सरकार ने बदलाव के लिए बिल वापस लिया
केंद्र सरकार ने 17 मार्च 2026 को लोकसभा से जन विश्वास (प्रावधानों में संशोधन) बिल, 2025 वापस ले लिया। वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सेलेक्ट कमिटी की सिफारिशों को शामिल करने के लिए इसे वापस लेने का प्रस्ताव रखा, और लोकसभा ने इसे वॉइस वोट से मंज़ूरी दी।
यह कदम बिल को और बेहतर रूप में दोबारा पेश करने से पहले उसमें संशोधन करने की गुंजाइश देता है।
स्टेटिक GK फैक्ट: लोकसभा संसद का निचला सदन है और सीधे भारत के लोगों का प्रतिनिधित्व करती है।
जन विश्वास बिल का मकसद
इस बिल का मुख्य मकसद कई कानूनों में छोटे अपराधों को अपराध की श्रेणी से हटाना था। इसमें कुछ मामलों में जेल के प्रावधानों की जगह आर्थिक दंड और पहली बार के उल्लंघन पर advisory या warning जैसे उपायों का प्रस्ताव था। 2025 में पेश किए गए इस बिल में 16 अधिनियमों के 288 प्रावधानों को decriminalise करने की बात कही गई थी।
यह सुधार कोर्ट पर बोझ कम करने, compliance burden घटाने और ease of doing business तथा ease of living को बढ़ावा देने की बड़ी रणनीति से जुड़ा था।
स्टेटिक GK टिप: वर्ल्ड बैंक पहले देशों में रेगुलेटरी एफिशिएंसी मापने के लिए Ease of Doing Business Index जारी करता था।
सेलेक्ट कमेटी की जांच में भूमिका
बिल को सेलेक्ट कमेटी को भेजा गया था, जिसने उसके प्रावधानों की विस्तृत जांच की और अपनी रिपोर्ट मार्च 2026 में दी। PRS के अनुसार, कमेटी की रिपोर्ट 13 मार्च 2026 को आई, और उसके तुरंत बाद बिल वापस ले लिया गया।
कमेटी की सिफारिशों के आधार पर सरकार ने बिल वापस लेने का फैसला किया। यह दिखाता है कि विधायी प्रक्रिया में विशेषज्ञ समीक्षा और संसदीय जांच को महत्व दिया गया।
स्टेटिक GK फैक्ट: संसदीय समितियां सदन की सामान्य बहस से आगे बढ़कर विस्तृत विधायी जांच के लिए बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।
लेजिस्लेटिव प्रोसेस और दोबारा पेश करना
भारतीय संसदीय व्यवस्था के तहत, सदन की अनुमति से किसी बिल को वापस लिया जा सकता है। वापसी के बाद सरकार उसके प्रावधानों पर फिर से काम कर सकती है और उसे बदले हुए रूप में दोबारा पेश कर सकती है। इस मामले में भी उम्मीद यही है कि संशोधित जन विश्वास बिल अपने मूल उद्देश्य को बनाए रखते हुए सेलेक्ट कमिटी की चिंताओं को शामिल करेगा।
यह भारत की विधायी प्रक्रिया की लचीलापन और responsiveness को भी दिखाता है।
गवर्नेंस सुधारों के लिए महत्व
यह कदम trust-based governance की दिशा में एक प्रयास के रूप में देखा जा रहा है, जहाँ हर छोटे उल्लंघन को आपराधिक दंड से नहीं, बल्कि अधिक तर्कसंगत दंड व्यवस्था से निपटाने की कोशिश होती है। इसका मकसद litigation कम करना, कानूनों को सरल बनाना और रेगुलेटरी माहौल को बेहतर करना है।
ऐसे सुधार आर्थिक दक्षता बढ़ाने, व्यवसायों और नागरिकों पर compliance का बोझ कम करने और राज्य–नागरिक संबंध को अधिक भरोसेमंद बनाने की व्यापक कोशिशों का हिस्सा हैं।
स्टेटिक GK टिप: डीक्रिमिनलाइज़ेशन का मतलब अपराध को पूरी तरह हटाना नहीं होता; अक्सर इसका मतलब जेल जैसी सज़ा की जगह सिविल दायित्व या आर्थिक दंड लाना होता है।
Static Usthadian Current Affairs Table
| विषय | विवरण |
| विधेयक का नाम | जन विश्वास (प्रावधानों में संशोधन) विधेयक, 2025 |
| वापसी की तिथि | 18 मार्च 2026 |
| वापसी का कारण | प्रवर समिति की सिफारिशों को शामिल करना |
| मुख्य उद्देश्य | छोटे-मोटे अपराधों का अपराधमुक्तिकरण |
| प्रस्तावित बदलाव | कारावास के स्थान पर आर्थिक दंड लागू करना |
| संसदीय कार्रवाई | लोकसभा से ध्वनिमत द्वारा वापस लिया गया |
| संबंधित मंत्री | पीयूष गोयल |
| शासन का लक्ष्य | व्यापार सुगमता और विश्वास-आधारित शासन |





