फ़रवरी 18, 2026 12:06 पूर्वाह्न

मद्रास हाई कोर्ट ने AI असिस्टेड सुपरलॉ कोर्ट्स सिस्टम शुरू किया

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Madras High Court Introduces AI Assisted Superlaw Courts System

ज्यूडिशियल कामकाज में AI को अपनाना

मद्रास हाई कोर्ट ने सुपरलॉ कोर्ट्स नाम का एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंसअसिस्टेड सिस्टम शुरू किया है, जो भारत के ज्यूडिशियल सिस्टम में एक बड़ा टेक्नोलॉजिकल रिफॉर्म है। यह सिस्टम जजों और लीगल प्रोफेशनल्स को बड़ी मात्रा में केस रिकॉर्ड को अच्छे से मैनेज करने में मदद करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसका मकसद ज्यूडिशियल कार्रवाई की स्पीड और एफिशिएंसी में सुधार करना है।

यह पहल कोर्ट्स के डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन की दिशा में भारत के बड़े कदम को सपोर्ट करती है। यह मैनुअल डॉक्यूमेंट एनालिसिस से होने वाली देरी को कम करने में मदद करता है। यह कदम जस्टिस डिलीवरी सिस्टम को मजबूत करने में टेक्नोलॉजी की बढ़ती भूमिका को दिखाता है।

स्टेटिक GK फैक्ट: मद्रास हाई कोर्ट, जो 1862 में बना था, बॉम्बे और कलकत्ता हाई कोर्ट्स के साथ भारत के तीन सबसे पुराने हाई कोर्ट्स में से एक है।

सुपरलॉ कोर्ट्स की भूमिका और काम करने का तरीका

सुपरलॉ कोर्ट्स सिस्टम एक इंटेलिजेंट रिकॉर्ड असिस्टेंट की तरह काम करता है, जो यूज़र्स को केस डॉक्यूमेंट्स में ज़रूरी जानकारी ढूंढने और ऑर्गनाइज़ करने में मदद करता है। यह एक सुरक्षित डिजिटल वर्कस्पेस बनाता है, जो एक सीलबंद ज्यूडिशियल रिकॉर्ड रूम जैसा होता है। यह केस मटीरियल तक कॉन्फिडेंशियलिटी और कंट्रोल्ड एक्सेस पक्का करता है।

यह सिस्टम अपलोड किए गए डॉक्यूमेंट्स को प्रोसेस करता है और स्कैन की गई फ़ाइलों को ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकग्निशन (OCR) टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके सर्च किए जा सकने वाले टेक्स्ट में बदलता है। इससे खास जानकारी जल्दी मिल जाती है। यह मैनुअल सर्चिंग और क्रॉसरेफरेंसिंग में लगने वाले समय को काफी कम कर देता है।

खास बात यह है कि यह सिस्टम दिए गए डॉक्यूमेंट्स के अंदर ही काम करता है। यह बाहरी डेटाबेस, इंटरनेट सोर्स या जनरल नॉलेज को एक्सेस नहीं करता है।

स्टैटिक GK टिप: OCR टेक्नोलॉजी स्कैन की गई इमेज को एडिटेबल और सर्च किए जा सकने वाले टेक्स्ट में बदलती है, जिसका इस्तेमाल डिजिटल गवर्नेंस और बैंकिंग सिस्टम में बड़े पैमाने पर किया जाता है।

ज्यूडिशियल इंटेग्रिटी और ह्यूमन कंट्रोल पक्का करना

सुपरलॉ कोर्ट्स सिस्टम जजों या वकीलों की जगह नहीं लेता है। इसका काम सिर्फ़ ज़रूरी हिस्सों को साफ़ भाषा में निकालने और समराइज़ करने तक ही सीमित है। यह कानूनी फ़ैसले नहीं लेता, अलग से कानूनों का मतलब नहीं बताता, या नए फैक्ट्स नहीं बताता। अगर अपलोड किए गए रिकॉर्ड में ज़रूरी जानकारी नहीं मिलती है, तो सिस्टम साफ़-साफ़ बताता है कि जानकारी नहीं मिली है। इससे गलत या बिना सबूत वाले नतीजों से बचा जा सकता है। यह सिस्टम स्टैंडर्ड न्यायिक प्रक्रियाओं की तरह ही कड़े कंट्रोल में काम करता है।

इससे यह पक्का होता है कि न्यायिक तर्क, फ़ैसले लेना और प्रोफ़ेशनल फ़ैसले पूरी तरह से इंसानी अथॉरिटी के तहत रहें। यह टेक्नोलॉजी न्यायिक आज़ादी में दखल दिए बिना सिर्फ़ एफिशिएंसी बढ़ाती है।

भारत में न्यायिक सुधारों का महत्व

भारत न्यायिक बैकलॉग की एक बड़ी चुनौती का सामना कर रहा है, जहाँ अदालतों में लाखों केस पेंडिंग हैं। सुपरलॉ कोर्ट्स जैसे AI-बेस्ड सिस्टम केस प्रोसेसिंग को तेज़ करने और कोर्ट की प्रोडक्टिविटी को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं। यह भारत सरकार द्वारा कोर्ट प्रोसेस को डिजिटाइज़ करने के लिए शुरू किए गए कोर्ट्स मिशन मोड प्रोजेक्ट के मकसद से मेल खाता है।

यह सिस्टम जजों और कानूनी प्रोफ़ेशनल्स का कीमती समय और एनर्जी बचाने में मदद करता है। यह डॉक्यूमेंट हैंडलिंग में एक्यूरेसी और ट्रांसपेरेंसी को भी बेहतर बनाता है।

स्टैटिक GK फ़ैक्ट: नई दिल्ली में मौजूद भारत का सुप्रीम कोर्ट, सबसे ऊँची न्यायिक अथॉरिटी है और इसे 1950 में संविधान के आर्टिकल 124 के तहत बनाया गया था।

AI-असिस्टेड सुपरलॉ कोर्ट्स की शुरुआत भारत की ज्यूडिशियरी को मॉडर्न बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह ज्यूडिशियल अकाउंटेबिलिटी और इंसानी फैसले लेने को बनाए रखते हुए एफिशिएंसी को मजबूत करता है।

स्टैटिक उस्थादियन करंट अफेयर्स तालिका

विषय विवरण
प्रारंभ की गई प्रणाली सुपरला न्यायालय कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रणाली
संस्थान मद्रास उच्च न्यायालय
उद्देश्य दस्तावेज़ खोज और वाद प्रबंधन में सहायता
प्रयुक्त प्रौद्योगिकी कृत्रिम बुद्धिमत्ता तथा प्रकाशीय अक्षर पहचान
प्रमुख कार्य वाद संबंधी दस्तावेज़ों की जानकारी प्राप्त करना और सार प्रस्तुत करना
सीमा विधिक तर्क या निर्णय नहीं करता
डाटा अभिगम केवल अपलोड किए गए वाद दस्तावेज़ों पर कार्य
न्यायिक लाभ मामलों के शीघ्र निपटान और दक्षता में सुधार
संबंधित पहल ई-न्यायालय मिशन मोड परियोजना
मद्रास उच्च न्यायालय स्थापना वर्ष 1862
Madras High Court Introduces AI Assisted Superlaw Courts System
  1. मद्रास हाई कोर्ट ने हाल ही में AI-असिस्टेड सुपरलॉ कोर्ट्स ज्यूडिशियल सिस्टम शुरू किया है।
  2. यह सिस्टम पूरे देश में केस मैनेजमेंट और ज्यूडिशियल एफिशिएंसी में काफी सुधार करता है।
  3. मद्रास हाई कोर्ट 1862 में ब्रिटिश कॉलोनियल पीरियड के दौरान बना था।
  4. यह सिस्टम जजों को बड़ी मात्रा में केस डॉक्यूमेंट्स को प्रभावी ढंग से संभालने में मदद करता है।
  5. सुपरलॉ कोर्ट्स कॉन्फिडेंशियल ज्यूडिशियल रिकॉर्ड के लिए सुरक्षित डिजिटल वर्कस्पेस बनाते हैं।
  6. यह सिस्टम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकग्निशन (OCR) टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करता है।
  7. OCR टेक्नोलॉजी स्कैन किए गए डॉक्यूमेंट्स को सर्च किए जा सकने वाले डिजिटल टेक्स्ट फॉर्मेट में बदलती है।
  8. यह सिस्टम ज़रूरी कानूनी जानकारी को जल्दी और सटीक रूप से निकालने में मदद करता है।
  9. सुपरलॉ कोर्ट्स बिना किसी बाहरी एक्सेस के सिर्फ अपलोड किए गए केस डॉक्यूमेंट्स पर काम करते हैं।
  10. यह सिस्टम कानूनी रीजनिंग या इंडिपेंडेंट ज्यूडिशियल फैसले नहीं लेता है।
  11. जजों के पास ज्यूडिशियल रीजनिंग और अंतिम कानूनी फैसलों पर पूरा अधिकार होता है।
  12. AI की मदद से देश भर में न्यायिक बैकलॉग और केस निपटाने में देरी कम करने में सहायता मिलती है।
  13. भारत में देश भर के अलग-अलग न्यायिक कोर्ट में लाखों केस पेंडिंग हैं।
  14. यह पहल कोर्ट्स मिशन मोड प्रोजेक्ट के डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन प्रोग्राम को सपोर्ट करती है।
  15. यह सिस्टम न्यायिक डॉक्यूमेंट मैनेजमेंट प्रोसेस में एक्यूरेसी और ट्रांसपेरेंसी को बेहतर बनाता है।
  16. AI न्यायिक स्वतंत्रता और संवैधानिक अथॉरिटी सेफगार्ड को प्रभावित किए बिना एफिशिएंसी को बढ़ाता है।
  17. आर्टिकल 124 के तहत बना सुप्रीम कोर्ट भारत का सबसे बड़ा कोर्ट है।
  18. AI को अपनाना न्यायिक इंफ्रास्ट्रक्चर और गवर्नेंस सिस्टम को मॉडर्न बनाने के भारत के कमिटमेंट को दर्शाता है।
  19. टेक्नोलॉजी इंटीग्रेशन से देश भर में जस्टिस डिलीवरी सिस्टम की एफिशिएंसी और एक्सेसिबिलिटी मजबूत होती है।
  20. सुपरलॉ कोर्ट भारत के डिजिटल ज्यूडिशियरी रिफॉर्म इनिशिएटिव में बड़ी तरक्की दिखाते हैं।

Q1. सुपरला कोर्ट्स एआई प्रणाली किस उच्च न्यायालय ने शुरू की?


Q2. स्कैन किए गए दस्तावेज़ों को खोजयोग्य पाठ में बदलने के लिए कौन-सी तकनीक का उपयोग किया जाता है?


Q3. सुपरला कोर्ट्स का मुख्य कार्य क्या है?


Q4. मद्रास उच्च न्यायालय की स्थापना किस वर्ष हुई थी?


Q5. सुपरला कोर्ट्स किस सरकारी पहल का समर्थन करता है?


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