पूर्वी भारत में ऐतिहासिक विकास
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी पटना में परम रुद्र सुपरकंप्यूटर का लॉन्च भारत के हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग क्षेत्र में एक बड़ी प्रगति है। यह बिहार में पहली सुपरकंप्यूटर सुविधा है, जो राज्य को राष्ट्रीय वैज्ञानिक अनुसंधान मानचित्र पर लाती है। इसका उद्घाटन 27 दिसंबर, 2025 को हुआ, जो एक महत्वपूर्ण करंट अफेयर्स मील का पत्थर है।
यह सुविधा जटिल कंप्यूटेशनल कार्यों को स्थानीय स्तर पर करने में सक्षम बनाती है। इससे दूसरे राज्यों में स्थित सुपरकंप्यूटिंग केंद्रों पर निर्भरता कम होती है। यह पूर्वी भारत के संस्थानों के लिए अनुसंधान स्वायत्तता को भी बढ़ाता है।
उद्घाटन और संस्थागत महत्व
सुपरकंप्यूटर का उद्घाटन इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के अतिरिक्त सचिव अमितेश कुमार सिन्हा ने किया। इसके साथ, आईआईटी पटना बिहार का पहला शैक्षणिक या सरकारी संस्थान बन गया जिसने सुपरकंप्यूटिंग सिस्टम स्थापित किया है।
इस विकास से क्षेत्रीय अनुसंधान क्षमता को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। यह स्थानीय विद्वानों के लिए उन्नत कंप्यूटेशनल बुनियादी ढांचे तक पहुंच में भी सुधार करेगा।
स्टेटिक जीके तथ्य: आईआईटी पटना की स्थापना 2008 में हुई थी और यह पूर्वी भारत में तकनीकी शिक्षा का विस्तार करने के लिए स्थापित नए आईआईटी में से एक है।
नेशनल सुपरकंप्यूटिंग मिशन फ्रेमवर्क
परम रुद्र सिस्टम को नेशनल सुपरकंप्यूटिंग मिशन (NSM) के तहत तैनात किया गया है। इस मिशन का लक्ष्य भारत के कंप्यूटेशनल बुनियादी ढांचे को मजबूत करना और देश को हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग में आत्मनिर्भर बनाना है।
अब तक, पूरे भारत में 37 सुपरकंप्यूटर लगाए गए हैं जिनकी कुल क्षमता 39 पेटाफ्लॉप्स है। ये सिस्टम देश भर में 12,000 से अधिक शोधकर्ताओं का समर्थन करते हैं। अतिरिक्त 10 सुपरकंप्यूटर की योजना है, जो भारत की क्षमता को 100 पेटाफ्लॉप्स से ऊपर ले जाएंगे।
स्टेटिक जीके टिप: एक पेटाफ्लॉप्स प्रति सेकंड एक क्वाड्रिलियन फ्लोटिंग-पॉइंट ऑपरेशन के बराबर होता है।
शैक्षणिक और अनुसंधान प्रभाव
आईआईटी पटना के निदेशक टी एन सिंह के अनुसार, नई सुविधा से शैक्षणिक क्षेत्र में परिवर्तनकारी बदलाव आएंगे। उम्मीद है कि सुपरकंप्यूटर से लगभग 60 फैकल्टी सदस्यों और 10 विभागों के लगभग 400 छात्रों को फायदा होगा। सपोर्ट किए जाने वाले रिसर्च एरिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा साइंस, क्वांटम कंप्यूटिंग, कम्प्यूटेशनल एस्ट्रोबायोलॉजी, मटेरियल डिज़ाइन, फ्लूइड मैकेनिक्स, मॉलिक्यूलर इलेक्ट्रॉनिक्स और नैनो-बायो इंटरफेस शामिल हैं। इन डोमेन के लिए सिमुलेशन और डेटा-इंटेंसिव एनालिसिस के लिए बहुत ज़्यादा कंप्यूटिंग पावर की ज़रूरत होती है।
यह सिस्टम इंटरडिसिप्लिनरी रिसर्च को मज़बूत करता है और डॉक्टोरल और पोस्टडॉक्टोरल रिसर्च आउटपुट को बढ़ाता है।
स्वदेशी क्षमताओं को मज़बूत करना
नेशनल सुपरकंप्यूटिंग मिशन एक स्वदेशी इकोसिस्टम बनाने पर भी ध्यान केंद्रित करता है। इसमें भारत के भीतर HPC प्रोसेसर, सर्वर, इंटरकनेक्ट, कूलिंग सिस्टम और सॉफ्टवेयर स्टैक का विकास शामिल है।
IIT पटना में परम रुद्र इंस्टॉलेशन घरेलू इनोवेशन को सपोर्ट करके और इम्पोर्टेड कंप्यूटिंग टेक्नोलॉजी पर निर्भरता कम करके इस लक्ष्य में योगदान देता है।
स्टैटिक GK फैक्ट: MeitY वह नोडल मंत्रालय है जो एकेडमिक और रिसर्च संस्थानों के सहयोग से नेशनल सुपरकंप्यूटिंग मिशन को लागू करने के लिए ज़िम्मेदार है।
बिहार के लिए रणनीतिक महत्व
सुपरकंप्यूटर बिहार के रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर को काफी बढ़ाता है। यह राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं और उद्योगों के साथ सहयोग के नए अवसर खोलता है। यह राज्य के भीतर विश्व स्तरीय सुविधाएं प्रदान करके स्थानीय प्रतिभा को बनाए रखने में भी मदद करता है।
यह विकास एडवांस्ड टेक्नोलॉजी और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में आत्मनिर्भर भारत के लिए भारत के व्यापक प्रयास के अनुरूप है।
Static Usthadian Current Affairs Table
| विषय | विवरण |
| सुपरकंप्यूटर का नाम | परम रुद्र |
| स्थान | भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान पटना |
| राज्य | बिहार |
| लॉन्च तिथि | 27 दिसंबर 2025 |
| मिशन | राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन |
| नोडल मंत्रालय | इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय |
| गणनात्मक माप | पेटाFLOPS |
| शैक्षणिक लाभार्थी | 60 संकाय सदस्य एवं 400 विद्यार्थी |
| प्रमुख अनुसंधान क्षेत्र | कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डेटा साइंस, क्वांटम कंप्यूटिंग |
| राष्ट्रीय महत्व | स्वदेशी उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग (HPC) पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करता है |





