पंजाब का डिजिटल उपलब्धि–पथ
पंजाब पूरे भूभाग में संशोधित भारतनेट योजना को पूर्ण रूप से लागू करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। इस उपलब्धि ने पंजाब को ग्रामीण डिजिटल पहुंच और उच्च–गति ब्रॉडबैंड प्रसार में राष्ट्रीय अग्रणी के रूप में स्थापित कर दिया है। इस विस्तार से लगभग हर गाँव एकीकृत डिजिटल नेटवर्क से जुड़ गया है, जिससे प्रशासनिक दक्षता और सार्वजनिक सेवा वितरण मजबूत हुआ है।
यह क्रियान्वयन सीमा क्षेत्रों की लाइव निगरानी को भी सक्षम बनाता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सुरक्षा तैयारियों में बढ़ोतरी हुई है।
स्थिर सामान्य ज्ञान तथ्य: पंजाब की पाकिस्तान से लगी अंतरराष्ट्रीय सीमा 550 किलोमीटर से अधिक है।
तेज़ क्रियान्वयन और राष्ट्रीय मान्यता
राज्य के क्रियान्वयन मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली। मुख्य सचिव केएपी सिन्हा को इस उपलब्धि के लिए सम्मानित किया गया। यह सम्मान बीएसएनएल पंजाब सर्कल के मुख्य महाप्रबंधक अजॉय कुमार करारहा द्वारा प्रदान किया गया।
राज्य में 43 छाया क्षेत्रों (दुर्गम सीमा क्षेत्र) में ब्रॉडबैंड सेवाएँ शुरू कर दी गई हैं। केवल एक गाँव शेष है, जिसे नवंबर 2025 के अंत तक जोड़ने की संभावना है। यह लगभग सार्वभौमिक कवरेज पंजाब की सशक्त अंतिम–मील रणनीति को दर्शाता है।
ग्रामीण डिजिटल अवसंरचना को मजबूती
योजना से ग्रामीण पंजाब में ई-शासन, ऑनलाइन शिक्षा, डिजिटल दस्तावेज़ीकरण और ई-स्वास्थ्य सेवाएँ बेहतर हुई हैं। फाइबर–आधारित नेटवर्क ग्रामीण प्रशासन को केंद्र द्वारा संचालित डिजिटल प्लेटफॉर्मों से जोड़ने में मदद करता है।
स्थिर सामान्य ज्ञान टिप: ग्राम पंचायत पंचायती राज व्यवस्था की सबसे निचली इकाई है, जिसकी स्थापना 73वें संविधान संशोधन (1992) के तहत हुई।
भारतनेट योजना के बारे में
भारतनेट योजना भारत का सबसे बड़ा ग्रामीण ब्रॉडबैंड विकास कार्यक्रम है। इसका उद्देश्य हर ग्राम पंचायत और बाद में सभी आबाद गाँवों तक उच्च–गति इंटरनेट पहुँचाना है।
मूल योजना को 25 अक्टूबर 2011 को स्वीकृत किया गया था, जिसका लक्ष्य लगभग 2.64 लाख ग्राम पंचायतों तक कनेक्टिविटी प्रदान करना था। संशोधित योजना गाँव–स्तर तक पूर्ण कवरेज के लिए तैयार की गई है, जिसकी अनुमानित लागत ₹1,39,579 करोड़ है।
योजना के मुख्य उद्देश्य
यह योजना ग्रामीण परिवारों, संस्थानों और प्रशासन तक ब्रॉडबैंड पहुँच सुनिश्चित करती है। यह टेली–चिकित्सा, ऑनलाइन शासन, दूरस्थ शिक्षा और डिजिटल भुगतान जैसी सेवाओं को बढ़ावा देती है। यह उन्नयन भारत के डिजिटल ग्राम विकास लक्ष्य के अनुरूप है।
व्यापक लाभ और राष्ट्रीय प्रभाव
पंजाब का यह राज्यव्यापी विस्तार उन राज्यों के लिए एक मॉडल प्रस्तुत करता है जो ग्रामीण कनेक्टिविटी को तेज़ करना चाहते हैं। इस परियोजना ने दिखाया कि समन्वित क्रियान्वयन किस प्रकार सीमा निगरानी, शासन और सार्वजनिक सेवाओं को बदल सकता है।
नया नेटवर्क ओएफसी रिंग टोपोलॉजी, आईपी–एमपीएलएस नेटवर्क संरचना और केंद्रीयकृत निगरानी प्रणाली (सीएनओसी) जैसी विशेषताओं पर आधारित है। ये वैशिष्ट्य ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर अपटाइम और तेज़ डेटा प्रवाह सुनिश्चित करते हैं।
पंजाब की यह उपलब्धि पूरे भारत में समान मॉडल अपनाने को प्रेरित करेगी और समान डिजिटल विकास को आगे बढ़ाएगी।
स्थिर सामान्य ज्ञान तथ्य: भारत में दूरसंचार क्षेत्र का नियमन संचार मंत्रालय के अधीन दूरसंचार विभाग द्वारा किया जाता है।
स्थिर उस्तादियन वर्तमान मामलों की तालिका
| विषय | विवरण |
| संशोधित भारतनेट लागू करने वाला पहला राज्य | पंजाब |
| कवर किए गए छाया क्षेत्र | 43 |
| शेष गाँव | 1 (नवंबर 2025 तक जुड़ने की संभावना) |
| प्रमुख अधिकारी | केएपी सिन्हा, अजॉय कुमार करारहा |
| मुख्य लक्ष्य | ग्रामीण परिवारों और संस्थानों तक ब्रॉडबैंड |
| मूल स्वीकृति वर्ष | 2011 |
| संशोधित योजना की लागत | ₹1,39,579 करोड़ |
| नेटवर्क डिजाइन | ओएफसी रिंग टोपोलॉजी, आईपी–एमपीएलएस |
| निगरानी प्रणाली | सीएनओसी (केंद्रीयकृत) |
| राष्ट्रीय महत्व | पूरे भारत के लिए ग्रामीण डिजिटल विस्तार का मॉडल |





