महिलाओं के अधिकारों के लिए ऐतिहासिक पहल
भारत में कर्नाटक ने इतिहास रचते हुए सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों की महिला कर्मचारियों के लिए प्रति वर्ष 12 दिन का भुगतान योग्य मासिक धर्म अवकाश (Paid Menstrual Leave) लागू किया है।
यह नीति नवंबर 2025 में स्वीकृत की गई और यह निर्णय महिलाओं के मासिक धर्म स्वास्थ्य (Menstrual Health) को कार्यस्थल कल्याण और लैंगिक समानता का अभिन्न हिस्सा मानता है।
यह कदम भारत की श्रम नीतियों में एक क्रांतिकारी परिवर्तन है, जो उन्हें वैश्विक लैंगिक संवेदनशील मानकों (Gender-Sensitive Standards) के अनुरूप बनाता है।
Static GK Fact: अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) लंबे समय से ऐसे लैंगिक उत्तरदायी कार्यस्थल ढांचे (Gender-Responsive Workplace Frameworks) की वकालत करता रहा है जो जैविक भिन्नताओं को निष्पक्ष और भेदभाव रहित रूप से संबोधित करते हैं।
नीति की संरचना और क्रियान्वयन
इस नई नीति के तहत सभी महिला कर्मचारियों को प्रति माह एक दिन का भुगतान योग्य मासिक धर्म अवकाश मिलेगा, यानी प्रति वर्ष कुल 12 अतिरिक्त अवकाश दिवस।
यह प्रावधान सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों पर समान रूप से लागू होगा, जिससे कार्यस्थल अधिकारों में समानता (Parity in Workplace Rights) सुनिश्चित होगी।
यह अवकाश सामान्य या चिकित्सीय अवकाश से अलग दर्ज किया जाएगा, जिससे महिलाओं के अन्य अवकाश अधिकारों में कोई कटौती नहीं होगी।
राज्य सरकार ने यह भी निर्देश दिया है कि मासिक धर्म अवकाश की प्रक्रिया में गोपनीयता और भेदभाव–रहित दृष्टिकोण अपनाया जाए।
Static GK Tip: शक्ति योजना और गृह लक्ष्मी योजना कर्नाटक सरकार की महिला सशक्तिकरण से जुड़ी प्रमुख योजनाएँ हैं।
मासिक धर्म स्वास्थ्य पर संवाद को सामान्य बनाना
यह नीति कार्यस्थलों पर मासिक धर्म से जुड़ी वर्जनाओं (Taboos) को तोड़ने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।
मासिक धर्म को औपचारिक रूप से नीति में शामिल कर, सरकार ने यह संदेश दिया है कि महिलाओं का स्वास्थ्य किसी अन्य चिकित्सीय स्थिति जितना ही महत्वपूर्ण है।
यह निर्णय सहानुभूतिपूर्ण कार्य संस्कृति (Empathetic Workplace Culture) को प्रोत्साहित करता है और मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन (Menstrual Hygiene Management – MHM) पर खुली बातचीत को बढ़ावा देता है।
वैश्विक संदर्भ: जापान (1947 से), दक्षिण कोरिया, ताइवान, इंडोनेशिया और स्पेन जैसे देशों में पहले से ही Menstrual Leave Policies लागू हैं, और कर्नाटक अब इस अंतर्राष्ट्रीय आंदोलन (Global Menstrual Equity Movement) का हिस्सा बन गया है।
कार्यबल और अर्थव्यवस्था पर व्यापक प्रभाव
यह प्रगतिशील कदम महिला कर्मचारियों के मनोबल, उत्पादकता और कार्यस्थल स्थायित्व को बढ़ाएगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस नीति से लैंगिक भेदभाव में कमी, महिला कार्यबल भागीदारी में वृद्धि, और समावेशी आर्थिक विकास को बल मिलेगा।
हालांकि, इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सरकार ने सुझाव दिया है कि अवकाश वैकल्पिक (Optional) हो, साथ ही लचीले कार्य समय और संवेदनशीलता अभियान (Sensitisation Campaigns) भी चलाए जाएँ ताकि कार्यस्थलों पर किसी प्रकार का कलंक या दुरुपयोग न हो।
Static GK Fact: पीरियॉडिक लेबर फोर्स सर्वे (PLFS) 2023 के अनुसार, भारत में महिला श्रम बल भागीदारी दर (FLFP) 37% थी, जो पिछले वर्षों की तुलना में वृद्धि दर्शाती है।
राष्ट्रीय नीति की दिशा में कदम
कर्नाटक की इस पहल के बाद, अन्य राज्य और केंद्र सरकार भी समान राष्ट्रीय रूपरेखा (National Framework) अपनाने पर विचार कर रहे हैं, जिससे देशभर की सभी कामकाजी महिलाएँ समान स्वास्थ्य अधिकार प्राप्त कर सकें।
यह पहल कर्नाटक को सामाजिक और लैंगिक नीति सुधारों में अग्रणी राज्य (Trailblazer) के रूप में स्थापित करती है और भारत को समावेशी एवं न्यायसंगत विकास की दिशा में अग्रसर करती है।
Static Usthadian Current Affairs Table
| विषय (Topic) | विवरण (Detail) |
| नीति लागू करने वाला राज्य | कर्नाटक |
| वार्षिक भुगतान योग्य अवकाश दिवस | 12 दिन (1 प्रति माह) |
| कवर किए गए क्षेत्र | सरकारी और निजी दोनों क्षेत्र |
| नीति स्वीकृति वर्ष | 2025 |
| समान वैश्विक देश | जापान, दक्षिण कोरिया, ताइवान, इंडोनेशिया, स्पेन |
| नीति का उद्देश्य | मासिक धर्म स्वास्थ्य और लैंगिक समानता को बढ़ावा देना |
| कार्यान्वयन प्राधिकरण | कर्नाटक सरकार |
| अपेक्षित लाभ | उच्च मनोबल, उत्पादकता, समावेशिता |
| कर्नाटक की सहायक योजनाएँ | शक्ति योजना, गृह लक्ष्मी योजना |
| संबंधित अंतरराष्ट्रीय संगठन | अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) |





