जनवरी 21, 2026 6:55 अपराह्न

भारत का डेमोग्राफिक रास्ता स्थिर होने की ओर

करंट अफेयर्स: आबादी स्थिर होना, टोटल फर्टिलिटी रेट, डेमोग्राफिक बदलाव, महिला साक्षरता, आबादी का अनुमान, बढ़ती उम्र की आबादी, वर्कफोर्स ट्रेंड, गर्भनिरोधक तक पहुंच, गांव-शहरी माइग्रेशन, आर्थिक विकास

India’s Demographic Path Towards Stabilisation

भारत का बदलता आबादी पैटर्न

भारत एक अहम डेमोग्राफिक दौर में जा रहा है, जिसमें फर्टिलिटी लेवल में लगातार गिरावट आ रही है। टोटल फर्टिलिटी रेट (TFR) अब 1.9 पर है, देश एक ऐसी आबादी की ओर बढ़ रहा है जिसके 2080 तक लगभग 1.8–1.9 बिलियन तक स्थिर होने की उम्मीद है। यह शिक्षा, हेल्थकेयर और सामाजिक विकास में सुधार से होने वाले बदलाव को दिखाता है।

स्टैटिक GK फैक्ट: भारत हर 10 साल में अपनी जनगणना करता है, पहली मॉडर्न जनगणना 1872 में हुई थी।

फर्टिलिटी लेवल में गिरावट

TFR का 2000 में 3.5 से घटकर 1.9 होना, हाई से मॉडरेट फर्टिलिटी में बदलाव दिखाता है। रिप्लेसमेंट लेवल 2.1 से कम TFR का मतलब है लंबे समय तक स्थिर रहना, न कि अनियंत्रित ग्रोथ। यह गिरावट अलग-अलग सामाजिक-आर्थिक वर्गों और राज्यों में दिखाई देती है।

स्टैटिक GK फैक्ट: रिप्लेसमेंट-लेवल फर्टिलिटी यह पक्का करती है कि हर पीढ़ी बिना माइग्रेशन के खुद को ठीक वैसे ही बदल ले।

जनसंख्या स्थिरीकरण के पीछे के कारण

महिला शिक्षा और ऑटोनॉमी

महिलाओं की ज़्यादा साक्षरता दर ने महिलाओं को परिवार नियोजन के फैसलों पर ज़्यादा कंट्रोल दिया है। पढ़ी-लिखी महिलाएं शादी और बच्चे पैदा करने में देरी करती हैं, जिससे परिवार छोटे होते हैं।

स्टैटिक GK टिप: केरल 1991 में भारत का पहला पूरी तरह से साक्षर राज्य बना।

हेल्थकेयर और कॉन्ट्रासेप्शन तक पहुंच

आधुनिक कॉन्ट्रासेप्टिव की बेहतर उपलब्धता और बेहतर रिप्रोडक्टिव हेल्थकेयर सर्विस से कपल अपने परिवार की प्लानिंग ज़्यादा असरदार तरीके से कर पाते हैं।

शादी और करियर के विकल्पों में बदलाव

बदलती सामाजिक-आर्थिक उम्मीदें लोगों को – खासकर महिलाओं को – शादी से पहले पढ़ाई और करियर बनाने के लिए प्रोत्साहित करती हैं। इससे स्वाभाविक रूप से फर्टिलिटी रेट कम हो जाता है।

आर्थिक बदलाव

जैसे-जैसे इनकम बढ़ती है, परिवार बच्चों की परवरिश के फाइनेंशियल खर्चों को भी ध्यान में रखते हैं। शहरीकरण और लाइफस्टाइल में बदलाव से परिवार और भी छोटे और प्लान किए हुए बनते हैं।

राज्य-स्तर के ट्रेंड

भारत का डेमोग्राफिक बदलाव उन राज्यों में दिख रहा है जो रिप्लेसमेंट-लेवल फर्टिलिटी तक जल्दी पहुँच गए थे।

  • केरल, जहाँ पब्लिक हेल्थ और एजुकेशन सिस्टम मज़बूत हैं, ने 1989 में रिप्लेसमेंट-लेवल फर्टिलिटी हासिल की और अब उसका TFR 1.5 है।
  • पश्चिम बंगाल में तेज़ी से डेमोग्राफिक बदलाव हो रहा है, जहाँ TFR 1.3 है, जो देश में सबसे कम है।

स्टैटिक GK फैक्ट: सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (SRS) भारत में ऑफिशियल फर्टिलिटी और मॉर्टेलिटी डेटा बनाता है।

उभरती डेमोग्राफिक चुनौतियाँ

भारत की स्थिर होती आबादी नई चुनौतियाँ ला रही है जिन पर लंबे समय तक पॉलिसी पर ध्यान देने की ज़रूरत है।

  • बढ़ती उम्र की आबादी से हेल्थकेयर, पेंशन और बुज़ुर्गों के सपोर्ट सिस्टम की माँग बढ़ेगी।
  • युवाओं की कम संख्या से वर्कफोर्स की कमी हो सकती है, जिससे इकोनॉमिक प्रोडक्टिविटी पर असर पड़ सकता है।
  • माइग्रेशन पैटर्न और तेज़ हो सकते हैं, क्योंकि युवा वर्कर शहरों की ओर जा रहे हैं, और पीछे बढ़ती उम्र वाली ग्रामीण कम्युनिटीज़ को छोड़ रहे हैं। भारत की आबादी का भविष्य

भारत का स्थिरीकरण की ओर बढ़ना एक मैच्योर डेमोग्राफिक प्रोफ़ाइल को दिखाता है। शिक्षा, हेल्थकेयर और रोज़गार के मौकों में लगातार निवेश के साथ, यह बदलाव बैलेंस्ड और सस्टेनेबल डेवलपमेंट में मदद कर सकता है। फर्टिलिटी में कमी सिर्फ़ एक स्टैटिस्टिकल बदलाव नहीं है, बल्कि भारत की सोशियो-इकोनॉमिक तरक्की में एक अहम मील का पत्थर है।

Static Usthadian Current Affairs Table

Topic Detail
वर्तमान TFR 2025 में 1.9
प्रतिस्थापन स्तर प्रति महिला 2.1 बच्चे
अनुमानित जनसंख्या 2080 लगभग 1.8–1.9 अरब
प्रमुख कारण महिला साक्षरता, स्वास्थ्य सेवा पहुंच, नगरीकरण
केरल TFR 1.5
पश्चिम बंगाल TFR 1.3
प्रमुख चुनौती वृद्ध होती जनसंख्या
कार्यबल प्रवृत्ति श्रम की संभावित कमी
प्रवास पैटर्न युवाओं का शहरी क्षेत्रों की ओर झुकाव
दीर्घकालिक दृष्टिकोण स्थिर होती जनसंख्या संरचना
India’s Demographic Path Towards Stabilisation
  1. भारत का कुल प्रजनन दर (टी.एफ़.आर.) 1.9 है, जो प्रतिस्थापन स्तर से कम है।
  2. भारत की जनसंख्या वर्ष 2080 तक 8–1.9 अरब पर स्थिर हो सकती है।
  3. वर्ष 2000 में फर्टिलिटी 5 थी, जो घटकर अब 1.9 हो गई है।
  4. महिला साक्षरता प्रजनन दर में कमी का एक बड़ा कारण है।
  5. बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच ने परिवार नियोजन को मजबूत किया।
  6. महिलाओं द्वारा विवाह और करियर में देरी करने से प्रजनन दर कम होती है।
  7. बढ़ती आय छोटे परिवार अपनाने को बढ़ावा देती है।
  8. शहरीकरण जनसांख्यिकीय बदलाव को तेज करता है।
  9. केरल ने वर्ष 1989 में प्रतिस्थापन स्तर की प्रजनन दर हासिल कर ली थी।
  10. पश्चिम बंगाल का टी.एफ़.आर. 3 है, जो भारत में सबसे कम है।
  11. भारत की बुज़ुर्ग होती जनसंख्या को अधिक स्वास्थ्य सेवाओं और पेंशन सहायता की आवश्यकता होगी।
  12. भविष्य में कार्यबल को मज़दूर कमी का सामना करना पड़ सकता है।
  13. युवाओं का शहरों की ओर पलायन गाँवों में उम्र बढ़ने का अंतर और बढ़ाता है।
  14. वर्ष 1872 से हर दस वर्ष में जनगणना की जाती है।
  15. नमूना पंजीकरण प्रणाली (एस.आर.एस.) भारत का आधिकारिक प्रजनन और मृत्यु दर डेटा प्रदान करती है।
  16. आर्थिक आधुनिकीकरण जनसंख्या स्थिरीकरण में मदद करता है।
  17. बेहतर गर्भनिरोधक उपलब्धता से दीर्घकालिक जनसांख्यिकीय बदलाव होता है।
  18. सामाजिक विकास से प्रजनन अधिकार और निर्णयस्वतंत्रता में सुधार होता है।
  19. भारत का जनसांख्यिकीय बदलाव सतत विकास को बढ़ावा देता है।
  20. जनसंख्या का स्थिरीकरण भारत की सामाजिकआर्थिक प्रगति में एक बड़ा मील का पत्थर है।

Q1. भारत की वर्तमान कुल प्रजनन दर (TFR) क्या है?


Q2. प्रतिस्थापन-स्तर प्रजनन दर (Replacement-level fertility) क्या होती है?


Q3. किस राज्य ने 1989 में ही प्रतिस्थापन-स्तर प्रजनन प्राप्त कर लिया था?


Q4. स्थिर होती जनसंख्या से उत्पन्न प्रमुख जनसांख्यिकीय चुनौती क्या है?


Q5. वर्ष 2080 के आसपास भारत की अनुमानित जनसंख्या कितनी होगी?


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