योजना की पृष्ठभूमि
कलैग्नार कनवु इल्लम योजना तमिलनाडु सरकार की एक प्रमुख ग्रामीण आवास पहल है जिसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के बीच बेघर होने की समस्या को दूर करना है। यह योजना अस्थायी और असुरक्षित आश्रयों को टिकाऊ, स्थायी कंक्रीट के घरों से बदलने पर केंद्रित है।
यह कार्यक्रम समावेशी विकास और ग्रामीण उत्थान के प्रति राज्य की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह पिछली द्रविड़-युग की कल्याणकारी नीतियों से प्रेरणा लेता है जिन्होंने सामाजिक न्याय और गरिमा पर जोर दिया था।
पैमाना और वित्तीय परिव्यय
तमिलनाडु सरकार ने इस योजना के तहत एक लाख नए घर बनाने की घोषणा की है। ये घर कुल अनुमानित ₹3,500 करोड़ की लागत से बनाए जाएंगे, जिसका पूरा खर्च राज्य सरकार उठाएगी।
वित्तीय आवंटन ग्रामीण नीति नियोजन में आवास सुरक्षा को दी गई प्राथमिकता को उजागर करता है। निर्बाध निर्माण और गुणवत्ता नियंत्रण सुनिश्चित करने के लिए धन चरणों में जारी किया जाता है।
स्टेटिक जीके तथ्य: तमिलनाडु उन कुछ भारतीय राज्यों में से एक है जो अपने वार्षिक बजट का एक बड़ा हिस्सा विशेष रूप से ग्रामीण आवास योजनाओं के लिए आवंटित करता है।
कार्यान्वयन और कवरेज
यह योजना एक राज्य आवास कार्यक्रम के रूप में लागू की गई है, जो मुख्य रूप से ग्रामीण और गांव क्षेत्रों पर केंद्रित है। लाभार्थियों का चयन आधिकारिक सामाजिक-आर्थिक मानदंडों के आधार पर गरीब और बेघर परिवारों में से किया जाता है।
प्रत्येक घर को लंबे समय तक चलने और आपदा प्रतिरोधी बनाने के लिए प्रबलित कंक्रीट का उपयोग करके बनाया गया है। यह कार्यक्रम लाभार्थी ऋण से बचता है, जिससे ऋण-मुक्त संपत्ति स्वामित्व सुनिश्चित होता है।
आवास की विशेषताएं और सुविधाएं
इस योजना के तहत बनाए गए घरों में डिजाइन के हिस्से के रूप में बुनियादी नागरिक सुविधाएं प्रदान की जाती हैं। इनमें पीने के पानी के कनेक्शन, बिजली की आपूर्ति और स्वच्छता सुविधाएं शामिल हैं।
शौचालयों को शामिल करना राष्ट्रीय स्वच्छता उद्देश्यों और सार्वजनिक स्वास्थ्य लक्ष्यों के अनुरूप है। आवास समूहों के साथ-साथ सड़कों और जल निकासी जैसे ग्राम-स्तरीय बुनियादी ढांचे को भी उन्नत किया जाता है।
स्टेटिक जीके टिप: एकीकृत स्वच्छता वाली आवास योजनाएं ग्रामीण आबादी में बेहतर स्वास्थ्य परिणाम दिखाती हैं।
प्रगति और वर्तमान स्थिति
हाल ही में घोषित एक लाख घरों के अलावा, राज्य भर में दो लाख घरों का निर्माण पहले से ही चल रहा है। यह योजना के बड़े पैमाने पर कार्यान्वयन और प्रशासनिक क्षमता को इंगित करता है।
जिला प्रशासन समय-समय पर क्षेत्र निरीक्षण और डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम का उपयोग करके प्रगति की निगरानी करते हैं। मौसमी मानसून से पहले समय पर पूरा करने को प्राथमिकता दी जाती है।
सामाजिक-आर्थिक महत्व
यह योजना आवास सुरक्षा को मज़बूत करती है, जो मानव विकास का एक मुख्य संकेतक है। यह सीधे तौर पर गरीबी कम करने, रोज़गार पैदा करने और ग्रामीण संपत्ति बनाने में योगदान देती है।
निर्माण गतिविधियों से राजमिस्त्री, मज़दूरों और मटेरियल सप्लायर के लिए स्थानीय रोज़गार पैदा होता है। जिन घरों की मुखिया महिलाएं हैं और कमज़ोर परिवारों को विशेष प्राथमिकता दी जाती है।
स्टेटिक जीके तथ्य: सुरक्षित आवास ग्रामीण भारत में बेहतर स्कूल अटेंडेंस और वित्तीय स्थिरता से जुड़ा हुआ है।
Static Usthadian Current Affairs Table
| विषय | विवरण |
| योजना का नाम | कलैगनर कनवु इलम योजना |
| कार्यान्वयन प्राधिकरण | तमिलनाडु सरकार |
| मुख्य उद्देश्य | ग्रामीण गरीबों के लिए स्थायी आवास |
| घोषित नए घर | एक लाख |
| कुल लागत | ₹3,500 करोड़ |
| निर्माणाधीन घर | दो लाख |
| लक्षित लाभार्थी | गरीब और बेघर ग्रामीण परिवार |
| प्रमुख सुविधाएँ | जल आपूर्ति, बिजली, स्वच्छता |
| निर्माण का प्रकार | स्थायी कंक्रीट मकान |
| व्यापक प्रभाव | ग्रामीण विकास और सामाजिक सुरक्षा |





