ऑपरेशन अखंड प्रहार: एक व्यापक अवलोकन
ऑपरेशन अखंड प्रहार भारत की बहु-डोमेन युद्ध क्षमता की ओर बड़े बदलाव को दर्शाता है। जैसलमेर के विस्तृत मरुस्थल में आयोजित इस अभ्यास ने दिखाया कि भविष्य के युद्ध स्थलीय शक्ति, वायु शक्ति और रियल-टाइम तकनीकों के संयुक्त उपयोग पर आधारित होंगे।
यह अभ्यास दक्षिणी कमान के अधीन संचालित किया गया और इसे त्रि-सेवाओं के संयुक्त अभ्यास त्रिशूल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया।
इस अभ्यास ने भारत की समन्वित अग्नि-शक्ति के साथ उच्च-तीव्रता वाली लड़ाइयाँ लड़ने की क्षमता को प्रमाणित किया।
स्थिर जीके तथ्य: दक्षिणी कमान भारतीय सेना की सबसे पुरानी परिचालन कमानों में से एक है, जिसकी स्थापना 1895 में हुई थी।
केंद्र में रहा ‘रूद्र’ ब्रिगेड
नवगठित रूद्र ब्रिगेड इस पूरे ऑपरेशन का मुख्य आधार थी, जिसने अपने ‘प्रचंड’ युद्धाभ्यास का प्रभावशाली प्रदर्शन किया।
यह भारत का पहला पूरी तरह एकीकृत ऑल-आर्म्स फॉर्मेशन है—जिसमें पैदल सेना, आर्मर, तोपखाना, इंजीनियर, वायुरक्षा, और तकनीकी इकाइयाँ एक ही संरचना में संगठित हैं।
रूद्र ब्रिगेड कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में स्वतंत्र रूप से संचालित होने में सक्षम है।
इसमें शामिल हैं:
• UAV आधारित निगरानी
• AI-आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम
• उच्च गतिशीलता वाले प्लेटफॉर्म
• सटीक प्रहार क्षमता
स्थिर जीके तथ्य: “रूद्र” नाम भारतीय ग्रंथों में भगवान शिव के उग्र रूपों में से एक का प्रतीक है।
बहु-डोमेन युद्ध की तैयारी
ऑपरेशन अखंड प्रहार ने थल और वायु तत्वों के बीच अत्यंत सुचारु समन्वय को प्रदर्शित किया।
पैदल सेना, आर्मर, मैकेनाइज्ड यूनिट्स और वायुरक्षा इकाइयों ने एकसाथ समकालिक युद्धाभ्यास किए।
भारतीय वायु सेना ने क्लोज एयर सपोर्ट और रीयल-टाइम रिकॉनिसेंस प्रदान किया, जिससे संयुक्त संचालन और अधिक सशक्त हुए।
अभ्यास ने तेज संचार तंत्र, सेंसर आधारित निगरानी और मोबाइल युद्ध कौशल की आवश्यकता को रेखांकित किया।
स्वदेशी रक्षा तकनीकों का प्रदर्शन
इस अभ्यास की प्रमुख विशेषता रही—Made-in-India रक्षा प्रणालियों की मजबूत उपस्थिति।
मरुस्थल में इन तकनीकों का व्यापक परीक्षण हुआ:
• स्मार्ट रिकॉनिसेंस ड्रोन
• पोर्टेबल एंटी-ड्रोन मॉड्यूल
• AI-सक्षम कमांड नेटवर्क
AI आधारित निर्णय समर्थन प्रणालियों ने गतिशील युद्ध स्थितियों में त्वरित और सटीक निर्णय लेने में मदद की।
स्थिर जीके टिप: रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत पहल का उद्देश्य आयात को कम करना और स्वदेशी उत्पादन बढ़ाना है।
नेतृत्व और प्रमुख प्रतिभागी
ऑपरेशन की निगरानी लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ, जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, दक्षिणी कमान ने की।
इसमें कोणार्क कोर, बैटल ऐक्स डिवीजन, और कई वायुसेना इकाइयों ने हिस्सा लिया।
इन बलों की संयुक्त शक्ति ने भविष्य के सैन्य नियोजन में “सहयोग” (Jointness) को और सुदृढ़ किया।
पूरा अभ्यास भारत की “JAI” दर्शन—
• Jointness
• Atmanirbharta
• Innovation
—के अनुरूप रहा।
रणनीतिक महत्व
ऑपरेशन अखंड प्रहार ने संकेत दिया कि भारत अब उच्च-तीव्रता वाले, तेज-गति वाले और तकनीक-आधारित संघर्षों के लिए पूरी तरह तैयार है।
रूद्र ब्रिगेड के प्रदर्शन ने यह साबित किया कि भारत कठिन मरुस्थलीय इलाकों में भी जटिल सैन्य अभियानों को सफलतापूर्वक अंजाम देने में सक्षम है।
Static Usthadian Current Affairs Table
| विषय | विवरण |
| ऑपरेशन का नाम | अखंड प्रहार |
| स्थान | जैसलमेर मरुस्थल, राजस्थान |
| मुख्य गठन | रूद्र ब्रिगेड |
| कमान | दक्षिणी कमान |
| वरिष्ठ अधिकारी | ले. जनरल धीरज सेठ |
| सहयोगी बल | कोणार्क कोर, बैटल ऐक्स डिवीजन, वायुसेना इकाइयाँ |
| उपयोग की गई तकनीकें | UAVs, AI प्रणाली, एंटी-ड्रोन प्लेटफॉर्म |
| अभ्यास प्रकार | बहु-डोमेन एकीकृत युद्ध |
| व्यापक ढांचा | त्रि-सेवाओं का अभ्यास त्रिशूल |
| मुख्य फोकस | संयुक्तता, नवाचार, स्वदेशी रक्षा प्रणालियाँ |





