रोडमैप की घोषणा
विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) ने अप्रैल 2026 में पोस्ट–क्वांटम क्रिप्टोग्राफी (PQC) माइग्रेशन के लिए एक राष्ट्रीय रोडमैप जारी किया है। इस पहल का उद्देश्य भारत के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को भविष्य के क्वांटम खतरों से सुरक्षित करना है।
इसका मुख्य फोकस ऐसे क्रिप्टोग्राफिक सिस्टम विकसित करने पर है जो शक्तिशाली क्वांटम कंप्यूटरों के आने के बाद भी सुरक्षित रहें। यह कदम लंबे समय तक डिजिटल संप्रभुता और डेटा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बहुत ज़रूरी है।
स्टैटिक GK तथ्य: विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST), भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत काम करता है।
PQC क्यों ज़रूरी है?
क्वांटम कंप्यूटिंग में हो रही प्रगति मौजूदा एन्क्रिप्शन तरीकों के लिए एक गंभीर खतरा पैदा करती है। RSA (Rivest–Shamir–Adleman) और Elliptic Curve Cryptography (ECC) जैसे मौजूदा सिस्टम बैंकिंग और संचार के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होते हैं।
क्वांटम कंप्यूटर जटिल गणितीय समस्याओं को क्लासिकल सिस्टम की तुलना में कहीं ज़्यादा तेज़ी से हल कर सकते हैं। इससे पारंपरिक एन्क्रिप्शन भविष्य के हमलों के प्रति कमज़ोर पड़ जाता है।
स्टैटिक GK टिप: RSA एन्क्रिप्शन प्राइम फैक्टराइजेशन की कठिनाई पर आधारित होता है, जो संख्या सिद्धांत (number theory) का एक मुख्य कॉन्सेप्ट है।
साइबर सुरक्षा के लिए जोखिम
क्वांटम कंप्यूटिंग मौजूदा एन्क्रिप्शन को तोड़ने का कारण बन सकती है, जिससे संवेदनशील जानकारी उजागर हो सकती है। इसमें वित्तीय डेटा, ईमेल और सरकारी संचार शामिल हैं।
एक और बड़ी चिंता “अभी इकट्ठा करो, बाद में डिक्रिप्ट करो” (Harvest Now, Decrypt Later) की रणनीति है। आज एन्क्रिप्ट किया गया डेटा स्टोर किया जा सकता है और जब क्वांटम सिस्टम काफी शक्तिशाली हो जाएंगे, तब उसे डिक्रिप्ट किया जा सकता है।
बिजली, दूरसंचार और शासन जैसे क्षेत्रों के लिए भी एक सिस्टम से जुड़ा जोखिम है। क्रिप्टोग्राफिक सुरक्षा में किसी भी तरह की गड़बड़ी से ज़रूरी इंफ्रास्ट्रक्चर बाधित हो सकता है।
राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं
रक्षा और खुफिया डेटा के उजागर होने से राष्ट्रीय सुरक्षा कमज़ोर पड़ सकती है। इससे वैश्विक भू–राजनीति में रणनीतिक कमज़ोरियां भी पैदा हो सकती हैं।
इसलिए, संवेदनशील राष्ट्रीय जानकारी की सुरक्षा के लिए एन्क्रिप्शन सिस्टम को सुरक्षित रखना बहुत ज़रूरी है। PQC ऐसे भविष्य के खतरों के खिलाफ मज़बूती सुनिश्चित करता है।
भारत की क्वांटम पहलें
भारत क्वांटम टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में सक्रिय रूप से अपनी क्षमताएं बढ़ा रहा है। राष्ट्रीय क्वांटम मिशन का उद्देश्य समर्पित अनुसंधान केंद्रों के साथ एक स्वदेशी क्वांटम इकोसिस्टम तैयार करना है।
DST का Quantum-Enabled Science and Technology (QuEST) कार्यक्रम इस क्षेत्र में अनुसंधान और प्रतिभा विकास को बढ़ावा देता है। यह युवा वैज्ञानिकों को क्वांटम टेक्नोलॉजी में प्रशिक्षित करने में मदद करता है। कई राज्यों ने भी आंध्र प्रदेश में अमरावती क्वांटम वैली (AQV), कर्नाटक क्वांटम मिशन और तेलंगाना क्वांटम रणनीति जैसी पहलें शुरू की हैं।
स्टेटिक GK तथ्य: नेशनल क्वांटम मिशन को 2023 में रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए एक बड़े बजट के साथ मंज़ूरी दी गई थी।
भविष्य का नज़रिया
PQC रोडमैप भविष्य के लिए तैयार साइबर सुरक्षा की दिशा में एक सक्रिय कदम है। यह सुनिश्चित करता है कि भारत उभरते खतरों से डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा करने में सबसे आगे रहे।
जैसे-जैसे क्वांटम कंप्यूटिंग विकसित होगी, सुरक्षित क्रिप्टोग्राफ़िक मानकों को जल्दी अपनाना ज़रूरी होगा। यह रोडमैप वैश्विक डिजिटल सुरक्षा ढांचों में भारत की स्थिति को मज़बूत करता है।
Static Usthadian Current Affairs Table
| Topic | Detail |
| पहल | पीक्यूसी माइग्रेशन रोडमैप |
| जारी किया गया | विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग |
| तिथि | अप्रैल 2026 |
| मुख्य उद्देश्य | क्वांटम खतरों के विरुद्ध सुरक्षित एन्क्रिप्शन |
| संवेदनशील एल्गोरिदम | आरएसए, ईसीसी |
| प्रमुख जोखिम | हार्वेस्ट नाउ, डिक्रिप्ट लेटर |
| प्रमुख मिशन | राष्ट्रीय क्वांटम मिशन |
| अनुसंधान कार्यक्रम | क्वेस्ट |
| राज्य पहलें | एक्यूवी, कर्नाटक क्वांटम मिशन, तेलंगाना रणनीति |
| मुख्य फोकस | डिजिटल संप्रभुता और साइबर सुरक्षा |





