परिचय
24 सितम्बर 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 49वीं प्रगति (PRAGATI) बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में 15 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की ₹65,000 करोड़ की प्रमुख अवसंरचना परियोजनाओं की समीक्षा की गई। सत्र का उद्देश्य समय पर निष्पादन, अड़चनों का समाधान और परिणामोन्मुख शासन को मजबूत करना था।
प्रगति को समझना
PRAGATI का पूर्ण रूप है Pro-Active Governance And Timely Implementation (सक्रिय शासन और समयबद्ध कार्यान्वयन)। यह प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) द्वारा 25 मार्च 2015 को शुरू किया गया एक आईसीटी-सक्षम बहु-माध्यम प्लेटफ़ॉर्म है।
यह प्लेटफ़ॉर्म प्रधानमंत्री, केंद्रीय सचिवों और राज्यों के मुख्य सचिवों को सीधे जोड़ता है, जिससे महत्वपूर्ण परियोजनाओं की निगरानी आसान हो जाती है।
यह राज्यों से वास्तविक समय में संवाद की सुविधा देता है, जिससे नौकरशाही देरी को दूर कर त्वरित निर्णय संभव हो पाते हैं।
स्थैतिक तथ्य: प्रगति भारत का पहला ऐसा प्लेटफ़ॉर्म था जिसने डिजिटल शासन को प्रधानमंत्री द्वारा प्रत्यक्ष निगरानी के साथ जोड़ा।
49वीं बैठक का फोकस
प्रधानमंत्री ने आठ प्रमुख परियोजनाओं की समीक्षा की जो कई क्षेत्रों से संबंधित थीं:
- खनन परियोजनाएँ – संसाधनों के कुशल उपयोग के लिए
- रेलवे अवसंरचना – लॉजिस्टिक्स और यात्री सुविधा के लिए
- जल संसाधन – सिंचाई और शहरी आपूर्ति हेतु
- औद्योगिक गलियारे – विनिर्माण और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए
- ऊर्जा क्षेत्र – बढ़ती ऊर्जा मांग को पूरा करने के लिए
ये परियोजनाएँ भारत के विविध क्षेत्रों में संतुलित विकास को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम हैं।
चर्चा के मुख्य बिंदु
49वीं बैठक में चार प्रमुख विषयों पर बल दिया गया:
- समय पर निष्पादन और कठोर माइलस्टोन
- केंद्र और राज्यों के बीच समन्वित दृष्टिकोण
- भूमि अधिग्रहण और अनुमोदनों जैसी अड़चनों का समाधान
- प्रक्रिया-प्रधान नौकरशाही के स्थान पर परिणाम-आधारित शासन
स्थैतिक टिप: प्रगति की समीक्षा बैठकें प्रायः हर माह आयोजित होती हैं जिससे कार्यान्वयन की गति बनी रहती है।
विकास चालक के रूप में अवसंरचना
अवसंरचना हमेशा से भारत की विकास कहानी का केंद्र रही है। रेलवे, ऊर्जा और औद्योगिक गलियारों में निवेश से रोजगार सृजन, निवेश आकर्षण और लॉजिस्टिक्स लागत में कमी होती है। त्वरित पूर्णता से लाभ शीघ्र नागरिकों तक पहुँचते हैं और जीवन स्तर सुधरता है।
स्थैतिक तथ्य: भारतीय रेल विश्व का चौथा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है, जिसका विस्तार प्रगति के अंतर्गत भारत की आर्थिक प्रतिस्पर्धा के लिए महत्वपूर्ण है।
केंद्र-राज्य समन्वय
प्रगति मॉडल सहकारी संघवाद को मजबूत करता है क्योंकि यह प्रधानमंत्री और राज्य अधिकारियों के बीच सीधा संपर्क स्थापित करता है। इस व्यवस्था से प्रक्रियागत देरी कम होती है और लंबित मुद्दों का शीघ्र समाधान संभव होता है।
नागरिक-केन्द्रित शासन
प्रगति का मूल उद्देश्य नागरिक कल्याण है। परियोजनाओं की समय पर पूर्णता से बेहतर परिवहन, बिजली की उपलब्धता और जल आपूर्ति सुनिश्चित होती है। जबकि देरी से लागत बढ़ती है और सेवाओं में अंतराल आता है, जो अर्थव्यवस्था और नागरिकों के जीवन दोनों को प्रभावित करता है।
Static Usthadian Current Affairs Table
| विषय | विवरण |
| 49वीं प्रगति बैठक की तिथि | 24 सितम्बर 2025 |
| अध्यक्षता | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी |
| कुल निवेश समीक्षा | ₹65,000 करोड़ |
| परियोजनाओं की संख्या | 8 प्रमुख अवसंरचना परियोजनाएँ |
| शामिल राज्य व केंद्रशासित प्रदेश | 15 |
| शामिल क्षेत्र | खनन, रेलवे, जल, औद्योगिक गलियारे, ऊर्जा |
| प्रगति की शुरुआत | 25 मार्च 2015 |
| प्रगति का पूर्ण रूप | Pro-Active Governance And Timely Implementation |
| प्लेटफ़ॉर्म का प्रकार | आईसीटी-सक्षम बहु-माध्यम प्लेटफ़ॉर्म |
| आरंभकर्ता | प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) |





