नई रीजनल फ्रेट कनेक्टिविटी
सदर्न रेलवे ने भारत की पहली कोस्ट-टू-कोस्ट पार्सल एक्सप्रेस सर्विस शुरू की है। यह चेन्नई (रॉयपुरम) के पूर्वी तट को सीधे मंगलुरु सेंट्रल के पश्चिमी तट से जोड़ती है। यह रेलवे लॉजिस्टिक्स को मॉडर्न बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है, जिसमें डिलीवरी टाइमलाइन पक्की है।
स्टेटिक GK फैक्ट: चेन्नई का रॉयपुरम स्टेशन भारत का सबसे पुराना चालू रेलवे स्टेशन है, जो 1856 में बना था।
शेड्यूल लॉन्च और फ्रीक्वेंसी
मंगलुरु से पहली ट्रेन 12 दिसंबर 2025 को निकलेगी, जो अगले दिन चेन्नई पहुंचेगी। रॉयपुरम से वापसी सर्विस 16 दिसंबर 2025 को शुरू होगी। यह ट्रेन वीकली चलती है, जिससे ट्रेडर्स और मैन्युफैक्चरर्स के लिए एक तय फ्रेट शेड्यूल पक्का होता है। बड़े कमर्शियल हब वाला रूट
पार्सल एक्सप्रेस सलेम, तिरुप्पुर, कोयंबटूर, पलक्कड़, कोझिकोड, कन्नूर और कासरगोड जैसे ज़रूरी इंडस्ट्रियल और बिज़नेस सेंटर पर रुकेगी। इन स्टॉप से तमिलनाडु और केरल में अच्छे से लोडिंग, अनलोडिंग और रीडिस्ट्रीब्यूशन हो पाएगा।
ट्रेन की बनावट
यह सर्विस ज़्यादा कैपेसिटी वाली पार्सल वैन के साथ डिज़ाइन की गई है, जिन्हें लगेज-कम-ब्रेक वैन से सपोर्ट मिलता है। हर कोच पर डेस्टिनेशन का लेबल लगा होता है ताकि हर स्टॉप पर हैंडलिंग ऑपरेशन तेज़ हो सके। इससे स्टेशन पर रुकने का समय कम होता है, भीड़ नहीं होती और पार्सल सॉर्टिंग की सटीकता बढ़ती है।
कमोडिटी और ट्रेडर को सपोर्ट
ट्रेन इनकी आवाजाही में मदद करेगी:
- फल, सब्ज़ियां, डेयरी जैसी खराब होने वाली चीज़ें
- तिरुप्पुर और कोयंबटूर से टेक्सटाइल और गारमेंट
- इलेक्ट्रॉनिक्स और व्हाइट गुड्स
- इंडस्ट्रियल और कंज्यूमर प्रोडक्ट
हफ़्ते की टाइमलाइन से समय पर रीजनल डिस्ट्रीब्यूशन पक्का करने में मदद मिलती है, जिससे मैन्युफैक्चरर और छोटे बिज़नेस को फ़ायदा होता है।
स्टेटिक GK टिप: इंडियन रेलवे दुनिया के सबसे बड़े मालवाहकों में से एक है और हर साल लगभग 1.5 बिलियन टन सामान हैंडल करता है।
एफिशिएंट और ट्रांसपेरेंट ऑपरेशन
एक टाइम-टेबल्ड लॉजिस्टिक्स मॉडल अकाउंटेबिलिटी और बेहतर फ्रेट प्लानिंग पक्का करता है। रियल-टाइम ट्रैकिंग टूल्स पंक्चुएलिटी और ज़्यादा लॉजिस्टिक्स विज़िबिलिटी में मदद करते हैं। यह मॉडल दक्षिणी भारत में ऑर्गनाइज़्ड फ्रेट नेटवर्क की बढ़ती डिमांड को सपोर्ट करता है।
इकोनॉमिक और लॉजिस्टिक्स असर
यह सर्विस दो बड़े पोर्ट्स — चेन्नई पोर्ट और न्यू मैंगलोर पोर्ट — को एक इनलैंड कमर्शियल बेल्ट के ज़रिए जोड़कर कोस्टल-टू-कोस्टल ट्रेड को बढ़ावा देती है। यह रोड से रेल पर मोडल शिफ्ट को बढ़ावा देता है, जिससे लॉजिस्टिक्स कॉस्ट और ट्रैवल डिले कम होते हैं।
स्टेटिक GK फैक्ट: भारत के डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFCs) को फ्रेट कॉस्ट को और कम करने और पूरे देश में हाई-स्पीड कार्गो ऑपरेशन को बढ़ाने के लिए डेवलप किया जा रहा है।
स्ट्रेटेजिक इंपॉर्टेंस
यह इनिशिएटिव तेज़, भरोसेमंद और कॉस्ट-इफेक्टिव फ्रेट सॉल्यूशंस को बढ़ाने के लिए दक्षिणी रेलवे के कमिटमेंट को दिखाता है। इससे तमिलनाडु और केरल में सप्लाई चेन में सुधार होने की उम्मीद है, जिससे MSMEs, खेती पर आधारित इंडस्ट्रीज़ और कोस्टल ट्रेडिंग इकोसिस्टम को फ़ायदा होगा।
स्टैटिक उस्तादियन करेंट अफेयर्स टेबल
| विषय | विवरण |
| प्रारम्भ करने वाला प्राधिकरण | दक्षिण रेलवे |
| सेवा प्रकार | भारत की पहली तट-से-तट पार्सल एक्सप्रेस सेवा |
| मुख्य टर्मिनल | रोयापुरम (चेन्नै) और मंगलुरु सेंट्रल |
| आरम्भ तिथि | 12 दिसम्बर 2025 पहली प्रस्थान सेवा |
| संचालन आवृत्ति | साप्ताहिक निश्चित समय-सारणी |
| प्रमुख ठहराव | सलेम, तिरुपुर, कोयम्बत्तूर, पलक्काड़, कोझिकोड, कन्नूर, कसारगोड |
| रेल संरचना | विशेष उच्च-क्षमता पार्सल डिब्बे तथा लगेज-कम्ब-ब्रेक वैन |
| मुख्य उद्देश्य | पार्सल परिवहन को तेज़ बनाना एवं क्षेत्रीय आपूर्ति-शृंखला को समर्थन |
| प्रमुख माल श्रेणियाँ | शीघ्र नष्ट होने वाली वस्तुएँ, वस्त्र, घरेलू उपकरण, औद्योगिक सामान |
| आर्थिक प्रभाव | तटीय संपर्क में वृद्धि और संगठित माल परिवहन को प्रोत्साहन |





