नवम्बर 30, 2025 4:59 पूर्वाह्न

भारत की पहली कोस्ट टू कोस्ट पार्सल एक्सप्रेस सर्विस

करंट अफेयर्स: कोस्ट-टू-कोस्ट पार्सल एक्सप्रेस, सदर्न रेलवे, रॉयपुरम, मंगलुरु सेंट्रल, लॉजिस्टिक्स कॉरिडोर, वीकली फ्रेट शेड्यूल, डेडिकेटेड पार्सल कोच, तमिलनाडु केरल कनेक्टिविटी, रीजनल सप्लाई चेन

India’s First Coast to Coast Parcel Express Service

नई रीजनल फ्रेट कनेक्टिविटी

सदर्न रेलवे ने भारत की पहली कोस्ट-टू-कोस्ट पार्सल एक्सप्रेस सर्विस शुरू की है। यह चेन्नई (रॉयपुरम) के पूर्वी तट को सीधे मंगलुरु सेंट्रल के पश्चिमी तट से जोड़ती है। यह रेलवे लॉजिस्टिक्स को मॉडर्न बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है, जिसमें डिलीवरी टाइमलाइन पक्की है।

स्टेटिक GK फैक्ट: चेन्नई का रॉयपुरम स्टेशन भारत का सबसे पुराना चालू रेलवे स्टेशन है, जो 1856 में बना था।

शेड्यूल लॉन्च और फ्रीक्वेंसी

मंगलुरु से पहली ट्रेन 12 दिसंबर 2025 को निकलेगी, जो अगले दिन चेन्नई पहुंचेगी। रॉयपुरम से वापसी सर्विस 16 दिसंबर 2025 को शुरू होगी। यह ट्रेन वीकली चलती है, जिससे ट्रेडर्स और मैन्युफैक्चरर्स के लिए एक तय फ्रेट शेड्यूल पक्का होता है। बड़े कमर्शियल हब वाला रूट

पार्सल एक्सप्रेस सलेम, तिरुप्पुर, कोयंबटूर, पलक्कड़, कोझिकोड, कन्नूर और कासरगोड जैसे ज़रूरी इंडस्ट्रियल और बिज़नेस सेंटर पर रुकेगी। इन स्टॉप से ​​तमिलनाडु और केरल में अच्छे से लोडिंग, अनलोडिंग और रीडिस्ट्रीब्यूशन हो पाएगा।

ट्रेन की बनावट

यह सर्विस ज़्यादा कैपेसिटी वाली पार्सल वैन के साथ डिज़ाइन की गई है, जिन्हें लगेज-कम-ब्रेक वैन से सपोर्ट मिलता है। हर कोच पर डेस्टिनेशन का लेबल लगा होता है ताकि हर स्टॉप पर हैंडलिंग ऑपरेशन तेज़ हो सके। इससे स्टेशन पर रुकने का समय कम होता है, भीड़ नहीं होती और पार्सल सॉर्टिंग की सटीकता बढ़ती है।

कमोडिटी और ट्रेडर को सपोर्ट

ट्रेन इनकी आवाजाही में मदद करेगी:

  • फल, सब्ज़ियां, डेयरी जैसी खराब होने वाली चीज़ें
  • तिरुप्पुर और कोयंबटूर से टेक्सटाइल और गारमेंट
  • इलेक्ट्रॉनिक्स और व्हाइट गुड्स
  • इंडस्ट्रियल और कंज्यूमर प्रोडक्ट

हफ़्ते की टाइमलाइन से समय पर रीजनल डिस्ट्रीब्यूशन पक्का करने में मदद मिलती है, जिससे मैन्युफैक्चरर और छोटे बिज़नेस को फ़ायदा होता है।

स्टेटिक GK टिप: इंडियन रेलवे दुनिया के सबसे बड़े मालवाहकों में से एक है और हर साल लगभग 1.5 बिलियन टन सामान हैंडल करता है।

एफिशिएंट और ट्रांसपेरेंट ऑपरेशन

एक टाइम-टेबल्ड लॉजिस्टिक्स मॉडल अकाउंटेबिलिटी और बेहतर फ्रेट प्लानिंग पक्का करता है। रियल-टाइम ट्रैकिंग टूल्स पंक्चुएलिटी और ज़्यादा लॉजिस्टिक्स विज़िबिलिटी में मदद करते हैं। यह मॉडल दक्षिणी भारत में ऑर्गनाइज़्ड फ्रेट नेटवर्क की बढ़ती डिमांड को सपोर्ट करता है।

इकोनॉमिक और लॉजिस्टिक्स असर

यह सर्विस दो बड़े पोर्ट्स — चेन्नई पोर्ट और न्यू मैंगलोर पोर्ट — को एक इनलैंड कमर्शियल बेल्ट के ज़रिए जोड़कर कोस्टल-टू-कोस्टल ट्रेड को बढ़ावा देती है। यह रोड से रेल पर मोडल शिफ्ट को बढ़ावा देता है, जिससे लॉजिस्टिक्स कॉस्ट और ट्रैवल डिले कम होते हैं।

स्टेटिक GK फैक्ट: भारत के डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFCs) को फ्रेट कॉस्ट को और कम करने और पूरे देश में हाई-स्पीड कार्गो ऑपरेशन को बढ़ाने के लिए डेवलप किया जा रहा है।

स्ट्रेटेजिक इंपॉर्टेंस

यह इनिशिएटिव तेज़, भरोसेमंद और कॉस्ट-इफेक्टिव फ्रेट सॉल्यूशंस को बढ़ाने के लिए दक्षिणी रेलवे के कमिटमेंट को दिखाता है। इससे तमिलनाडु और केरल में सप्लाई चेन में सुधार होने की उम्मीद है, जिससे MSMEs, खेती पर आधारित इंडस्ट्रीज़ और कोस्टल ट्रेडिंग इकोसिस्टम को फ़ायदा होगा।

स्टैटिक उस्तादियन करेंट अफेयर्स टेबल

विषय विवरण
प्रारम्भ करने वाला प्राधिकरण दक्षिण रेलवे
सेवा प्रकार भारत की पहली तट-से-तट पार्सल एक्सप्रेस सेवा
मुख्य टर्मिनल रोयापुरम (चेन्नै) और मंगलुरु सेंट्रल
आरम्भ तिथि 12 दिसम्बर 2025 पहली प्रस्थान सेवा
संचालन आवृत्ति साप्ताहिक निश्चित समय-सारणी
प्रमुख ठहराव सलेम, तिरुपुर, कोयम्बत्तूर, पलक्काड़, कोझिकोड, कन्नूर, कसारगोड
रेल संरचना विशेष उच्च-क्षमता पार्सल डिब्बे तथा लगेज-कम्ब-ब्रेक वैन
मुख्य उद्देश्य पार्सल परिवहन को तेज़ बनाना एवं क्षेत्रीय आपूर्ति-शृंखला को समर्थन
प्रमुख माल श्रेणियाँ शीघ्र नष्ट होने वाली वस्तुएँ, वस्त्र, घरेलू उपकरण, औद्योगिक सामान
आर्थिक प्रभाव तटीय संपर्क में वृद्धि और संगठित माल परिवहन को प्रोत्साहन
India’s First Coast to Coast Parcel Express Service
  1. भारत ने अपनी पहली कोस्टटूकोस्ट पार्सल एक्सप्रेस सर्विस शुरू की।
  2. यह ट्रेन चेन्नई के रॉयपुरम को मंगलुरु सेंट्रल से जोड़ती है।
  3. रॉयपुरम भारत का सबसे पुराना चालू रेलवे स्टेशन (1856) है।
  4. यह सर्विस 12 दिसंबर 2025 से शुरू होगी।
  5. यह भरोसेमंद लॉजिस्टिक्स के लिए हर हफ़्ते एक तय टाइमटेबल को फ़ॉलो करती है।
  6. इसके बड़े पड़ावों में सलेम, तिरुप्पुर, कोयंबटूर, पलक्कड़, कोझिकोड शामिल हैं।
  7. खास पार्सल वैन ज़्यादा क्षमता वाला माल ढुलाई पक्का करती हैं।
  8. डिब्बों पर तेज़ी से हैंडलिंग और सॉर्टिंग के लिए डेस्टिनेशन लेबल लगे होते हैं।
  9. यह सर्विस खराब होने वाली चीज़ों, टेक्सटाइल और इंडस्ट्रियल सामानों को सपोर्ट करती है।
  10. यह तमिलनाडु और केरल में सप्लाई चेन को बढ़ाती है।
  11. रियलटाइम ट्रैकिंग से माल की ट्रांसपेरेंसी और समय पर डिलीवरी बढ़ती है।
  12. यह रूट चेन्नई पोर्ट और मैंगलोर पोर्ट के ट्रेड लिंक को मज़बूत करता है।
  13. यह रोड ट्रांसपोर्ट से रेल फ्रेट में एक मॉडल शिफ्ट को बढ़ावा देता है।
  14. वीकली टाइमलाइन से MSMEs और एग्रीकल्चरल प्रोड्यूसर्स को फ़ायदा होता है।
  15. यह मॉडल दक्षिण भारत में लॉजिस्टिक्स एफिशिएंसी को बेहतर बनाता है।
  16. इंडियन रेलवे हर साल 5 बिलियन टन फ्रेट हैंडल करता है।
  17. यह सर्विस रोड कंजेशन और मौसम की वजह से होने वाली देरी को कम करती है।
  18. फिक्स्ड शेड्यूल से प्रेडिक्टेबल और ऑर्गनाइज़्ड फ्रेट सिस्टम बनते हैं।
  19. यह इनिशिएटिव रेलवे मॉडर्नाइज़ेशन और फ्रेट डाइवर्सिफिकेशन के साथ अलाइन है।
  20. यह इंडिया के कोस्टल ट्रेड इकोसिस्टम और इकोनॉमिक ग्रोथ को मज़बूत करता है।

Q1. भारत की पहली तट-से-तट पार्सल एक्सप्रेस किस रेलवे ज़ोन ने शुरू की?


Q2. पार्सल एक्सप्रेस के दोनों अंतिम स्टेशन कौन-से हैं?


Q3. मंगलूरू से पहली ट्रेन किस दिन रवाना होगी?


Q4. रॉयपेट्टा स्टेशन किस विशेषता के लिए जाना जाता है?


Q5. नई सेवा मुख्य रूप से किन वस्तुओं को समर्थन देगी?


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