फ़रवरी 28, 2026 4:10 अपराह्न

किश्तवाड़ में ऑपरेशन त्राशी-I

करंट अफेयर्स: ऑपरेशन त्राशी-I, किश्तवाड़ जिला, आतंकवाद विरोधी अभियान, पैरा (स्पेशल फोर्सेज), जैश-ए-मोहम्मद, चिनाब घाटी, ड्रोन, UAV निगरानी, ​​कठुआ ठिकाने

Operation Trashi-I in Kishtwar

तेज सुरक्षा अभियान

जम्मू और कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में सुरक्षा बलों और आतंकवादियों के बीच ताजा गोलीबारी के बाद ऑपरेशन त्राशी-I एक निर्णायक चरण में पहुंच गया है। यह ऑपरेशन घने जंगल वाले इलाकों में कड़ाके की ठंड की स्थिति में छिपे आतंकवादियों को खत्म करने पर केंद्रित है।

भारी बर्फबारी और मुश्किल इलाके के बावजूद, सुरक्षा एजेंसियों ने उच्च तीव्रता वाले तलाशी अभियान जारी रखे हैं। सैनिक शून्य से नीचे के तापमान में काम कर रहे हैं, जो पहाड़ी आतंकवाद विरोधी माहौल में लगातार ऑपरेशनल तैयारी और लंबे समय तक तैनाती की क्षमता दिखा रहे हैं।

चतरू क्षेत्र में नई मुठभेड़

चतरू बेल्ट के जनसीर-कंडीवार जंगल क्षेत्र में एक नई गोलीबारी हुई। भारतीय सेना, पैरा (स्पेशल फोर्सेज) और जम्मू और कश्मीर पुलिस स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप की एक संयुक्त तलाशी टीम पर आतंकवादियों ने गोलीबारी की।

कुछ देर की गोलीबारी के बाद, दो से तीन आतंकवादी अंधेरे और जंगल का फायदा उठाकर भाग गए। इस घटना ने लगातार आतंकवादी मौजूदगी और विस्तारित क्षेत्र प्रभुत्व अभियानों की आवश्यकता की पुष्टि की।

ऑपरेशन त्राशी-I की समय-सीमा

यह ऑपरेशन 18 जनवरी, 2026 को आतंकवादी गतिविधि के बारे में विशिष्ट खुफिया जानकारी के आधार पर शुरू किया गया था। पहली बड़ी मुठभेड़ मंदराल-सिंहपोरा के सोनार गांव के पास हुई, जहां आठ सुरक्षाकर्मी घायल हुए और बाद में एक की मौत हो गई।

22 जनवरी और 24 जनवरी को और मुठभेड़ों की सूचना मिली। 24 जनवरी के ऑपरेशन में जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े एक पाकिस्तानी आतंकवादी को मार गिराया गया, जो सीमा पार आतंकवादी संबंधों को उजागर करता है।

ये बार-बार होने वाली मुठभेड़ें क्षेत्र के जंगली इलाकों में सक्रिय एक स्थायी आतंकवादी नेटवर्क का संकेत देती हैं।

इलाके की चुनौतियाँ और ऑपरेशनल रणनीति

सुरक्षा बल ऐसे इलाकों में काम कर रहे हैं जहां दो फीट से ज्यादा बर्फबारी हुई है, जिससे आवाजाही और दृश्यता सीमित हो गई है। इसके बावजूद, ऑपरेशन किश्तवाड़-सिंथन सड़क गलियारे के साथ-साथ फैल गए हैं, जिससे भागने के रास्ते सील हो गए हैं।

ड्रोन, UAV और स्निफर डॉग स्क्वाड जैसे आधुनिक निगरानी उपकरणों को तैनात किया जा रहा है। ये तकनीकें वास्तविक समय की ट्रैकिंग को बढ़ाती हैं और पहाड़ी और जंगली इलाकों में घुसपैठ के जोखिम को कम करती हैं।

स्टेटिक जीके तथ्य: चिनाब घाटी, जहां किश्तवाड़ स्थित है, पीर पंजाल और ग्रेटर हिमालय पर्वतमाला को जोड़ने वाला एक रणनीतिक गलियारा बनाती है।

कठुआ ऑपरेशन्स से लिंक

सुरक्षा एजेंसियों ने ऑपरेशन त्राशी-I को 16 जनवरी को कठुआ जिले में पहले की गई आतंकवाद विरोधी कार्रवाई से जोड़ा है, जहाँ तीन आतंकवादी ठिकानों को खत्म किया गया था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन ठिकानों से भागने वाले आतंकवादी किश्तवाड़ के जंगलों की ओर चले गए। बरामदगी में गोला-बारूद, खाने का सामान और लॉजिस्टिक्स सामग्री शामिल थी, जो लंबे समय तक ठिकाने की तैयारी का संकेत देती है।

उनके फोन में पाकिस्तानी मोबाइल नंबर मिलने के बाद कई संदिग्धों को हिरासत में लिया गया, जिससे सीमा पार ऑपरेशनल सपोर्ट के सबूत मजबूत हुए।

रणनीतिक महत्व

ऑपरेशन त्राशी-I भारत के लेयर्ड आतंकवाद विरोधी सिद्धांत को दिखाता है, जिसमें इंटेलिजेंस, एरिया डोमिनेशन, टेक्नोलॉजिकल सर्विलांस और इंटर-एजेंसी कोऑर्डिनेशन शामिल हैं।

पैरा (स्पेशल फोर्सेज) की भागीदारी हाई-रिस्क इलाके के ऑपरेशन्स और सटीक आतंकवाद विरोधी कार्रवाई के लिए एलीट यूनिट्स के इस्तेमाल को दिखाती है।

स्टेटिक GK टिप: जैश-ए-मोहम्मद एक पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन है जो भारतीय कानून के तहत बैन है और आतंकवाद विरोधी कानून के तहत लिस्टेड है।

यह ऑपरेशन भारत की विकसित हो रही पहाड़ी युद्ध और आतंकवाद विरोधी रणनीति को उजागर करता है, जहाँ इलाके पर दबदबा और टेक्नोलॉजिकल इंटीग्रेशन निर्णायक ऑपरेशनल टूल बनते जा रहे हैं।

स्थिर उस्थादियन समसामयिक मामले तालिका

विषय विवरण
ऑपरेशन का नाम ऑपरेशन त्राशी-I
स्थान किश्तवाड़ ज़िला, जम्मू और कश्मीर
भू-भाग क्षेत्र चेनाब घाटी का वन क्षेत्र
प्रारंभ तिथि 18 जनवरी 2026
शामिल सुरक्षा इकाइयाँ भारतीय सेना, पैरा (विशेष बल), जम्मू-कश्मीर पुलिस एसओजी
आतंकी समूह से संबंध जैश-ए-मोहम्मद
निगरानी उपकरण ड्रोन, यूएवी, स्निफ़र डॉग्स
संबद्ध ऑपरेशन कठुआ ठिकाना भंडाफोड़ (16 जनवरी 2026)
रणनीतिक गलियारा किश्तवाड़–सिंथन सड़क
आतंकवाद-रोधी मॉडल खुफिया-आधारित बहु-एजेंसी अभियान
Operation Trashi-I in Kishtwar
  1. Kishtwar district में ऑपरेशन त्राशी-I शुरू किया गया।
  2. ऑपरेशन का लक्ष्य जंगल वाले इलाकों में आतंकवादियों को निशाना बनाना है।
  3. यह ऑपरेशन कड़ाके की ठंड में चलाया गया
  4. सुरक्षा बलों मेंIndian Army और पैरा फोर्सेज शामिल हैं।
  5. ऑपरेशन 18 जनवरी 2026 को शुरू किया गया।
  6. यहJaish-e-Mohammed आतंकी नेटवर्क से जुड़ा है।
  7. जंगल के इलाकों में कई मुठभेड़ों की खबर है।
  8. आतंकवादी घने जंगलों को छिपने की जगह के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं।
  9. यह इलाका रणनीतिक चेनाब घाटी क्षेत्र में स्थित है।
  10. ऑपरेशन में ड्रोन और UAV सर्विलांस का इस्तेमाल किया जा रहा है।
  11. आवाजाही पर नज़र रखने के लिए स्निफर कुत्तों को तैनात किया गया है।
  12. किश्तवाड़सिंथन कॉरिडोर के साथ रास्ते सील कर दिए गए हैं।
  13. यह पहले के कठुआ आतंकी ठिकानों से जुड़ा है।
  14. खुफिया जानकारीआधारित आतंकवाद विरोधी रणनीति अपनाई गई है।
  15. ऑपरेशन में कई एजेंसियों के बीच तालमेल सुनिश्चित किया गया है।
  16. ज़्यादा जोखिम वाले मिशनों के लिए एलीट फोर्सेज का इस्तेमाल किया गया।
  17. इससे पहाड़ी युद्ध (Mountain Warfare) की तैयारी मज़बूत होती है।
  18. यह सीमा सुरक्षा ढांचे को बेहतर बनाता है।
  19. यह भारत के बहुस्तरीय आतंकवाद विरोधी सिद्धांत को दर्शाता है।
  20. यह राष्ट्रीय आंतरिक सुरक्षा ढांचे को मज़बूत करता है।

Q1. ऑपरेशन त्राशी-I किस ज़िले में संचालित किया जा रहा है?


Q2. ऑपरेशन त्राशी-I में कौन-सी विशिष्ट (एलीट) सेना शामिल है?


Q3. ऑपरेशन से कौन-सा आतंकवादी संगठन जुड़ा हुआ है?


Q4. निगरानी के लिए कौन-सी तकनीक का उपयोग किया जा रहा है?


Q5. ऑपरेशन त्राशी-I कब प्रारंभ किया गया था?


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