नवम्बर 30, 2025 5:03 पूर्वाह्न

भारत की रेगिस्तानी युद्ध रणनीति में रुद्र ब्रिगेड की प्रचंड शक्ति

चालू घटनाएँ: ऑपरेशन अखंड प्रहार, रुद्र ब्रिगेड, दक्षिणी कमान, तीनों सेनाओं का अभ्यास त्रिशूल, जैसलमेर रेगिस्तान में ऑपरेशन, एकीकृत युद्ध संरचनाएँ, आत्मनिर्भर रक्षा तकनीक, संयुक्त युद्ध सिद्धांत, एआई-सक्षम युद्धक्षेत्र प्रणालियाँ, ड्रोन-रोधी क्षमताएँ

Prachand Power of RUDRA Brigade in India’s Desert Warfare Strategy

ऑपरेशन अखंड प्रहार: एक व्यापक अवलोकन

ऑपरेशन अखंड प्रहार भारत की बहु-डोमेन युद्ध क्षमता की ओर बड़े बदलाव को दर्शाता है। जैसलमेर के विस्तृत मरुस्थल में आयोजित इस अभ्यास ने दिखाया कि भविष्य के युद्ध स्थलीय शक्ति, वायु शक्ति और रियल-टाइम तकनीकों के संयुक्त उपयोग पर आधारित होंगे।
यह अभ्यास दक्षिणी कमान के अधीन संचालित किया गया और इसे त्रि-सेवाओं के संयुक्त अभ्यास त्रिशूल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया।

इस अभ्यास ने भारत की समन्वित अग्नि-शक्ति के साथ उच्च-तीव्रता वाली लड़ाइयाँ लड़ने की क्षमता को प्रमाणित किया।

स्थिर जीके तथ्य: दक्षिणी कमान भारतीय सेना की सबसे पुरानी परिचालन कमानों में से एक है, जिसकी स्थापना 1895 में हुई थी।

केंद्र में रहा ‘रूद्र’ ब्रिगेड

नवगठित रूद्र ब्रिगेड इस पूरे ऑपरेशन का मुख्य आधार थी, जिसने अपने ‘प्रचंड’ युद्धाभ्यास का प्रभावशाली प्रदर्शन किया।
यह भारत का पहला पूरी तरह एकीकृत ऑल-आर्म्स फॉर्मेशन है—जिसमें पैदल सेना, आर्मर, तोपखाना, इंजीनियर, वायुरक्षा, और तकनीकी इकाइयाँ एक ही संरचना में संगठित हैं।

रूद्र ब्रिगेड कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में स्वतंत्र रूप से संचालित होने में सक्षम है।
इसमें शामिल हैं:
• UAV आधारित निगरानी
• AI-आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम
• उच्च गतिशीलता वाले प्लेटफॉर्म
• सटीक प्रहार क्षमता

स्थिर जीके तथ्य: “रूद्र” नाम भारतीय ग्रंथों में भगवान शिव के उग्र रूपों में से एक का प्रतीक है।

बहु-डोमेन युद्ध की तैयारी

ऑपरेशन अखंड प्रहार ने थल और वायु तत्वों के बीच अत्यंत सुचारु समन्वय को प्रदर्शित किया।
पैदल सेना, आर्मर, मैकेनाइज्ड यूनिट्स और वायुरक्षा इकाइयों ने एकसाथ समकालिक युद्धाभ्यास किए।
भारतीय वायु सेना ने क्लोज एयर सपोर्ट और रीयल-टाइम रिकॉनिसेंस प्रदान किया, जिससे संयुक्त संचालन और अधिक सशक्त हुए।

अभ्यास ने तेज संचार तंत्र, सेंसर आधारित निगरानी और मोबाइल युद्ध कौशल की आवश्यकता को रेखांकित किया।

स्वदेशी रक्षा तकनीकों का प्रदर्शन

इस अभ्यास की प्रमुख विशेषता रही—Made-in-India रक्षा प्रणालियों की मजबूत उपस्थिति।
मरुस्थल में इन तकनीकों का व्यापक परीक्षण हुआ:
• स्मार्ट रिकॉनिसेंस ड्रोन
• पोर्टेबल एंटी-ड्रोन मॉड्यूल
• AI-सक्षम कमांड नेटवर्क

AI आधारित निर्णय समर्थन प्रणालियों ने गतिशील युद्ध स्थितियों में त्वरित और सटीक निर्णय लेने में मदद की।

स्थिर जीके टिप: रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत पहल का उद्देश्य आयात को कम करना और स्वदेशी उत्पादन बढ़ाना है।

नेतृत्व और प्रमुख प्रतिभागी

ऑपरेशन की निगरानी लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ, जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, दक्षिणी कमान ने की।
इसमें कोणार्क कोर, बैटल ऐक्स डिवीजन, और कई वायुसेना इकाइयों ने हिस्सा लिया।
इन बलों की संयुक्त शक्ति ने भविष्य के सैन्य नियोजन में “सहयोग” (Jointness) को और सुदृढ़ किया।

पूरा अभ्यास भारत की “JAI” दर्शन—
• Jointness
• Atmanirbharta
• Innovation
—के अनुरूप रहा।

रणनीतिक महत्व

ऑपरेशन अखंड प्रहार ने संकेत दिया कि भारत अब उच्च-तीव्रता वाले, तेज-गति वाले और तकनीक-आधारित संघर्षों के लिए पूरी तरह तैयार है।
रूद्र ब्रिगेड के प्रदर्शन ने यह साबित किया कि भारत कठिन मरुस्थलीय इलाकों में भी जटिल सैन्य अभियानों को सफलतापूर्वक अंजाम देने में सक्षम है।

Static Usthadian Current Affairs Table

विषय विवरण
ऑपरेशन का नाम अखंड प्रहार
स्थान जैसलमेर मरुस्थल, राजस्थान
मुख्य गठन रूद्र ब्रिगेड
कमान दक्षिणी कमान
वरिष्ठ अधिकारी ले. जनरल धीरज सेठ
सहयोगी बल कोणार्क कोर, बैटल ऐक्स डिवीजन, वायुसेना इकाइयाँ
उपयोग की गई तकनीकें UAVs, AI प्रणाली, एंटी-ड्रोन प्लेटफॉर्म
अभ्यास प्रकार बहु-डोमेन एकीकृत युद्ध
व्यापक ढांचा त्रि-सेवाओं का अभ्यास त्रिशूल
मुख्य फोकस संयुक्तता, नवाचार, स्वदेशी रक्षा प्रणालियाँ
Prachand Power of RUDRA Brigade in India’s Desert Warfare Strategy
  1. ऑपरेशन अखंड प्रहार जैसलमेर के रेगिस्तान में संचालित किया गया।
  2. इसने भारत के बहुक्षेत्रीय युद्ध की ओर रणनीतिक रुख को प्रदर्शित किया।
  3. यह अभ्यास त्रिसेवा अभ्यास त्रिशूल का एक हिस्सा था।
  4. इसका नेतृत्व दक्षिणी कमान के अधीन किया गया।
  5. रुद्र ब्रिगेड इस ऑपरेशन की केंद्रीय युद्ध संरचना थी।
  6. रुद्र भारत की पहली पूर्णतः एकीकृत सर्वशस्त्र ब्रिगेड है।
  7. इसमें पैदल सेना, बख्तरबंद वाहन, तोपखाना, इंजीनियर और वायु रक्षा शामिल हैं।
  8. ब्रिगेड ने अपने प्रचंडयुद्धाभ्यास का प्रदर्शन किया।
  9. इस ऑपरेशन में यूएवी और एआईआधारित निगरानी प्रणालियों का उपयोग किया गया।
  10. भारतीय वायु सेना ने वास्तविक समय टोही प्रदान की।
  11. इस अभ्यास में गतिशीलता और सूचना प्रभुत्व पर विशेष ध्यान दिया गया।
  12. ड्रोनरोधी प्लेटफ़ॉर्म जैसी स्वदेशी प्रणालियों का परीक्षण किया गया।
  13. एआईसहायता प्राप्त नेटवर्क ने युद्धक्षेत्र में निर्णय लेने की क्षमता को सुधारा
  14. कार्यक्रम ने भारत के आत्मनिर्भर रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र पर ज़ोर दिया।
  15. यह जयसिद्धांतसंयुक्तता, आत्मनिर्भरता, नवाचार — के अनुरूप था।
  16. इस अभियान की देखरेख लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने की।
  17. कोणार्क कोर और बैटल एक्स डिवीजन की इकाइयों ने इसमें भाग लिया
  18. इसने उच्चतीव्रता वाले रेगिस्तानी युद्ध के लिए भारत की तत्परता को उजागर किया।
  19. अभ्यास ने भूमि और वायु संचालन को एकीकृत कर संयुक्त युद्ध क्षमता को मजबूत किया।
  20. अखंड प्रहार भविष्यतैयार सैन्य सिद्धांत की दिशा में भारत के प्रयास का संकेत देता है।

Q1. ऑपरेशन अखंड प्रहार किस कमांड के अंतर्गत संचालित किया गया था?


Q2. ऑपरेशन अखंड प्रहार का मुख्य गठन (formation) कौन-सा था?


Q3. ऑपरेशन अखंड प्रहार किस बड़े सैन्य अभ्यास का हिस्सा है?


Q4. इस ऑपरेशन की निगरानी किस वरिष्ठ अधिकारी ने की?


Q5. रुद्र ब्रिगेड की प्रमुख तकनीकी विशेषता क्या है?


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