रिपोर्ट ओवरव्यू
नीति आयोग ने 13 फरवरी 2026 को “विकसित भारत और नेट ज़ीरो की ओर सिनेरियो: पावर सेक्टर” टाइटल वाली रिपोर्ट जारी की। यह करंट पॉलिसी सिनेरियो (CPS) और नेट ज़ीरो सिनेरियो (NZS) के तहत भारत के बिजली बदलाव का एनालिसिस करती है, जो 2070 तक नेट ज़ीरो एमिशन हासिल करने के भारत के कमिटमेंट के साथ अलाइन है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि 2020 में भारत के कुल ग्रीनहाउस गैस एमिशन में पावर सेक्टर का हिस्सा 39.4% था, जिससे यह सबसे ज़्यादा एमिटिंग करने वाला सेक्टर बन गया। इसलिए, क्लाइमेट टारगेट और इकोनॉमिक ग्रोथ हासिल करने के लिए बिजली जेनरेशन में बदलाव बहुत ज़रूरी है।
स्टेटिक GK फैक्ट: NITI आयोग 1 जनवरी 2015 को प्लानिंग कमीशन की जगह बनाया गया था और इसका हेडक्वार्टर नई दिल्ली में है।
बिजली की बढ़ती डिमांड
रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि 2070 तक बिजली एनर्जी का मुख्य ज़रिया बन जाएगी। CPS के तहत कुल एनर्जी खपत में इसकी हिस्सेदारी बढ़कर 40% और NZS के तहत 60% होने की उम्मीद है।
यह बढ़ोतरी ट्रांसपोर्ट, इंडस्ट्री और घरों के इलेक्ट्रिफिकेशन से होगी। इलेक्ट्रिक व्हीकल (EVs), इलेक्ट्रिक कुकिंग और ग्रीन हाइड्रोजन प्रोडक्शन जैसी टेक्नोलॉजी से बिजली की डिमांड काफी बढ़ जाएगी।
स्टेटिक GK टिप: चीन और यूनाइटेड स्टेट्स के बाद भारत दुनिया में बिजली का तीसरा सबसे बड़ा प्रोड्यूसर और कंज्यूमर है।
रिन्यूएबल एनर्जी में भारी बढ़ोतरी
भारत की इंस्टॉल्ड पावर कैपेसिटी 2070 तक 9 से 14 गुना बढ़ने का अनुमान है, जिसमें रिन्यूएबल एनर्जी कुल कैपेसिटी का 90–93% हिस्सा होगी। सोलर फोटोवोल्टिक (PV) और विंड एनर्जी इस बढ़ोतरी में सबसे आगे रहेंगी।
रूफटॉप सोलर और डीसेंट्रलाइज़्ड ग्रिड जैसे डिस्ट्रिब्यूटेड रिन्यूएबल सिस्टम एनर्जी एक्सेस को बेहतर बनाने और ट्रांसमिशन लॉस को कम करने में अहम भूमिका निभाएंगे। यह बदलाव फॉसिल फ्यूल पर निर्भरता कम करेगा और एनर्जी सिक्योरिटी को मज़बूत करेगा।
भारत पहले से ही रिन्यूएबल डिप्लॉयमेंट में टॉप देशों में शामिल है, जिसके नेशनल क्लाइमेट कमिटमेंट्स के तहत बड़े टारगेट हैं।
स्टोरेज और न्यूक्लियर एनर्जी की भूमिका
एक रिन्यूएबल-डोमिनेटेड ग्रिड को स्टेबिलिटी बनाए रखने के लिए मज़बूत स्टोरेज सपोर्ट की ज़रूरत होती है। रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि 2070 तक 3,000 GW बैटरी स्टोरेज कैपेसिटी और 160 GW पंप्ड हाइड्रो स्टोरेज की ज़रूरत होगी।
साथ ही, न्यूक्लियर पावर कैपेसिटी 8.8 GW से बढ़कर 300 GW से ज़्यादा हो जाएगी, जिससे भरोसेमंद और लगातार बिजली सप्लाई पक्की होगी। स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (SMRs) के आने से फ्लेक्सिबिलिटी और सेफ्टी बढ़ेगी।
स्टैटिक GK फैक्ट: भारत का पहला न्यूक्लियर पावर प्लांट 1969 में महाराष्ट्र के तारापुर में बनाया गया था।
पॉलिसी और इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार
रिपोर्ट में इलाकों में रिन्यूएबल पावर को अच्छे से ट्रांसमिट करने के लिए ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर को बढ़ाने की सलाह दी गई है। इसमें ग्रिड के डिजिटाइज़ेशन, DISCOM सुधारों को मज़बूत करने और पीयर–टू–पीयर बिजली ट्रेडिंग शुरू करने पर भी ज़ोर दिया गया है।
पॉलिसी सुधारों में कॉस्ट–रिफ्लेक्टिव टैरिफ़, रिन्यूएबल ज़िम्मेदारियाँ, और पावर मार्केट की एफिशिएंसी में सुधार शामिल है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग (AI/ML) के इस्तेमाल से डिमांड फोरकास्टिंग और ग्रिड मैनेजमेंट में सुधार होगा।
ग्रीन बॉन्ड, क्लाइमेट फाइनेंस और पब्लिक–प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) जैसे फाइनेंशियल उपाय इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट को सपोर्ट करने के लिए ज़रूरी होंगे।
विकसित भारत विज़न को सपोर्ट करना
यह रिपोर्ट पर्यावरण की सस्टेनेबिलिटी सुनिश्चित करते हुए विकसित भारत बनने के भारत के बड़े विज़न से मेल खाती है। साफ़ बिजली इंडस्ट्रियल ग्रोथ, टेक्नोलॉजिकल इनोवेशन और एनर्जी इंडिपेंडेंस को बढ़ावा देगी।
इस बदलाव से कार्बन एमिशन कम होगा, हवा की क्वालिटी बेहतर होगी और क्लाइमेट एक्शन में भारत की ग्लोबल लीडरशिप मज़बूत होगी।
स्टेटिक GK टिप: भारत ने 2021 में ग्लासगो में COP26 क्लाइमेट समिट में अपने नेट ज़ीरो टारगेट की घोषणा की।
स्टैटिक उस्थादियन करंट अफेयर्स तालिका
| विषय | विवरण |
| रिपोर्ट का नाम | विकसित भारत तथा शून्य उत्सर्जन ऊर्जा क्षेत्र की ओर परिदृश्य |
| जारी किया गया द्वारा | NITI Aayog |
| जारी तिथि | 13 फरवरी 2026 |
| शून्य उत्सर्जन लक्ष्य | भारत का लक्ष्य 2070 तक शून्य कार्बन उत्सर्जन |
| ऊर्जा क्षेत्र उत्सर्जन | 2020 में कुल ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन का 39.4% |
| विद्युत भागीदारी अनुमान | 2070 तक सीपीएस के अंतर्गत 40% तथा एनजेडएस के अंतर्गत 60% |
| नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता | 2070 तक कुल क्षमता का 90–93% |
| बैटरी भंडारण आवश्यकता | 2070 तक अनुमानित 3,000 गीगावॉट |
| परमाणु क्षमता विस्तार | 8.8 गीगावॉट से बढ़कर 300 गीगावॉट से अधिक |
| प्रमुख अवसंरचना | हरित ऊर्जा गलियारों तथा स्मार्ट ग्रिड प्रणालियों का विस्तार |





