ओवरव्यू
सुप्रीम कोर्ट के सेंटर फॉर रिसर्च एंड प्लानिंग (CRP) ने एक व्हाइट पेपर जारी किया है जिसमें यह जांच की गई है कि AI को भारत के ज्यूडिशियल सिस्टम में सुरक्षित रूप से कैसे इंटीग्रेट किया जाना चाहिए। यह एथिकल रिस्क को हाईलाइट करता है, प्रैक्टिकल चुनौतियों का रिव्यू करता है, और कोर्ट में ज़िम्मेदार AI के इस्तेमाल को आकार देने वाली ग्लोबल पहलों का सर्वे करता है। पेपर का मकसद ज्यूडिशियल इंडिपेंडेंस, ट्रांसपेरेंसी और कॉन्स्टिट्यूशनल वैल्यूज़ के साथ इनोवेशन को बैलेंस करना है।
स्टैटिक GK फैक्ट: भारत का सुप्रीम कोर्ट 28 जनवरी 1950 को सबसे बड़ी ज्यूडिशियल अथॉरिटी के तौर पर स्थापित हुआ था।
ज्यूडिशियल AI के एथिकल रिस्क
रिपोर्ट में इस बात पर ज़ोर दिया गया है कि AI पर बहुत ज़्यादा डिपेंडेंस ज्यूडिशियल डिस्क्रिप्शन को कमज़ोर कर सकता है। ऑटोमेटेड टूल्स बिना साफ़ रीज़निंग के नतीजे दे सकते हैं, जिससे अकाउंटेबिलिटी में गैप पैदा हो सकते हैं। कई AI मॉडल्स का ओपेक नेचर गलतियों के अनदेखे रहने का रिस्क बढ़ाता है।
AI सिस्टम्स गलतफहमियां भी पैदा कर सकते हैं, जिसमें मनगढ़ंत केस लॉ या साइटेशन शामिल हैं। पेपर में US के केस जैसे रॉबर्टो माटा बनाम एवियनका और कूमर बनाम लिंडेल का ज़िक्र है, जहां AI से बनाए गए झूठे साइटेशन जांच के दायरे में आए थे।
स्टैटिक GK टिप: भारत में ज्यूडिशियल रिव्यू के सिद्धांत को केशवानंद भारती (1973) जैसे लैंडमार्क केस से मजबूती मिली।
एल्गोरिदमिक बायस और डेटा की चिंताएं
पेपर में एल्गोरिदमिक बायस के खिलाफ चेतावनी दी गई है, जिसमें US के COMPAS टूल का उदाहरण दिया गया है, जिसे स्टेट बनाम लूमिस में संभावित नस्लीय बायस को लेकर चुनौती का सामना करना पड़ा था। ऐसे मॉडल्स, अगर बिना सेफगार्ड के दोहराए जाते हैं, तो भारतीय कोर्ट्स में गलत नतीजे आ सकते हैं।
दूसरे रिस्क में डीपफेक और मैनिपुलेटेड सबूत शामिल हैं, जिससे सबूतों से जुड़ी चुनौतियां बढ़ती हैं। चिंताएं प्राइवेसी, कॉन्फिडेंशियलिटी और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी तक फैली हुई हैं, खासकर जब थर्ड-पार्टी AI टूल सेंसिटिव कोर्ट डेटा को प्रोसेस करते हैं। मुख्य सुझाव
पेपर में कोर्ट के अंदर AI एथिक्स कमेटियां बनाने का सुझाव दिया गया है। इन बॉडी में जज, टेक्नोलॉजिस्ट और कानूनी जानकार होने चाहिए जो AI टूल्स का रिव्यू करें और नैतिक नियमों के पालन पर नज़र रखें।
यह कोर्ट को डेटा-सिक्योरिटी और जोखिम के जोखिम को कम करने के लिए बाहरी प्लेटफॉर्म पर निर्भर रहने के बजाय सुरक्षित इन-हाउस AI सिस्टम बनाने के लिए प्रोत्साहित करता है।
एक फॉर्मल एथिकल AI पॉलिसी में ऑथराइज़्ड इस्तेमाल के मामले, ज़िम्मेदारी का बंटवारा और इंसानी निगरानी के तरीके साफ़ तौर पर बताए जाने चाहिए।
अतिरिक्त सुझावों में सख्त डिस्क्लोज़र नियम, ज़रूरी ऑडिट ट्रेल्स और न्यायिक अधिकारियों के लिए पूरी कैपेसिटी-बिल्डिंग ट्रेनिंग शामिल हैं।
न्यायपालिका में भारत की AI पहल
मुख्य डिजिटल न्याय पहलों में ई-कोर्ट्स मिशन मोड प्रोजेक्ट शामिल है, जो बैकलॉग कम करने, भाषा की रुकावटों को दूर करने और प्रोसेस को आसान बनाने के लिए AI का इस्तेमाल करता है।
SUPACE जैसे टूल जज को केस रिकॉर्ड का एनालिसिस करने और समरी बनाने में मदद करते हैं, जिससे काम करने की क्षमता बढ़ती है।
SUVAS ट्रांसलेशन टूल ने सुप्रीम कोर्ट के 36,000 से ज़्यादा फैसलों को 19 भारतीय भाषाओं में बदला है, जिससे एक्सेसिबिलिटी में मदद मिली है। दूसरे टूल्स में TERES (AI-बेस्ड ट्रांसक्रिप्शन) और LegRAA (लीगल रिसर्च एनालिसिस) शामिल हैं।
स्टैटिक GK फैक्ट: भारत में 25 हाई कोर्ट हैं, जिनमें से हर एक का अधिकार क्षेत्र एक या ज़्यादा राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों पर है।
ग्लोबल डेवलपमेंट
ग्लोबल लेवल पर, UNESCO जैसे ऑर्गनाइज़ेशन ने “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के एथिक्स पर रिकमेंडेशन” जारी किया है, जबकि OECD ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर अपने प्रिंसिपल्स (2019) बनाए हैं, जो दुनिया का पहला इंटर-गवर्नमेंटल AI स्टैंडर्ड है।
EU AI एक्ट हाई-रिस्क ज्यूडिशियल AI एप्लीकेशन को रेगुलेट करता है। ब्राज़ील (ATHOS) और सिंगापुर (LawNet AI) जैसे देशों ने खास ज्यूडिशियल AI टूल्स डेवलप किए हैं, जो भारत के लिए कम्पेरेटिव मॉडल देते हैं।
Static Usthadian Current Affairs Table
| Topic | Detail |
| श्वेत पत्र का फोकस | न्यायपालिका में एआई का सुरक्षित और नैतिक उपयोग |
| प्रमुख संस्था | सुप्रीम कोर्ट सेंटर फ़ॉर रिसर्च एंड प्लानिंग |
| प्रमुख जोखिम | अत्यधिक निर्भरता, hallucinations, पक्षपात (bias), गोपनीयता समस्याएँ |
| उल्लेखनीय अमेरिकी मामले | Roberto Mata v. Avianca; Coomer v. Lindell |
| पक्षपात उदाहरण | State v. Loomis में COMPAS टूल को चुनौती |
| मुख्य सिफ़ारिश | न्यायालयों में एआई एथिक्स समितियों की स्थापना |
| भारत की पहलें | e-Courts, SUPACE, SUVAS, TERES, LegRAA |
| यूनेस्को की भूमिका | वैश्विक एआई नैतिकता अनुशंसा |
| OECD की भूमिका | 2019 एआई सिद्धांत |
| ईयू पहल | उच्च-जोखिम प्रणालियों को विनियमित करने वाला EU AI Act |





