रणनीतिक बंदरगाहों का चयन
भारत ने आधिकारिक रूप से गुजरात के दीेंदयाल बंदरगाह, तमिलनाडु के वी. ओ. चिदंबरनार बंदरगाह, और ओडिशा के पारादीप बंदरगाह को ग्रीन हाइड्रोजन हब के रूप में नामित किया है। यह कदम राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के तहत स्वच्छ हाइड्रोजन के उत्पादन, भंडारण, परिवहन और उपयोग के लिए एक मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र बनाने की दिशा में उठाया गया है।
इन बंदरगाहों का चयन उनकी उच्च ऊर्जा मांग, औद्योगिक घनत्व और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में रणनीतिक स्थिति के कारण किया गया है। ये बंदरगाह शिपिंग, लॉजिस्टिक्स, उर्वरक और रिफाइनिंग जैसे उद्योगों को एकीकृत रूप से समर्थन देंगे।
स्थैतिक जीके तथ्य: भारत में 200 से अधिक परिचालन बंदरगाह हैं, जिनमें से 12 प्रमुख बंदरगाह 95% माल यातायात संभालते हैं।
दृष्टि और रणनीति
2023 में शुरू किए गए राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन का उद्देश्य भारत को ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन और निर्यात में वैश्विक नेता बनाना है। इन हबों का विकास चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा ताकि अवसंरचना की तैयारी, तकनीकी तैनाती और वाणिज्यिक संचालन को सुगम बनाया जा सके।
ये हब भारी उद्योगों, समुद्री व्यापार और निर्यातोन्मुखी क्षेत्रों में क्लस्टर-आधारित हाइड्रोजन उत्पादन को प्रोत्साहित करेंगे। यह संरचित दृष्टिकोण भारत के 2070 तक नेट-ज़ीरो उत्सर्जन लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद करेगा।
स्थैतिक जीके टिप: ग्रीन हाइड्रोजन जल के विद्युत अपघटन (Electrolysis) द्वारा नवीकरणीय ऊर्जा से बनाया जाता है और यह शून्य कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन करता है।
सरकारी पहलें
नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) ने हब विकास को बढ़ावा देने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। प्रमुख पहलें हैं:
• कोर हाइड्रोजन अवसंरचना के लिए वित्तीय सहायता
• सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) को प्रोत्साहन
• सतत संचालन के लिए क्लस्टर-आधारित योजना का प्रचार
इन पहलों से भारत की स्वच्छ ऊर्जा पारिस्थितिकी तंत्र निर्माण के प्रति प्रतिबद्धता और वैश्विक ग्रीन हाइड्रोजन बाजार में नेतृत्व की स्थिति स्पष्ट होती है।
स्थैतिक जीके तथ्य: भारत का लक्ष्य 2030 तक प्रति वर्ष 5 मिलियन टन (MTPA) ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता प्राप्त करना है।
आर्थिक और औद्योगिक प्रभाव
ये हब समुद्री व्यापार, औद्योगिक विकास और नवीकरणीय ऊर्जा अपनाने पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालेंगे। हाइड्रोजन अवसंरचना से युक्त बंदरगाह जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता को कम करेंगे और सतत लॉजिस्टिक्स एवं भारी उद्योगों को प्रोत्साहित करेंगे।
यह पहल ग्रीन हाइड्रोजन के निर्यात के अवसर भी खोलेगी, जिससे भारत के वैश्विक जलवायु लक्ष्यों और पेरिस समझौते (Paris Agreement) की प्रतिबद्धताओं के अनुरूप प्रगति होगी।
स्थैतिक जीके टिप: भारत ने 2016 में पेरिस समझौते की पुष्टि की थी और 2030 तक कार्बन उत्सर्जन तीव्रता में 33–35% की कमी का लक्ष्य रखा है।
स्थैतिक “Usthadian” वर्तमान घटनाओं की सारणी
| विषय | विवरण |
| नामित बंदरगाह | दीदयाल बंदरगाह (गुजरात), वी. ओ. चिदंबरनार बंदरगाह (तमिलनाडु), पारादीप बंदरगाह (ओडिशा) |
| प्रशासनिक मंत्रालय | नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) |
| पहल | राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन |
| मिशन आरंभ वर्ष | 2023 |
| उद्देश्य | ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन, भंडारण, परिवहन एवं उपयोग |
| रणनीतिक महत्व | औद्योगिक केंद्र, समुद्री व्यापार, निर्यातोन्मुख अवसंरचना |
| लक्ष्य | भारत का 2070 तक नेट-ज़ीरो उत्सर्जन |
| विकास मॉडल | क्लस्टर आधारित, चरणबद्ध अवसंरचना और तकनीकी तैनाती |
| वित्तीय समर्थन | कोर अवसंरचना और सार्वजनिक-निजी सहयोग |





