्ट, परिणाम-संचालित शासन मॉडल को दर्शाता है।
Static Usthadian Current Affairs Table
| विषय | विवरण |
| अभियान का नाम | सम्पूर्णता अभियान 2.0 |
| प्रारंभ तिथि | 28 जनवरी 2026 |
| अवधि | 90 दिन |
| समाप्ति तिथि | 14 अप्रैल 2026 |
| कार्यान्वयन निकाय | नीति आयोग |
| कवरेज | 112 ज़िले और 513 ब्लॉक |
| मुख्य मॉडल | संतृप्ति (सैचुरेशन) दृष्टिकोण |
| फोकस क्षेत्र | स्वास्थ्य, पोषण, स्वच्छता, शिक्षा, पशु स्वास्थ्य |
| शासन शैली | परिणाम-आधारित शासन |
| संस्थागत ढांचा | आकांक्षी ज़िला एवं ब्लॉक कार्यक्रम |





