योजना का अवलोकन और उद्देश्य
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY) 8 अप्रैल, 2015 को नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शुरू की गई थी। इस योजना का उद्देश्य उन छोटे और सूक्ष्म उद्यमों को बिना गारंटी वाले लोन देना है, जिनकी औपचारिक ऋण प्रणालियों तक पहुँच नहीं है।
इसका मुख्य उद्देश्य “अवित्तपोषित को वित्तपोषित करना” (Fund the Unfunded) है, जो गैर–कॉर्पोरेट और गैर–कृषि क्षेत्रों, जैसे छोटे व्यापारियों, कारीगरों और सेवा प्रदाताओं को लक्षित करता है। यह पहल पूरे भारत में वित्तीय समावेशन के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
स्टेटिक GK तथ्य: PMMY, सूक्ष्म इकाई विकास और पुनर्वित्त एजेंसी (MUDRA) के तहत काम करती है, जो पुनर्वित्त के माध्यम से सूक्ष्म उद्यमों को सहायता प्रदान करती है।
भारतीय अर्थव्यवस्था में MSME की भूमिका
MSME क्षेत्र भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, जो रोजगार और GDP में महत्वपूर्ण योगदान देता है। यह लाखों लोगों को रोजगार प्रदान करता है और ग्रामीण तथा शहरी, दोनों तरह के विकास में सहायता करता है।
छोटे व्यवसाय बड़े उद्योगों के आपूर्तिकर्ता के रूप में भी काम करते हैं और घरेलू तथा निर्यात, दोनों बाजारों की जरूरतों को पूरा करते हैं। इसलिए, MSME को मजबूत करने से आर्थिक विकास को सीधे बढ़ावा मिलता है।
स्टेटिक GK टिप: MSME भारत की GDP में लगभग 30% और निर्यात में लगभग 45% का योगदान देते हैं।
ऋण श्रेणियाँ और विशेषताएँ
PMMY व्यावसायिक चरणों के आधार पर चार श्रेणियों के तहत ऋण प्रदान करती है:
• शिशु: ₹50,000 तक
• किशोर: ₹50,000 से ₹5 लाख तक
• तरुण: ₹5 लाख से ₹10 लाख तक
• तरुण प्लस: ₹10 लाख से ₹20 लाख तक
ये ऋण बिना गारंटी वाले होते हैं और विनिर्माण, व्यापार तथा सेवा गतिविधियों के लिए उपलब्ध हैं। ये डेयरी, मुर्गी पालन और मधुमक्खी पालन जैसे संबद्ध क्षेत्रों को भी सहायता प्रदान करते हैं।
ऋण चुकाने की शर्तें लचीली हैं और भारतीय रिज़र्व बैंक के दिशानिर्देशों के अनुरूप हैं।
11 वर्षों की उपलब्धियाँ
पिछले एक दशक में, PMMY ने उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। कुल 57.79 करोड़ ऋण स्वीकृत किए गए हैं, जिनकी राशि ₹40.07 लाख करोड़ है।
लाभार्थियों में एक बड़ा हिस्सा महिला उद्यमियों (लगभग 67%) और पहली बार व्यवसाय शुरू करने वालों का है। यह इस बात को दिखाता है कि यह योजना उन वर्गों तक भी पहुँची है जिन्हें पहले शामिल नहीं किया गया था।
स्टेटिक GK तथ्य: साल-दर-साल दिए गए लोन की रकम ₹1.37 लाख करोड़ (2015-16) से बढ़कर ₹5.65 लाख करोड़ (2025-26) से ज़्यादा हो गई है।
सामाजिक प्रभाव और समावेशन
PMMY ने हाशिए पर पड़े समुदायों को काफ़ी हद तक सशक्त बनाया है। लगभग 51% लाभार्थी SC/ST और OBC श्रेणियों से हैं, जिससे सबको समान रूप से विकास का मौका मिल रहा है।
इसने अनौपचारिक कर्ज देने वालों पर निर्भरता कम की है और ज़मीनी स्तर पर उद्यमिता को बढ़ावा दिया है। इस योजना ने आर्थिक गतिविधियों में महिलाओं की भागीदारी भी बढ़ाई है।
निर्मला सीतारमण के अनुसार, PMMY ने लाखों लोगों को आत्मनिर्भर बनाकर एक “खामोश बदलाव“ लाया है।
वित्तीय समावेशन के स्तंभ
PMMY की सफलता तीन मुख्य स्तंभों पर टिकी है:
• जिनके पास बैंक खाता नहीं है, उन्हें बैंकिंग सुविधा देना
• जिनके पास कोई सुरक्षा नहीं है, उन्हें सुरक्षा देना
• जिनके पास फंडिंग नहीं है, उन्हें फंडिंग देना
ये सिद्धांत यह सुनिश्चित करते हैं कि सबसे गरीब वर्गों को भी औपचारिक वित्तीय प्रणालियों और विकास के अवसरों तक पहुँच मिले।
निष्कर्ष
PMMY के 11 साल पूरे होने से भारत के उद्यमिता परिदृश्य को बदलने में इसकी भूमिका उजागर होती है। स्वरोज़गार और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देकर, यह योजना एक आत्मनिर्भर भारत (आत्मनिर्भर भारत) की नींव को लगातार मज़बूत कर रही है।
Static Usthadian Current Affairs Table
| विषय | विवरण |
| योजना का नाम | प्रधानमंत्री मुद्रा योजना |
| प्रारंभ तिथि | 8 अप्रैल 2015 |
| प्रारंभकर्ता | नरेंद्र मोदी |
| कार्यान्वयन निकाय | मुद्रा |
| ऋण सीमा | ₹20 लाख तक |
| प्रमुख लाभार्थी | सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, महिलाएं, एससी/एसटी/ओबीसी |
| कुल ऋण | 57.79 करोड़ |
| कुल राशि | ₹40.07 लाख करोड़ |
| मुख्य उद्देश्य | बिना वित्तीय सहायता वालों को वित्त उपलब्ध कराना |





