पासपोर्ट वेरिफिकेशन में डिजिटल बदलाव
MEITY और MEA के बीच कोलेबोरेशन भारत में पासपोर्ट सर्विसेज़ को मॉडर्न बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। नया सिस्टम DigiLocker के ज़रिए पेपरलेस पासपोर्ट वेरिफिकेशन को मुमकिन बनाता है, जिससे नागरिक अपने पासपोर्ट वेरिफिकेशन रिकॉर्ड्स (PVRs) को आसानी से एक्सेस और शेयर कर सकते हैं। यह पहल भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को मज़बूत करती है और एडमिनिस्ट्रेटिव एफिशिएंसी को बढ़ाती है।
DigiLocker-PVR इंटीग्रेशन के फीचर्स
यह इंटीग्रेशन नागरिकों को ऑफिशियल आइडेंटिटी रिकॉर्ड्स को स्टोर करने और रिट्रीव करने के लिए एक सिंगल प्लेटफॉर्म देता है। फिजिकल डॉक्यूमेंट्स पर डिपेंडेंस हटाकर, सिस्टम वेरिफिकेशन में देरी को कम करता है और डॉक्यूमेंट लॉस को रोकता है। यह पासपोर्ट एप्लीकेशन और बैकग्राउंड चेक के दौरान तेज़ी से क्लियरेंस भी पक्का करता है।
स्टेटिक GK फैक्ट: DigiLocker को 2015 में डिजिटल इंडिया प्रोग्राम के तहत पेपरलेस गवर्नेंस को बढ़ावा देने के लिए लॉन्च किया गया था। सुरक्षित और भरोसेमंद एक्सेस
डिजिटल तरीके से जारी किए गए PVR क्रिप्टोग्राफ़िक सिक्योरिटी के साथ आते हैं, जिससे यह पक्का होता है कि रिकॉर्ड असली और छेड़छाड़-मुक्त रहें। इससे नागरिकों और सरकारी अधिकारियों, दोनों के लिए डिजिटल डॉक्यूमेंट्स पर भरोसा बढ़ता है। यह प्लेटफ़ॉर्म आधार-लिंक्ड ऑथेंटिकेशन का भी इस्तेमाल करता है, जिससे एक एक्स्ट्रा सिक्योरिटी लेयर जुड़ जाती है।
स्टैटिक GK टिप: विदेश मंत्रालय सेंट्रल पासपोर्ट ऑर्गनाइज़ेशन के ज़रिए भारतीय पासपोर्ट जारी करने का काम मैनेज करता है।
कॉन्टैक्टलेस और कुशल प्रोसेसिंग
यह सिस्टम कॉन्टैक्टलेस वर्कफ़्लो को सपोर्ट करता है, जिससे पासपोर्ट ऑफिस में फिजिकल विज़िट की ज़रूरत कम हो जाती है। यह ई-गवर्नेंस को बढ़ाने और सुरक्षित, डिजिटल पब्लिक सर्विस को बढ़ावा देने के भारत के बड़े प्रयासों में अच्छी तरह से फिट बैठता है। तेज़ वेरिफिकेशन का मतलब पासपोर्ट जारी करना भी तेज़ है, जिससे राज्यों और ज़िलों के एप्लिकेंट को फ़ायदा होता है।
ऑफिशियल वेरिफिकेशन डॉक्यूमेंट्स का सेंट्रलाइज़्ड स्टोरेज
PVR को DigiLocker के “जारी किए गए डॉक्यूमेंट्स” सेक्शन में रखकर, सरकार नागरिकों को ज़रूरी पहचान फ़ाइलों के लिए एक यूनिफाइड रिपॉजिटरी देती है। इसमें आधार, PAN, ड्राइविंग लाइसेंस और एजुकेशनल सर्टिफिकेट शामिल हैं।
स्टैटिक GK फैक्ट: DigiLocker यूज़र्स को ज़रूरी डिजिटल डॉक्यूमेंट्स को सुरक्षित रूप से स्टोर करने के लिए 1GB तक स्टोरेज स्पेस देता है।
डिजिटल इंडिया विज़न को सपोर्ट
यह पहल ट्रांसपेरेंट और टेक्नोलॉजी-ड्रिवन गवर्नेंस को बढ़ावा देने के भारत के मिशन को मज़बूत करती है। यह ब्यूरोक्रेटिक लेयर्स को कम करता है, प्रोसेसिंग टाइम कम करता है, और सस्टेनेबल, पेपरलेस प्रैक्टिस को सपोर्ट करता है। यह कदम भारत को डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और सिटिज़न सर्विस इनोवेशन में ग्लोबल लीडर के तौर पर भी स्थापित करता है।
स्टैटिक GK फैक्ट: आधार, UPI और DigiLocker जैसे प्लेटफॉर्म की वजह से भारत डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर में टॉप देशों में से एक है।
सिस्टम कैसे काम करता है
पासपोर्ट वेरिफिकेशन रिकॉर्ड बनने के बाद, यह ऑटोमैटिक रूप से सिटिज़न के DigiLocker अकाउंट से सिंक हो जाता है। यूज़र्स बस “इश्यूड डॉक्यूमेंट्स” में रिकॉर्ड एक्सेस करते हैं, इसे डाउनलोड करते हैं, या ऑथराइज़्ड एजेंसियों के साथ डिजिटली शेयर करते हैं। इससे मैन्युअल सबमिशन या फोटोकॉपी की ज़रूरत खत्म हो जाती है, जिससे एक आसान वेरिफिकेशन एक्सपीरियंस सुनिश्चित होता है।
Static Usthadian Current Affairs Table
| Topic | Detail |
| MEITY–MEA सहयोग | पेपरलेस पासपोर्ट वेरिफिकेशन का संयुक्त लॉन्च |
| उपयोग किया गया प्लेटफ़ॉर्म | डिजिटल डॉक्यूमेंट वॉलेट — DigiLocker |
| प्रमुख दस्तावेज़ | पासपोर्ट वेरिफिकेशन रिकॉर्ड (PVR) |
| सत्यापन प्रकृति | सुरक्षित, छेड़छाड़-रोधी, डिजिटल रूप से सत्यापनीय |
| नागरिक लाभ | तेज़ और संपर्करहित प्रोसेसिंग |
| केंद्रीय संग्रहण | PVR को Issued Documents सेक्शन में जोड़ा गया |
| शासन प्रभाव | कागजी कार्यवाही और मैनुअल सबमिशन में कमी |
| डिजिटल इंडिया लिंक | राष्ट्रीय डिजिटल शासन मिशन को सुदृढ़ करता है |
| सुरक्षा सुविधा | आधार-आधारित प्रमाणीकरण समर्थन |
| परिणाम | पासपोर्ट सेवा वितरण में दक्षता में सुधार |





