जनऔषधि दिवस मनाना
जनऔषधि दिवस हर साल प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना (PMBJP) और सस्ती जेनेरिक दवाओं के फायदों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए मनाया जाता है। यह कैंपेन नागरिकों को क्वालिटी से समझौता किए बिना सस्ती दवाएं अपनाने के लिए प्रोत्साहित करता है।
यह पहल समाज के सभी वर्गों के लिए हेल्थकेयर को आसान बनाने के सरकार के वादे को भी दिखाती है। इस दौरान पूरे देश में जागरूकता कार्यक्रम, मेडिकल कैंप और पब्लिक आउटरीच प्रोग्राम आयोजित किए जाते हैं।
स्टेटिक GK फैक्ट: भारत हर साल 7 मार्च को जनऔषधि दिवस मनाता है, जो पब्लिक हेल्थ पॉलिसी में सस्ती दवाओं के महत्व को दिखाता है।
PMBJP का विकास
यह स्कीम असल में 2008 में जन औषधि स्कीम के तौर पर शुरू की गई थी, जिसका मकसद कम कीमत पर अच्छी क्वालिटी की दवाएँ देना था।
बाद में इसकी पहुँच बढ़ाने और इसे लागू करने को मज़बूत करने के लिए 2015 में इसे बदलकर प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना (PMBJP) कर दिया गया।
मिनिस्ट्री ऑफ़ केमिकल्स एंड फर्टिलाइज़र्स के तहत फार्मास्यूटिकल्स डिपार्टमेंट इस प्रोग्राम के लिए नोडल एजेंसी के तौर पर काम करता है।
इसे फार्मास्यूटिकल्स एंड मेडिकल डिवाइसेस ब्यूरो ऑफ़ इंडिया (PMBI) लागू करता है।
इस स्कीम का मकसद पूरे भारत में भरोसेमंद जेनेरिक दवाओं के इस्तेमाल को बढ़ावा देकर दवाओं पर जेब से होने वाले खर्च को कम करना है।
स्टैटिक GK टिप: जेनेरिक दवाओं में ब्रांडेड दवाओं जैसे ही एक्टिव इंग्रीडिएंट्स होते हैं, लेकिन ये काफी कम कीमत पर बेची जाती हैं।
जन औषधि केंद्रों का विस्तार
PMBJP का एक अहम हिस्सा देश भर में जन औषधि केंद्र (JAKs) बनाना है।
ये केंद्र फ्रेंचाइजी–बेस्ड मॉडल के ज़रिए सस्ती कीमतों पर अच्छी क्वालिटी की जेनेरिक दवाएँ देते हैं।
पूरे भारत में 18,000 से ज़्यादा जन औषधि केंद्र खोले गए हैं, जिसमें ग्रामीण और दूर–दराज के इलाके भी शामिल हैं।
इस स्कीम को रेलवे स्टेशन जैसी नई जगहों पर भी बढ़ाया गया है, जिससे यात्रियों और बाहर से आए मज़दूरों को कम कीमत वाली दवाएँ मिल रही हैं।
सरकार ने ग्रामीण इलाकों में दवाओं की लास्ट–माइल डिलीवरी को मज़बूत करने के लिए कोऑपरेटिव सेक्टर की भागीदारी को भी बढ़ावा दिया है।
स्टैटिक GK फैक्ट: भारत दुनिया की सबसे बड़ी फार्मास्यूटिकल इंडस्ट्री में से एक है और इसे अक्सर “दुनिया की फार्मेसी” कहा जाता है।
PMBJP के तहत मुख्य पहल
PMBJP के तहत पहुँच और जागरूकता बढ़ाने के लिए कई पहल शुरू की गई हैं।
जन औषधि सुविधा सैनिटरी नैपकिन प्रोग्राम ₹1 प्रति पैड पर ऑक्सो–बायोडिग्रेडेबल सैनिटरी पैड देता है, जिससे महिलाओं के लिए सस्ती पीरियड्स की साफ़–सफ़ाई बेहतर होती है। यह पहल महिलाओं की हेल्थ को सपोर्ट करती है और साफ़–सफ़ाई के बारे में जागरूकता बढ़ाती है।
जन औषधि सुगम मोबाइल ऐप नागरिकों को आस–पास के जन औषधि केंद्रों का पता लगाने, दवा की उपलब्धता चेक करने और ब्रांडेड दवाओं के साथ कीमतों की तुलना करने में मदद करता है।
यह डिजिटल टूल यूज़र्स के लिए ट्रांसपेरेंसी और सुविधा बढ़ाता है।
ये सभी पहलें मिलकर ज़रूरी दवाओं तक सबकी पहुँच के मकसद को मज़बूत करती हैं।
स्कीम की बड़ी उपलब्धियाँ
इस प्रोग्राम ने हेल्थकेयर की किफ़ायत को बेहतर बनाने में बड़ी उपलब्धियाँ हासिल की हैं।
जून 2025 तक, जन औषधि केंद्रों के ज़रिए लगभग ₹7,700 करोड़ की दवाएँ बेची गईं।
इससे लगभग ₹38,000 करोड़ की अनुमानित बचत हुई है, जिससे मरीज़ों पर पैसे का बोझ कम हुआ है।
यह स्कीम अभी 2,000 से ज़्यादा दवाएँ और 300 से ज़्यादा सर्जिकल आइटम देती है, जिसमें कई इलाज की कैटेगरी शामिल हैं।
ये उपलब्धियाँ दिखाती हैं कि भारतीय आबादी में जेनेरिक दवाओं को ज़्यादा पसंद किया जा रहा है।
Static Usthadian Current Affairs Table
| Topic | Detail |
| योजना का नाम | प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना |
| लॉन्च वर्ष | 2008 में जन औषधि योजना के रूप में |
| पुनर्गठन | 2015 में पीएमबीजेपी के तहत |
| नोडल मंत्रालय | रसायन और उर्वरक मंत्रालय |
| नोडल विभाग | औषधि विभाग |
| कार्यान्वयन एजेंसी | फार्मास्यूटिकल्स एंड मेडिकल डिवाइसेस ब्यूरो ऑफ इंडिया |
| मुख्य उद्देश्य | नागरिकों को सस्ती जेनेरिक दवाएं उपलब्ध कराना |
| प्रमुख पहल | जनऔषधि सुविधा सैनिटरी नैपकिन |
| डिजिटल प्लेटफॉर्म | जन औषधि सुगम मोबाइल ऐप |
| नेटवर्क विस्तार | भारत में 18,000 से अधिक जन औषधि केंद्र |





