भू–स्थानिक तकनीक को समझना
भू–स्थानिक तकनीक से तात्पर्य उन आधुनिक डिजिटल उपकरणों से है जिनका उपयोग पृथ्वी की सतह और भौगोलिक स्थानों से संबंधित जानकारी को इकट्ठा करने, उसका विश्लेषण करने और उसे विज़ुअलाइज़ करने के लिए किया जाता है। यह शासन, अवसंरचना नियोजन, कृषि, आपदा प्रबंधन और शहरी विकास में निर्णय लेने में सहायता के लिए स्थानिक डेटा को उन्नत मैपिंग प्रणालियों के साथ एकीकृत करती है।
यह तकनीक रिमोट सेंसिंग, भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS), ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (GPS) और LiDAR (लाइट डिटेक्शन एंड रेंजिंग) जैसे उपकरणों के माध्यम से काम करती है। ये प्रणालियाँ अत्यधिक विस्तृत मानचित्र और स्थानिक डेटासेट बनाने के लिए उपग्रह–आधारित या सेंसर–आधारित डेटा एकत्र करती हैं।
स्थैतिक GK तथ्य: GIS तकनीक 20वीं सदी के अंत में विश्व स्तर पर लोकप्रिय हुई, जिससे सरकारों को डिजिटल मैपिंग प्रणालियों के साथ भूमि संसाधनों, परिवहन नेटवर्क और पर्यावरण निगरानी का प्रबंधन करने में मदद मिली।
राष्ट्रीय भू–स्थानिक नीति 2022 का दृष्टिकोण
राष्ट्रीय भू–स्थानिक नीति 2022 का उद्देश्य भारत को भू–स्थानिक क्षेत्र में एक वैश्विक अग्रणी देश में बदलना है। यह स्थानिक डेटा तक खुली पहुँच को बढ़ावा देती है और मैपिंग, विश्लेषण तथा स्थान–आधारित सेवाओं में निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित करती है।
यह नीति भू–स्थानिक डेटा के लोकतंत्रीकरण पर ज़ोर देती है, जिससे सरकारी एजेंसियों, निजी फर्मों, शोधकर्ताओं और स्टार्ट–अप्स को कम प्रतिबंधों के साथ मैपिंग जानकारी तक पहुँचने की अनुमति मिलती है। यह दृष्टिकोण स्मार्ट शहरों, लॉजिस्टिक्स, जलवायु निगरानी और अवसंरचना विकास जैसे क्षेत्रों में नवाचार का समर्थन करता है।
प्रमुख विकास लक्ष्य
इस नीति का एक प्रमुख उद्देश्य पूरे भारत में एक उच्च–रिज़ॉल्यूशन वाली स्थलाकृतिक सर्वेक्षण और मैपिंग प्रणाली तैयार करना है। 2030 तक, देश का लक्ष्य पूरे क्षेत्र को कवर करने वाला एक डिजिटल एलिवेशन मॉडल (DEM) विकसित करना है, ताकि नियोजन और आपदा शमन के लिए सटीक भू–भाग डेटा उपलब्ध कराया जा सके।
एक अन्य लक्ष्य भू–स्थानिक ज्ञान अवसंरचना (GKI) का निर्माण करना है, जिसे एक एकीकृत डेटा और सूचना ढाँचे द्वारा समर्थित किया जाएगा। यह डिजिटल इकोसिस्टम विभिन्न सरकारी विभागों और हितधारकों को मानकीकृत भू–स्थानिक डेटासेट तक कुशलतापूर्वक पहुँचने की अनुमति देगा।
यह नीति अंतर्देशीय जल और गहरे समुद्र के क्षेत्रों के लिए उच्च–रिज़ोल्यूशन वाला बाथीमेट्रिक डेटा (गहराई संबंधी डेटा) तैयार करने का लक्ष्य भी रखती है। 2035 तक, भारत की योजना प्रमुख शहरी केंद्रों के लिए एक ‘नेशनल डिजिटल ट्विन‘ (National Digital Twin) विकसित करने की है, जिससे शहरों के इंफ्रास्ट्रक्चर का डिजिटल सिमुलेशन करके उसकी योजना बनाने और प्रबंधन में मदद मिलेगी।
स्टेटिक GK टिप: ‘बैथीमेट्री‘ (Bathymetry) का मतलब है महासागरों, झीलों और नदियों की पानी के नीचे की गहराई और बनावट (topography) का वैज्ञानिक माप करना।
संस्थागत और डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर
इस पूरे इकोसिस्टम को दिशा देने के लिए, यह नीति ‘जियोस्पेशियल डेटा प्रमोशन एंड डेवलपमेंट कमिटी‘ (GDPDC) को एक सर्वोच्च राष्ट्रीय संस्था के रूप में स्थापित करती है। यह संस्था समन्वय और नीति को लागू करने के लिए ज़िम्मेदार होगी।
यह नीति दो प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म बनाने को भी अनिवार्य बनाती है। ‘नेशनल जियोस्पेशियल डेटा रजिस्ट्री‘ (NGDR) जियोस्पेशियल डेटासेट के लिए एक केंद्रीय भंडार (central repository) के रूप में काम करेगी, जबकि ‘यूनिफाइड जियोस्पेशियल इंटरफेस‘ (UGI) अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर स्थानिक डेटा (spatial data) को बिना किसी रुकावट के साझा करने और जोड़ने में मदद करेगा।
इन प्रणालियों का उद्देश्य जियोस्पेशियल डेटासेट को मानकीकृत करना और स्थान–आधारित जानकारी तक आसान पहुँच सुनिश्चित करके नवाचार को बढ़ावा देना है।
जियोस्पेशियल विकास को समर्थन देने वाली सरकारी पहलें
भारत में जियोस्पेशियल इकोसिस्टम को मज़बूत करने के लिए कई पहलें शुरू की गई हैं। 2025-26 के दौरान शुरू किया गया ‘नेशनल जियोस्पेशियल मिशन‘ (NGM) बुनियादी जियोस्पेशियल इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने और स्थानिक डेटासेट को बेहतर बनाने पर केंद्रित है।
एक और पहल है ‘ऑपरेशन द्रोणागिरी‘ (Operation Dronagiri), जो एक पायलट प्रोजेक्ट है। यह शासन और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रबंधन में जियोस्पेशियल तकनीकों के व्यावहारिक उपयोगों को प्रदर्शित करता है।
‘सर्वे ऑफ इंडिया‘ द्वारा विकसित ‘कंटीन्यूअसली ऑपरेटिंग रेफरेंस स्टेशन्स‘ (CORS) नेटवर्क, बहुत सटीक स्थिति–निर्धारण डेटा प्रदान करता है, जो मैपिंग और सर्वेक्षण के लिए ज़रूरी है।
BISAG-N (भास्कराचार्य नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्पेस एप्लीकेशन्स एंड जियो–इन्फॉर्मेटिक्स) जैसी संस्थाएँ भी सरकारी परियोजनाओं और विकास योजनाओं के लिए GIS-आधारित समाधानों को लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
स्टेटिक GK तथ्य: 1767 में स्थापित ‘सर्वे ऑफ इंडिया‘, भारत सरकार का सबसे पुराना वैज्ञानिक विभाग है और यह राष्ट्रीय सर्वेक्षण और मैपिंग के लिए ज़िम्मेदार है।
Static Usthadian Current Affairs Table
| Topic | Detail |
| नीति | राष्ट्रीय भू-स्थानिक नीति 2022 |
| उद्देश्य | भारत को भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी में वैश्विक नेता बनाना |
| प्रमुख लक्ष्य | 2030 तक पूरे भारत के लिए डिजिटल एलिवेशन मॉडल तैयार करना |
| संस्थागत निकाय | जियोस्पेशियल डेटा प्रमोशन एंड डेवलपमेंट कमेटी |
| डेटा अवसंरचना | नेशनल जियोस्पेशियल डेटा रजिस्ट्री और यूनिफाइड जियोस्पेशियल इंटरफेस |
| प्रमुख पहल | नेशनल जियोस्पेशियल मिशन 2025–26 |
| पायलट परियोजना | ऑपरेशन द्रोणागिरी |
| प्रमुख मैपिंग नेटवर्क | कंटीन्युअसली ऑपरेटिंग रेफरेंस स्टेशन्स |
| सहयोगी संस्थान | भास्कराचार्य राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुप्रयोग एवं भू-सूचना विज्ञान संस्थान (BISAG-N) |





