कमेटी का बैकग्राउंड
यूनियन–स्टेट रिलेशन पर जस्टिस कुरियन जोसेफ कमेटी ने अपनी रिपोर्ट का पार्ट I तमिलनाडु सरकार को सौंप दिया है। यह कमेटी 2025 में भारत के संविधान के तहत केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के बीच पावर के बैलेंस की जांच करने के लिए बनाई गई थी।
कमेटी के चेयरमैन जस्टिस कुरियन जोसेफ हैं, जो भारत के सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज हैं। इसका मुख्य मकसद मौजूदा फेडरल अरेंजमेंट को एनालाइज़ करना और ऐसे रिफॉर्म्स रिकमेंड करना है जो कॉन्स्टिट्यूशनल इंटीग्रिटी को बनाए रखते हुए कोऑपरेटिव फेडरलिज़्म को मज़बूत करें।
स्टैटिक GK फैक्ट: जस्टिस कुरियन जोसेफ 2013 से 2018 तक भारत के सुप्रीम कोर्ट के जज रहे और उन्हें कई ज़रूरी कॉन्स्टिट्यूशनल फैसलों के लिए जाना जाता था।
पहली रिपोर्ट की मुख्य थीम
रिपोर्ट का पहला हिस्सा कई मुख्य एरिया की जांच करता है जो भारत के फेडरल सिस्टम के कामकाज पर असर डालते हैं। इनमें डीसेंट्रलाइज़ेशन, राज्य की ऑटोनॉमी, कॉन्स्टिट्यूशनल अमेंडमेंट और राज्यों की टेरिटोरियल इंटीग्रिटी शामिल हैं।
कमेटी ने गवर्नर की भूमिका का भी एनालिसिस किया, जिस पर भारतीय राजनीति में अक्सर बहस होती रही है। गवर्नर राज्य के कॉन्स्टिट्यूशनल हेड के तौर पर काम करते हैं, लेकिन उनकी डिस्क्रिशनरी शक्तियों की सीमा को लेकर विवाद सामने आए हैं।
रिपोर्ट में शामिल एक और ज़रूरी टॉपिक डिलिमिटेशन है, जिसका मतलब है आबादी में बदलाव के आधार पर चुनावी इलाकों को फिर से बनाने का प्रोसेस। इस मुद्दे पर इसलिए ध्यान गया है क्योंकि भविष्य में डिलिमिटेशन की प्रक्रिया संसद में राज्यों के रिप्रेजेंटेशन पर काफी असर डाल सकती है।
स्टैटिक GK टिप: भारत in डिलिमिटेशन एक डिलिमिटेशन कमीशन करता है, जिसके फैसलों को कोर्ट में चैलेंज नहीं किया जा सकता।
कोऑपरेटिव फेडरलिज्म को मजबूत करना
कमेटी यूनियन और राज्यों के बीच एक बैलेंस्ड रिश्ता फिर से बनाने की ज़रूरत पर ज़ोर देती है। भारत एक क्वासी–फेडरल स्ट्रक्चर को फॉलो करता है, जहाँ संविधान के तहत यूनियन लिस्ट, स्टेट लिस्ट और कॉन्करेंट लिस्ट के ज़रिए केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों का बँटवारा किया जाता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, अच्छे गवर्नेंस के लिए मज़बूत इंस्टीट्यूशनल कोऑपरेशन ज़रूरी है। यह सरकार के अलग-अलग लेवल के बीच टकराव से बचने के लिए बातचीत, आपसी सम्मान और संवैधानिक स्पष्टता के महत्व पर ज़ोर देता है।
इन सिफारिशों का मकसद राष्ट्रीय एकता और संवैधानिक स्थिरता बनाए रखते हुए एडमिनिस्ट्रेटिव डीसेंट्रलाइज़ेशन को बढ़ाना है। इस तरीके का मकसद एक ऐसा सिस्टम बनाना है जहाँ केंद्र और राज्य दोनों शासन में पार्टनर के तौर पर काम करें।
स्टैटिक GK फैक्ट: भारतीय संविधान का सातवां शेड्यूल कानूनी विषयों को तीन लिस्ट में बांटता है, जो केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों के बंटवारे को बताता है।
रिपोर्ट के आगे के हिस्से
कमेटी ने तीन हिस्सों वाली रिपोर्ट का स्ट्रक्चर प्लान किया है। जबकि पार्ट I पहले ही जमा कर दिया गया है, दो और हिस्से अभी तैयार किए जा रहे हैं।
आने वाले हर सेक्शन में दस चैप्टर होंगे और शायद केंद्र–राज्य संबंधों पर असर डालने वाले फेडरल शासन, एडमिनिस्ट्रेटिव सुधारों और संवैधानिक प्रावधानों का गहरा एनालिसिस देंगे।
इन रिपोर्टों से आने वाले दशकों में भारत के फेडरल सिस्टम को कैसे विकसित होना चाहिए, इस पर बड़ी राष्ट्रीय बहस में योगदान मिलने की उम्मीद है।
फेडरल रिव्यू का ऐतिहासिक संदर्भ
जस्टिस कुरियन जोसेफ कमेटी भारत में केंद्र–राज्य संबंधों का चौथा बड़ा रिव्यू है। इससे पहले राजमन्नार कमेटी, सरकारिया कमीशन और पुंछी कमीशन ने कोशिशें की थीं।
ये बॉडीज़ सेंटर और स्टेट्स के बीच तनाव को दूर करने और फेडरल स्ट्रक्चर में सुधार की सलाह देने के लिए बनाई गई थीं।
स्टैटिक GK फैक्ट: सरकारिया कमीशन (1983) को सेंटर–स्टेट रिलेशन की जांच करने के लिए बनाया गया था, और इसकी सिफारिशें आज भी इंडियन फेडरल गवर्नेंस पर असर डालती हैं।
Static Usthadian Current Affairs Table
| विषय | विवरण |
| समिति का नाम | जस्टिस कुरियन जोसेफ समिति (केंद्र–राज्य संबंधों पर) |
| गठन वर्ष | 2025 |
| अध्यक्ष | कुरियन जोसेफ, सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश |
| प्रस्तुत रिपोर्ट | भाग I तमिलनाडु सरकार को प्रस्तुत |
| प्रमुख मुद्दे | विकेंद्रीकरण, राज्य स्वायत्तता, राज्यपाल की भूमिका, परिसीमन |
| संवैधानिक फोकस | केंद्र और राज्यों की शक्तियों के बीच संतुलन |
| आगामी रिपोर्ट | दो अतिरिक्त भाग तैयार किए जा रहे हैं |
| ऐतिहासिक संदर्भ | राजामन्नार, सरकारिया और पंचही समितियों के बाद चौथी बड़ी समीक्षा |
| संघीय सिद्धांत | संवैधानिक ढांचे के भीतर सहकारी संघवाद को मजबूत करना |
| शासन प्रभाव | केंद्र–राज्य संतुलन को सुधारने के उद्देश्य से सिफारिशें |





