इंडियन लॉन्च व्हीकल प्रोडक्शन में प्राइवेट-सेक्टर शिफ्ट
इंडिया अपने पहले पूरी तरह से इंडस्ट्री-बिल्ट पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (PSLV) के लॉन्च के लिए तैयार होने के साथ स्पेस मैन्युफैक्चरिंग के एक नए फेज़ में आगे बढ़ रहा है। HAL-L&T कंसोर्टियम ने PSLV-XL वेरिएंट का एंड-टू-एंड प्रोडक्शन पूरा कर लिया है, जो 2026 की शुरुआत में एक ओशनसैट अर्थ-ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट लॉन्च करेगा।
यह पहली बार है जब किसी कमर्शियल एंटिटी ने एक बड़े इंडियन स्पेस लॉन्च व्हीकल की असेंबली और सिस्टम इंटीग्रेशन सहित पूरी मैन्युफैक्चरिंग को हैंडल किया है।
स्टैटिक GK फैक्ट: PSLV इंडिया का सबसे भरोसेमंद लॉन्चर है, जो कई देशों के लिए सैटेलाइट डिप्लॉय करने वाले 50 से ज़्यादा सफल मिशन के लिए जाना जाता है। इंडस्ट्रियल कॉन्ट्रैक्ट मॉडल
प्राइवेट मैन्युफैक्चरिंग कैपेबिलिटी को इनेबल करने के लिए, ISRO ने 2022 में इंडस्ट्री द्वारा बनाए जाने वाले पांच PSLV रॉकेट के लिए एक कॉन्ट्रैक्ट साइन किया। HAL और L&T, जो एयरोस्पेस और डिफेंस में लंबे समय से पार्टनर हैं, अब कॉम्प्लेक्स लॉन्च व्हीकल फैब्रिकेशन को लीड करते हैं।
वे एक साथ कई रॉकेट तैयार कर रहे हैं, जिनका मकसद हर साल दो से तीन लॉन्च करना है। इससे जल्दी तैयारी और ज़्यादा मिशन फ्रीक्वेंसी पक्की होती है।
स्टैटिक GK टिप: PSLV-XL छह एक्सटेंडेड स्ट्रैप-ऑन बूस्टर का इस्तेमाल करता है, जो भारी पेलोड को ऑर्बिट में ले जाने में मदद करता है।
ISRO की भूमिका का स्ट्रेटेजिक इवोल्यूशन
भारत की बढ़ती लॉन्च डिमांड और ग्लोबल कमर्शियल मौकों के लिए तेज़ प्रोडक्शन साइकिल की ज़रूरत है। प्रोडक्शन आउटसोर्सिंग ISRO को ये करने की इजाज़त देता है:
- रिसर्च-इंटेंसिव और एक्सप्लोरेशन मिशन पर फोकस करना
- नेक्स्ट-जेनरेशन रॉकेट में टेक्नोलॉजी इनोवेशन को तेज़ करना
- सरकारी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स पर दबाव कम करना
भारत की बढ़ती न्यूस्पेस इकॉनमी में प्राइवेट इन्वेस्टमेंट बढ़ रहा है, जिसमें स्टार्टअप अब सैटेलाइट डेवलपमेंट, प्रोपल्शन टेक्नोलॉजी और डेटा सर्विसेज़ में योगदान दे रहे हैं।
स्टेटिक GK फैक्ट: भारत टॉप पांच स्पेस-फेयरिंग देशों में से एक है, जो सतीश धवन स्पेस सेंटर, श्रीहरिकोटा जैसी लॉन्च साइट्स से ऑपरेट करता है।
ग्लोबल लॉन्च मार्केट में भारत की पोजीशन मजबूत करना
यह इंडस्ट्री-बिल्ट PSLV भारत की एक कॉस्ट-एफिशिएंट और भरोसेमंद लॉन्च पार्टनर के तौर पर पोजीशन मजबूत करता है। प्राइवेट इंडस्ट्री के मैन्युफैक्चरिंग का ऑपरेशनल कंट्रोल लेने से, क्लाइंट्स को ये फायदे होते हैं:
- तेज़ लॉन्च शेड्यूलिंग
- लोकल प्रोडक्शन के कारण कम कॉस्ट
- ISRO द्वारा सपोर्टेड टेक्निकल एक्सपर्टीज का एश्योरेंस
इंटरनेशनल सैटेलाइट कंपनियों की दिलचस्पी पहले ही शुरू हो चुकी है, जो भारत की इंडस्ट्रियल कैपेसिटी और बढ़ते इंफ्रास्ट्रक्चर पर भरोसे को दिखाता है।
चुनौतियां और भविष्य का रास्ता
सरकारी फैसिलिटी के बाहर एक पूरा लॉन्च व्हीकल बनाना एक मुश्किल काम है। इंडस्ट्री टीमों ने कंपोनेंट फैब्रिकेशन, सिस्टम टेस्टिंग और सख्त सेफ्टी क्वालिफिकेशन में चुनौतियों को दूर करने के लिए ISRO स्पेशलिस्ट के साथ काम किया।
अगर पहला लॉन्च सफल होता है, तो भारत पांच PSLV-XL व्हीकल के शुरुआती बैच से आगे के ऑर्डर बढ़ा सकता है। इससे रेवेन्यू बढ़ेगा, स्पेस-सेक्टर में रोजगार पैदा होगा और पूरे भारत में एलाइड मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को सपोर्ट मिलेगा।
स्टैटिक GK टिप: न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) दुनिया भर में भारतीय लॉन्च सेवाओं को बढ़ावा देने के लिए ज़िम्मेदार कमर्शियल ब्रांच के तौर पर काम करता है।
भारत की स्पेस इंडस्ट्री के लिए एक टर्निंग पॉइंट
HAL-L&T PSLV एक बड़ा बदलाव दिखाता है—प्राइवेट क्षमताएं अब मुश्किल नेशनल स्पेस स्टैंडर्ड्स से मेल खाती हैं। यह मिशन ज़्यादा इंडस्ट्रियल भागीदारी का रास्ता बनाता है, एक ग्लोबल लॉन्च प्रोवाइडर के तौर पर भारत की भूमिका को मज़बूत करता है और स्पेस एक्सेस में इसकी स्ट्रेटेजिक ऑटोनॉमी को आगे बढ़ाता है।
स्टैटिक उस्तादियन करेंट अफेयर्स टेबल
| विषय | विवरण |
| प्रक्षेपण यान प्रकार | पी.एस.एल.वी–एक्स.एल. उद्योग-निर्मित संस्करण |
| संघ | हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड एवं लार्सन एंड टूब्रो |
| अनुबंध वर्ष | पाँच पी.एस.एल.वी यानों हेतु 2022 का समझौता |
| प्रथम प्रक्षेपण पेलोड | ओशनसैट पृथ्वी अवलोकन उपग्रह |
| अपेक्षित प्रक्षेपण अवधि | वर्ष 2026 के आरम्भिक महीने |
| रणनीतिक लक्ष्य | सिद्ध प्रक्षेपण यान निर्माण को निजी क्षेत्र में स्थानांतरित करना |
| इसरो की विकसित होती भूमिका | अनुसंधान एवं विकास तथा उन्नत अंतरिक्ष अभियानों पर ध्यान |
| व्यावसायिक प्रभाव | वैश्विक उपग्रह प्रक्षेपण बाज़ार में भारत की स्थिति को सुदृढ़ करना |
| बूस्टर विन्यास | अधिक पेलोड क्षमता हेतु छह सहायक बूस्टर |
| औद्योगिक तैयारी | प्रति वर्ष दो से तीन प्रक्षेपणों की संभावना |





