जनवरी 19, 2026 3:33 अपराह्न

पीएम केयर्स फंड और RTI खुलासे की सीमाएँ

करेंट अफेयर्स: पीएम केयर्स फंड, दिल्ली हाई कोर्ट, सूचना का अधिकार अधिनियम, धारा 8(1)(j), तीसरे पक्ष की जानकारी, गोपनीयता छूट, सार्वजनिक प्राधिकरण, केंद्रीय सूचना आयोग, कर छूट दस्तावेज़

PM CARES Fund and the Limits of RTI Disclosure

न्यायिक फैसले का संदर्भ

दिल्ली हाई कोर्ट ने सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत गोपनीयता सुरक्षा के दायरे को स्पष्ट करते हुए एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि पीएम केयर्स फंड को RTI ढांचे के तहत गोपनीयता का अधिकार प्राप्त है, भले ही इसे एक सार्वजनिक प्राधिकरण माना जाए।

इस फैसले के पारदर्शिता कानूनों और तीसरे पक्ष की जानकारी के संबंध में व्यापक निहितार्थ हैं। यह इस बात पर ज़ोर देता है कि केवल सार्वजनिक कार्य करने से ही वैधानिक गोपनीयता सुरक्षा अपने आप कम नहीं हो जाती।

कोर्ट की मुख्य टिप्पणियाँ

यह फैसला मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की खंडपीठ ने सुनाया। पीठ ने कहा कि सार्वजनिक कार्य करने वाली संस्थाएँ केवल सरकारी जुड़ाव के कारण अपने गोपनीयता अधिकार नहीं खो देती हैं।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पीएम केयर्स फंड, भले ही उसे “राज्य” माना जाए, एक कानूनी व्यक्तित्व बना रहता है। इसलिए, इसे केवल सरकारी नियंत्रण या पर्यवेक्षण के कारण गोपनीयता सुरक्षा से वंचित नहीं किया जा सकता।

RTI अधिनियम की धारा 8(1)(j) की व्याख्या

यह फैसला RTI अधिनियम की धारा 8(1)(j) पर बहुत अधिक निर्भर था। यह प्रावधान व्यक्तिगत या तीसरे पक्ष की जानकारी के खुलासे से छूट देता है, जब तक कि कोई बड़ा सार्वजनिक हित स्पष्ट रूप से स्थापित न हो जाए।

पीठ ने इस बात पर ज़ोर दिया कि यहाँ गोपनीयता सुरक्षा वैधानिक प्रकृति की है, न कि संविधान के अनुच्छेद 21 से प्राप्त। यह RTI तंत्र के तहत सभी तीसरे पक्षों पर समान रूप से लागू होती है।

स्टेटिक जीके तथ्य: RTI अधिनियम की धारा 8 में दस छूट खंड हैं जो पारदर्शिता को गोपनीयता और राष्ट्रीय हित के साथ संतुलित करते हैं।

RTI के तहत तीसरे पक्ष के अधिकारों को समझना

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि RTI कानून सार्वजनिक और निजी तीसरे पक्षों के बीच भेदभाव नहीं करता है। ट्रस्ट, सोसायटी, सहकारी निकाय और निजी व्यक्ति सभी तीसरे पक्ष की सुरक्षा के हकदार हैं।

ऐसी संस्थाओं से संबंधित जानकारी का खुलासा अधिनियम के तहत निर्धारित उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना नहीं किया जा सकता है। इसमें खुलासे से पहले संबंधित तीसरे पक्ष को अनिवार्य नोटिस देना शामिल है।

पीठ ने ट्रस्टों द्वारा चलाए जा रहे स्कूलों या क्लबों जैसे उदाहरणों का उपयोग करके इसे समझाया। उनकी सार्वजनिक प्रकृति उनके वैधानिक गोपनीयता अधिकारों को समाप्त नहीं करती है।

कानूनी विवाद की पृष्ठभूमि

यह मामला गिरीश मित्तल द्वारा दायर एक RTI आवेदन से शुरू हुआ था। उन्होंने टैक्स छूट का दावा करने के लिए PM CARES फंड द्वारा जमा किए गए डॉक्यूमेंट्स को सार्वजनिक करने की मांग की थी।

केंद्रीय सूचना आयोग ने आयकर विभाग को जानकारी देने का निर्देश दिया था। हालांकि, इस निर्देश को बाद में दिल्ली हाई कोर्ट के एक सिंगल जज ने रद्द कर दिया था।

इसके बाद मित्तल ने डिवीजन बेंच के सामने अपील की, जिसके बाद यह फैसला आया। बेंच ने प्राइवेसी छूट को बरकरार रखा और CIC के निर्देश को पलट दिया।

पारदर्शिता कानून के लिए व्यापक प्रभाव

यह फैसला RTI व्यवस्था के एक मुख्य सिद्धांत को मजबूत करता है। पारदर्शिता को स्पष्ट रूप से परिभाषित कानूनी सीमाओं के भीतर काम करना चाहिए।

सिर्फ जनहित ही प्राइवेसी सुरक्षा को खत्म करने के लिए काफी नहीं है। एक स्पष्ट और ठोस जनहित साबित करना होगा।

स्टैटिक GK टिप: RTI एक्ट पूरी तरह से पारदर्शिता वाले फ्रेमवर्क के बजाय, छूट के साथ जानकारी देने वाले मॉडल का पालन करता है।

स्थिर उस्थादियन करंट अफेयर्स तालिका

विषय विवरण
समाचार में क्यों दिल्ली उच्च न्यायालय ने पीएम केयर्स फंड की गोपनीयता को सूचना का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत बरकरार रखा
न्यायालय दिल्ली उच्च न्यायालय
कानूनी प्रावधान सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 8(1)(ज)
मुख्य मुद्दा तृतीय-पक्ष की गोपनीयता का संरक्षण
अधिकार की प्रकृति वैधानिक अधिकार, संवैधानिक नहीं
वाद दायर करने वाले गिरीश मित्तल
पूर्व प्राधिकरण केंद्रीय सूचना आयोग
प्रमुख सिद्धांत सार्वजनिक कार्य करने से गोपनीयता समाप्त नहीं होती
PM CARES Fund and the Limits of RTI Disclosure
  1. दिल्ली हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया कि PM CARES फंड को RTI के तहत प्राइवेसी का अधिकार है।
  2. यह फैसला तब भी लागू होता है, जब PM CARES को पब्लिक अथॉरिटी माना जाए।
  3. इस फैसले में RTI एक्ट की धारा 8(1)(j) की व्याख्या की गई।
  4. धारा 8(1)(j) तीसरे पक्ष की जानकारी को खुलासे से बचाती है।
  5. प्राइवेसी के अधिकारों को कानूनी माना गया।
  6. सार्वजनिक काम करने से प्राइवेसी की सुरक्षा अपने आप खत्म नहीं हो जाती।
  7. PM CARES फंड को एक कानूनी इकाई के रूप में मान्यता दी गई।
  8. इस मामले की सुनवाई दिल्ली हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने की।
  9. चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय ने बेंच की अध्यक्षता की।
  10. RTI कानून सार्वजनिक और निजी तीसरे पक्षों के बीच कोई अंतर नहीं करता है।
  11. ट्रस्ट और सोसाइटियाँ प्राइवेसी की सुरक्षा का अधिकार रखती हैं।
  12. तीसरे पक्ष की जानकारी का खुलासा करने से पहले उचित प्रक्रिया का पालन आवश्यक है।
  13. गिरीश मित्तल ने मूल RTI आवेदन दायर किया था।
  14. उन्होंने टैक्स छूट के दस्तावेजों के खुलासे की मांग की थी।
  15. केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) ने पहले खुलासा करने का आदेश दिया था।
  16. हाई कोर्ट ने CIC के निर्देश को पलट दिया।
  17. प्राइवेसी को खत्म करने के लिए सार्वजनिक हित का होना बहुत ज़रूरी है।
  18. RTI छूट के साथ खुलासे के मॉडल का पालन करता है।
  19. धारा 8 में दस कानूनी छूटों के प्रावधान हैं।
  20. यह फैसला भारत में पारदर्शिता कानूनों की सीमाओं को स्पष्ट करता है।

Q1. किस न्यायालय ने यह निर्णय दिया कि पीएम केयर्स फंड को आरटीआई अधिनियम के तहत गोपनीयता संरक्षण प्राप्त है?


Q2. आरटीआई अधिनियम की किस धारा ने न्यायालय के तर्क का कानूनी आधार प्रदान किया?


Q3. निर्णय के अनुसार, पीएम केयर्स फंड किस कानूनी स्वरूप को बनाए रखता है?


Q4. पीएम केयर्स फंड से संबंधित दस्तावेज़ों के प्रकटीकरण हेतु आरटीआई आवेदन किसने दायर किया था?


Q5. सूचना का अधिकार अधिनियम किस प्रकार के पारदर्शिता मॉडल का अनुसरण करता है?


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