भारत की क्वांटम प्रगति
भारत ने अपने पहले क्वांटम डायमंड माइक्रोस्कोप (QDM) के लॉन्च के साथ विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में बड़ा कदम उठाया है। IIT बॉम्बे के P-Quest समूह द्वारा विकसित यह उपलब्धि ESTIC 2025 में घोषित की गई। यह प्रगति भारत की क्वांटम सेंसिंग और अत्याधुनिक डायग्नोस्टिक तकनीकों में बढ़ती क्षमता को दर्शाती है।
स्थिर जीके तथ्य: भारत ने 2023 में राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (National Quantum Mission) शुरू किया था, जिसका उद्देश्य क्वांटम कंप्यूटिंग, क्वांटम सेंसिंग, सामग्रियों और संचार तकनीकों को बढ़ावा देना है।
माइक्रोस्कोप क्या करता है?
क्वांटम डायमंड माइक्रोस्कोप अत्यंत छोटे चुंबकीय क्षेत्रों का पता लगाता है। यह डायमंड में मौजूद नाइट्रोजन-वैकेन्सी (NV) केंद्रों का उपयोग करता है, जो बेहद सूक्ष्म चुंबकीय परिवर्तनों पर प्रतिक्रिया देते हैं। यह तकनीक उन चुंबकीय संकेतों का अवलोकन संभव बनाती है जिन्हें पारंपरिक माइक्रोस्कोप नहीं पकड़ सकते।
स्थिर जीके टिप: हीरा (Diamond) मोह्स कठोरता पैमाने पर 10 रैंक रखता है — प्राकृतिक रूप से ज्ञात सबसे कठोर पदार्थ।
यह तकनीक कैसे काम करती है?
इस माइक्रोस्कोप में Optically Detected Magnetic Resonance (ODMR) तकनीक का उपयोग होता है।
• लेज़र प्रकाश NV केंद्रों पर पड़ते ही
• उनका फ्लोरेसेंस चुंबकीय क्षेत्र के अनुसार बदलता है
• यही परिवर्तन चुंबकीय छवि के रूप में रिकॉर्ड होता है
यह प्रणाली रूम-टेम्परेचर पर काम करती है—जो इसे अन्य क्वांटम उपकरणों से बेहतर बनाती है जिन्हें अत्यधिक ठंडे वातावरण की आवश्यकता होती है।
साथ ही, यह वाइड-फील्ड नैनोस्केल इमेजिंग करने में सक्षम है, जिससे बिना नुकसान पहुँचाए नमूनों की रीयल-टाइम निगरानी की जा सकती है।
न्यूरोसाइंस में क्रांतिकारी उपयोग
QDM तकनीक मानव मस्तिष्क की चुंबकीय गतिविधि को उच्च सटीकता के साथ मैप कर सकती है। इससे वास्तविक-समय में न्यूरॉन्स के सिग्नल्स का गैर-आक्रामक अध्ययन किया जा सकता है, जो न्यूरोलॉजिकल बीमारियों को समझने और नई उपचार तकनीकें विकसित करने में अत्यधिक सहायक होगा।
स्थिर जीके तथ्य: मानव मस्तिष्क में लगभग 86 अरब न्यूरॉन्स होते हैं, जिनसे अत्यंत सूक्ष्म चुंबकीय संकेत उत्पन्न होते हैं।
सेमीकंडक्टर उद्योग में बड़ा लाभ
भारत के उभरते सेमीकंडक्टर क्षेत्र को QDM से बड़ा फायदा होगा। आधुनिक 3D चिप आर्किटेक्चर को पारंपरिक माइक्रोस्कोप ठीक से विश्लेषित नहीं कर पाते।
QDM सक्षम है:
• चिप्स के अंदर करंट फ्लो देखने में
• चुंबकीय लेयर्स की पहचान करने में
• संरचना को बिना तोड़े डायग्नोसिस करने में
यह ऑटोनॉमस सिस्टम्स, क्रायोजेनिक प्रोसेसर और हाई-परफॉर्मेंस इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए अत्यंत उपयोगी है।
बैटरी और मैटेरियल साइंस रिसर्च में योगदान
यह तकनीक बैटरी के अंदर आयनों की गतिविधि, चरण-परिवर्तन और चुंबकीय अंतःक्रियाओं को देखने में सक्षम है। यह जटिल सामग्रियों और सुरक्षित, बेहतर ऊर्जा भंडारण तकनीकों के विकास में मदद करती है।
स्थिर जीके तथ्य: लिथियम-आयन बैटरियों का व्यावसायीकरण 1991 में हुआ था।
भारत के क्वांटम मिशन को मजबूती
यह उपलब्धि राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (NQM) के उद्देश्यों को आगे बढ़ाती है।
IIT बॉम्बे के Prof. कस्तूरी साहा के नेतृत्व में बनी शोध टीम ने क्वांटम मैग्नेटिक इमेजिंग के क्षेत्र में भारत का पहला पेटेंट भी हासिल किया है।
इस लॉन्च में Dr. जितेन्द्र सिंह, Prof. अजय के. सूद, Prof. अभय करंदीकर जैसे शीर्ष वैज्ञानिकों की उपस्थिति भारत के वैज्ञानिक इकोसिस्टम की मजबूत प्रतिबद्धता दर्शाती है।
Static Usthadian Current Affairs Table
| विषय | विवरण |
| लॉन्च कार्यक्रम | ESTIC 2025 में घोषणा |
| विकसित करने वाला संस्थान | P-Quest समूह, IIT बॉम्बे |
| प्रमुख वैज्ञानिक | प्रोफेसर कस्तूरी साहा |
| तकनीक का आधार | डायमंड में NV केंद्र |
| इमेजिंग विधि | ODMR आधारित चुंबकीय क्षेत्र मैपिंग |
| प्रमुख उपयोग | न्यूरोसाइंस, सेमीकंडक्टर, सामग्री विज्ञान |
| राष्ट्रीय पहल | राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (NQM) |
| पेटेंट | क्वांटम मैग्नेटिक इमेजिंग में भारत का पहला पेटेंट |
| मुख्य विशेषता | वास्तविक-समय 3D चुंबकीय इमेजिंग |
| वर्ष | 2025 |





