LIGO क्या है
LIGO (लेज़र इंटरफेरोमीटर ग्रेविटेशनल वेव ऑब्ज़र्वेटरी) एक एडवांस्ड वैज्ञानिक सुविधा है, जिसे ग्रेविटेशनल वेव्स का पता लगाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। ये वेव्स स्पेस-टाइम में बनने वाली बेहद सूक्ष्म लहरें हैं, जो ब्लैक होल के विलय या न्यूट्रॉन स्टार्स की टक्कर जैसी विशाल कॉस्मिक घटनाओं से उत्पन्न होती हैं।
1916 में अल्बर्ट आइंस्टीन ने अपनी जनरल थ्योरी ऑफ रिलेटिविटी में इन वेव्स की भविष्यवाणी की थी। ये वेव्स प्रकाश की गति से चलती हैं और ब्रह्मांड की उत्पत्ति तथा गुरुत्वाकर्षण की प्रकृति के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी देती हैं।
स्टैटिक GK फैक्ट: जनरल थ्योरी ऑफ रिलेटिविटी 1915 में प्रकाशित हुई थी और इसने आधुनिक भौतिकी में क्रांतिकारी बदलाव किया।
LIGO कैसे काम करता है
LIGO लेज़र इंटरफेरोमेट्री के सिद्धांत पर आधारित है। इसमें L-आकार की दो भुजाएँ होती हैं, प्रत्येक लगभग 4 किलोमीटर लंबी।
एक लेज़र बीम को दो हिस्सों में बाँटकर वैक्यूम टनल में भेजा जाता है। ये बीम दर्पणों से टकराकर वापस आती हैं और मिलकर एक इंटरफेरेंस पैटर्न बनाती हैं।
जब कोई ग्रेविटेशनल वेव गुजरती है, तो वह स्पेस-टाइम में सूक्ष्म खिंचाव या सिकुड़न पैदा करती है, जिससे इंटरफेरेंस पैटर्न में बदलाव होता है। यह बदलाव प्रोटॉन के व्यास से भी छोटा हो सकता है, जो इस उपकरण की अत्यधिक संवेदनशीलता को दर्शाता है।
स्टैटिक GK टिप: ग्रेविटेशनल वेव का पहला प्रत्यक्ष पता 2015 में LIGO-USA द्वारा लगाया गया था।
LIGO-India प्रोजेक्ट
LIGO-India को भारत सरकार ने 2016 में मंजूरी दी। इसे महाराष्ट्र के हिंगोली ज़िले के औंधा में स्थापित किया जा रहा है।
इस परियोजना का निर्माण कार्य लार्सन एंड टूब्रो (L&T) को सौंपा गया है। यह प्रोजेक्ट परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) और विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) द्वारा संयुक्त रूप से विकसित किया जा रहा है।
यह परियोजना अमेरिका की नेशनल साइंस फ़ाउंडेशन (NSF) के साथ एक समझौते के तहत कार्य करती है।
इसमें शामिल प्रमुख भारतीय संस्थान हैं:
• इंटर–यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिज़िक्स (IUCAA), पुणे
• इंस्टिट्यूट ऑफ प्लाज़्मा रिसर्च (IPR), गांधीनगर
• राजा रमन्ना सेंटर फॉर एडवांस्ड टेक्नोलॉजी (RRCAT), इंदौर
स्टैटिक GK फैक्ट: परमाणु ऊर्जा विभाग सीधे भारत के प्रधानमंत्री के अधीन कार्य करता है।
ग्लोबल नेटवर्क का हिस्सा
LIGO-India वैश्विक ग्रेविटेशनल वेव नेटवर्क का हिस्सा बनेगा। अन्य प्रमुख वेधशालाओं में शामिल हैं:
- LIGO (USA)
• VIRGO (इटली)
• KAGRA (जापान)
2015 में LIGO-USA द्वारा पहली ग्रेविटेशनल वेव डिटेक्शन ने लगभग एक सदी बाद आइंस्टीन की भविष्यवाणी को प्रमाणित किया।
स्टैटिक GK टिप: VIRGO इटली में पीसा के पास स्थित है, जबकि KAGRA जापान में भूमिगत बनाया गया है।
भारत के लिए महत्व
LIGO-India भारत को ग्रेविटेशनल वेव एस्ट्रोनॉमी और एडवांस्ड फिजिक्स में अग्रणी देशों की श्रेणी में स्थापित करेगा।
यह परियोजना हाई-एंड टेक्नोलॉजी, प्रिसिजन इंजीनियरिंग और वैक्यूम सिस्टम विशेषज्ञता को बढ़ावा देगी।
इसके माध्यम से भारत की वैज्ञानिक कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा मजबूत होगी। साथ ही यह युवा वैज्ञानिकों को ऑप्टिक्स, डेटा साइंस और क्वांटम मापन तकनीक जैसे क्षेत्रों में अवसर प्रदान करेगी।
LIGO-India भारत के लिए फ्रंटियर साइंस में एक ऐतिहासिक और रणनीतिक कदम है।
Static Usthadian Current Affairs Table
| विषय | विवरण |
| परियोजना का नाम | लाइगो-इंडिया |
| स्थान | औंढा, हिंगोली ज़िला, महाराष्ट्र |
| स्वीकृति वर्ष | 2016 |
| कार्यान्वयन एजेंसियाँ | परमाणु ऊर्जा विभाग तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग |
| अंतरराष्ट्रीय साझेदार | नेशनल साइंस फाउंडेशन, अमेरिका |
| निर्माण साझेदार | लार्सन एंड टुब्रो |
| वैज्ञानिक उद्देश्य | गुरुत्वाकर्षण तरंगों का पता लगाना |
| वैश्विक वेधशालाएँ | लाइगो (अमेरिका), विर्गो (इटली), काग्रा (जापान) |
| गुरुत्वाकर्षण तरंगों की पहली खोज | 2015 |
| सैद्धांतिक पूर्वानुमान | अल्बर्ट आइंस्टीन, 1916 |





