विज़न 2035 के तहत लॉन्च
India और United Kingdom ने 18 फरवरी, 2026 को चौथे इंडिया-UK एनर्जी डायलॉग के दौरान इंडिया-UK ऑफशोर विंड टास्कफोर्स लॉन्च किया। इस पहल का अनावरण केंद्रीय मंत्री Pralhad Joshi और UK के विदेश सचिव David Lammy ने किया। इसका मकसद विज़न 2035 के तहत ऑफशोर विंड डिप्लॉयमेंट में तेज़ी लाना और क्लीन एनर्जी कोऑपरेशन को मज़बूत करना है।
टास्कफोर्स रिन्यूएबल एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर में मापी जा सकने वाली प्रोग्रेस देने पर फोकस करता है। यह ऑफशोर विंड टेक्नोलॉजी में UK की एक्सपर्टीज़ को इंडिया की बढ़ती रिन्यूएबल एनर्जी डिमांड के साथ जोड़ता है। यह पार्टनरशिप इंडिया को टेक्निकल कैपेसिटी बनाने और एक मज़बूत ऑफशोर विंड इकोसिस्टम डेवलप करने में मदद करेगी।
स्टेटिक GK फैक्ट: यूनाइटेड किंगडम अभी ऑफशोर विंड कैपेसिटी में ग्लोबल लीडर्स में से एक है, जिसके बड़े प्रोजेक्ट्स नॉर्थ सी में हैं।
टास्कफोर्स के मुख्य पिलर
टास्कफोर्स तीन स्ट्रेटेजिक पिलर के ज़रिए काम करता है। पहला पिलर इकोसिस्टम प्लानिंग और मार्केट डिज़ाइन पर फोकस करता है, जिसमें सीबेड लीजिंग फ्रेमवर्क और रेगुलेटरी क्लैरिटी शामिल है। इससे ट्रांसपेरेंट पॉलिसी और इन्वेस्टर का भरोसा पक्का होता है।
दूसरा पिलर इंफ्रास्ट्रक्चर और सप्लाई चेन डेवलपमेंट को टारगेट करता है, जिसमें पोर्ट मॉडर्नाइजेशन, टर्बाइन मैन्युफैक्चरिंग और स्पेशल मरीन वेसल शामिल हैं। इससे भारत की घरेलू मैन्युफैक्चरिंग क्षमताएं मजबूत होंगी और इंपोर्ट पर निर्भरता कम होगी।
तीसरा पिलर फाइनेंसिंग और रिस्क कम करने पर जोर देता है, जिसमें ब्लेंडेड फाइनेंस मॉडल और इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टमेंट मोबिलाइजेशन शामिल हैं। इन उपायों का मकसद इन्वेस्टमेंट रिस्क को कम करना और प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी को बढ़ावा देना है।
स्टैटिक GK टिप: भारत का रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट Ministry of New and Renewable Energy द्वारा रेगुलेट किया जाता है, जिसकी स्थापना 1992 में हुई थी।
गुजरात और तमिलनाडु में ऑफशोर विंड पोटेंशियल
भारत ने Gujarat कोस्ट और Tamil Nadu कोस्ट के साथ उम्मीद जगाने वाले ऑफशोर विंड ज़ोन की पहचान की है। National Institute of Wind Energy (NIWE) ने विंड पोटेंशियल और फिजिबिलिटी का आकलन करने के लिए स्टडी कीं। ये कोस्टल रीजन बड़े पैमाने पर एनर्जी जेनरेशन के लिए सही तेज और एक जैसी विंड स्पीड देते हैं।
शुरुआती प्रोजेक्ट डेवलपमेंट में मदद के लिए, सरकार ने 7,453 करोड़ रुपये की वायबिलिटी गैप फंडिंग (VGF) को मंज़ूरी दी। इस फाइनेंशियल मदद से शुरुआती इंफ्रास्ट्रक्चर की ज़्यादा लागत को कम करने में मदद मिलेगी। ऑफशोर विंड प्रोजेक्ट्स के लिए एडवांस्ड मरीन इंजीनियरिंग, खास लॉजिस्टिक्स और ग्रिड कनेक्टिविटी की ज़रूरत होती है।
स्टेटिक GK फैक्ट: नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ विंड एनर्जी का हेडक्वार्टर चेन्नई में है और यह विंड रिसोर्स असेसमेंट के लिए भारत की प्रमुख संस्था है।
ग्रीन हाइड्रोजन मिशन में भूमिका
टास्कफोर्स भारत के नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के साथ जुड़ा हुआ है, जिसका मकसद भारत को हाइड्रोजन प्रोडक्शन का ग्लोबल हब बनाना है। ऑफशोर विंड कोस्टल हाइड्रोजन प्रोडक्शन हब को भरोसेमंद रिन्यूएबल एनर्जी सप्लाई कर सकती है। इससे इंडस्ट्रियल इस्तेमाल के लिए स्थिर और सस्ती क्लीन एनर्जी पक्की होती है।
भारत अभी ग्लोबल क्लीन एनर्जी इनिशिएटिव के तहत हाइड्रोजन ब्रेकथ्रू गोल में आगे है। ऑफशोर विंड रिन्यूएबल एनर्जी की लागत कम करने और ग्रीन हाइड्रोजन कॉम्पिटिटिवनेस को मज़बूत करने में मदद करेगी। इससे भारत की इंडस्ट्रियल सस्टेनेबिलिटी और एक्सपोर्ट पोटेंशियल बढ़ेगा।
स्टेटिक GK टिप: नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन 2023 में लॉन्च किया गया था, जिसका लक्ष्य 2030 तक हर साल 5 मिलियन टन हाइड्रोजन प्रोडक्शन कैपेसिटी हासिल करना है।
एनर्जी ट्रांज़िशन के लिए महत्व
भारत की इंस्टॉल्ड नॉन–फॉसिल फ्यूल कैपेसिटी 272 GW को पार कर गई है, जिसमें 141 GW सोलर और 55 GW विंड पावर शामिल है। ऑफशोर विंड रिन्यूएबल एनर्जी बढ़ाने के अगले फेज़ को दिखाता है। यह लगातार पावर जेनरेशन देता है और ग्रिड स्टेबिलिटी को सपोर्ट करता है।
इंडिया-UK ऑफशोर विंड टास्कफोर्स एनर्जी सिक्योरिटी को बेहतर बनाएगा, फॉसिल फ्यूल पर डिपेंडेंस कम करेगा और क्लाइमेट गोल्स को सपोर्ट करेगा। यह विज़न 2035 के तहत ग्लोबल रिन्यूएबल एनर्जी लीडर के तौर पर भारत की पोजीशन को मज़बूत करता है।
स्टेटिक GK फैक्ट: भारत ने अपने क्लाइमेट टारगेट्स के तहत 2030 तक 500 GW नॉन–फॉसिल फ्यूल कैपेसिटी पाने का कमिटमेंट किया है।
Static Usthadian Current Affairs Table
| विषय | विवरण |
| टास्कफोर्स का नाम | इंडिया–यूके ऑफशोर विंड टास्कफोर्स |
| लॉन्च तिथि | 18 फरवरी 2026 |
| साझेदार देश | भारत और यूनाइटेड किंगडम |
| पहल का ढांचा | विज़न 2035 |
| वित्तीय सहायता | ₹7,453 करोड़ वायबिलिटी गैप फंडिंग |
| प्रमुख स्थान | गुजरात तट और तमिलनाडु तट |
| सहयोगी संस्था | National Institute of Wind Energy |
| संबंधित मिशन | राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन |
| भारत की नवीकरणीय क्षमता | 272 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता |
| सामरिक लक्ष्य | अपतटीय पवन ऊर्जा और ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ करना |





