भारत की ऊर्जा सुरक्षा का विस्तार
भारत ने ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ अपना पहला संरचित एलपीजी आयात समझौता अंतिम रूप दे दिया है। यह अनुबंध 2026 से लागू होगा और 2.2 मिलियन टन प्रतिवर्ष की आपूर्ति सुनिश्चित करेगा, जो भारत की वार्षिक एलपीजी आयात आवश्यकता का लगभग 10 प्रतिशत है। यह कदम स्रोतों में महत्वपूर्ण विविधीकरण को दर्शाता है और आपूर्ति श्रृंखलाओं को स्थिर करने की दीर्घकालिक रणनीति पर जोर देता है।
Static GK fact: भारत, अमेरिका के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एलपीजी उपभोक्ता है।
भारत–अमेरिका ऊर्जा सहयोग को मजबूती
यह विकास दोनों देशों के बीच तेजी से बढ़ते ऊर्जा सहयोग को और सुदृढ़ करता है। यह संरचित अनुबंध पेट्रोलियम उत्पादों में अधिक द्विपक्षीय व्यापार को प्रोत्साहित करेगा और मूल्य वार्ताओं में भारत की स्थिति को मजबूत करेगा। यह साझेदारी भारत के उस लक्ष्य के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य एक ही क्षेत्र के आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम करना है।
Static GK Tip: भारत–अमेरिका रणनीतिक ऊर्जा साझेदारी (SEP) की शुरुआत 2018 में हुई थी।
भारत की तेल कंपनियों की भूमिका
इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने इस उपलब्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इन पीएसयू अधिकारियों ने अमेरिकी उत्पादकों के साथ मिलकर एक पारदर्शी और स्थिर आपूर्ति ढांचा तैयार किया। मूल्य निर्धारण फार्मूला माउंट बेल्वियू बेंचमार्क से जुड़ा हुआ है, जो अधिक पारदर्शिता और उतार-चढ़ाव वाले स्पॉट मार्केट जोखिमों से सुरक्षा प्रदान करता है।
Static GK fact: इंडियन ऑयल 1959 में स्थापित भारत की सबसे बड़ी वाणिज्यिक तेल कंपनी है।
घरेलू उपभोक्ताओं के लिए वहनयोग्यता
सरकार इस समझौते को घरेलू उपभोक्ताओं को मूल्य अस्थिरता से बचाने का एक अहम साधन मानती है। अंतरराष्ट्रीय एलपीजी कीमतों में पिछले वर्षों में 60 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई थी, लेकिन लक्षित सहायता योजनाओं ने गरीब परिवारों को प्रभावित होने से बचाया। नया समझौता करोड़ों उपभोक्ताओं के लिए स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करेगा और कल्याणकारी योजनाओं के तहत सब्सिडी की निरंतरता को मजबूत करेगा।
Static GK Tip: प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना 2016 में गरीब परिवारों को एलपीजी कनेक्शन देने के लिए शुरू की गई थी।
तेजी से बढ़ती एलपीजी मांग में स्थिरता
भारत में तेजी से शहरीकरण, स्वच्छ खाना पकाने के ईंधन की बढ़ती मांग और सामाजिक योजनाओं के विस्तार के कारण एलपीजी की खपत लगातार बढ़ रही है। अमेरिका-लिंक्ड अनुबंध भारत जैसे बड़े एलपीजी बाजार के लिए स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करता है। यह सस्ती ऊर्जा, विश्वसनीय स्रोत और आपूर्ति विविधीकरण के राष्ट्रीय लक्ष्यों को समर्थन देता है।
Static GK fact: दुनिया की सबसे बड़ी एलपीजी भंडारण सुविधा जापान में स्थित है, जो एशिया की एलपीजी खपत में प्रमुखता दिखाती है।
भविष्य के लिए रणनीतिक महत्व
यह ऐतिहासिक समझौता अमेरिकी उत्पादकों के साथ लंबे समय के सहयोग का आधार तैयार करता है, जो आगे चलकर बहुवर्षीय या अधिक मात्रा वाले अनुबंधों में बदल सकता है। यह भारत की वैश्विक एलपीजी व्यापार में स्थिति को मजबूत करता है, खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाता है और घरेलू उपभोक्ताओं व उद्योगों के लिए सुरक्षित आपूर्ति सुनिश्चित करता है।
स्टैटिक उस्तादियन करंट अफेयर्स टेबल
| विषय | विवरण |
| अनुबंध वर्ष | 2026 |
| आयात मात्रा | 2.2 मिलियन टन प्रतिवर्ष |
| भारत के कुल एलपीजी आयात में हिस्सा | लगभग 10 प्रतिशत |
| मूल्य निर्धारण बेंचमार्क | माउंट बेल्वियू हब |
| शामिल भारतीय पीएसयू | IOCL, BPCL, HPCL |
| साझेदार देश | संयुक्त राज्य अमेरिका |
| रणनीतिक फोकस | एलपीजी के विविध स्रोत |
| घरेलू लाभ | स्थिर और वहनयोग्य एलपीजी आपूर्ति |
| प्रमुख बाजार तथ्य | भारत दुनिया के सबसे तेज़ी से बढ़ते एलपीजी बाजारों में से एक |
| नीति संबंध | वहनयोग्यता सुनिश्चित करने वाली कल्याणकारी योजनाएँ |





