देशी जीन थेरेपी पहल
भारत ने आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी भगवान बिरसा मुंडा के सम्मान में अपनी पहली देसी CRISPR-बेस्ड जीन थेरेपी लॉन्च की है, जिसका नाम BIRSA 101 है। यह थेरेपी CSIR–इंस्टीट्यूट ऑफ़ जीनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलॉजी (IGIB) ने डेवलप की है, जो भारत के बायोमेडिकल इनोवेशन में एक बड़ा कदम है। इस थेरेपी का मकसद जेनेटिक डिसऑर्डर सिकल सेल बीमारी (SCD) को ठीक करना है, जो आदिवासी आबादी को बहुत ज़्यादा प्रभावित करता है।
स्टैटिक GK फैक्ट: भारत में 700 से ज़्यादा ऑफिशियली मान्यता प्राप्त आदिवासी कम्युनिटी हैं, जिनमें से कई को SCD का ज़्यादा रिस्क है। जीन थेरेपी को समझना
जीन थेरेपी एक मेडिकल तकनीक है जो मरीज़ के सेल्स में नए या बदले हुए जीन डालकर बीमारियों का इलाज करती है या उन्हें रोकती है। BIRSA 101 में, यह थेरेपी रेड ब्लड सेल्स में खराब या गायब जीन को हेल्दी कॉपी से बदलकर काम करती है। यह सुधार हीमोग्लोबिन के सही काम को ठीक करता है और ऑक्सीजन ट्रांसपोर्ट को बेहतर बनाता है।
स्टैटिक GK टिप: दुनिया की पहली मंज़ूर जीन थेरेपी, ग्लीबेरा, 2012 में लिपोप्रोटीन लाइपेस की कमी के लिए शुरू की गई थी।
इलाज में CRISPR की भूमिका
CRISPR, जिसका मतलब है क्लस्टर्ड रेगुलरली इंटरस्पेस्ड शॉर्ट पैलिंड्रोमिक रिपीट्स, एक जीनोम-एडिटिंग टेक्नोलॉजी है जो DNA में सटीक बदलाव करने की इजाज़त देती है। यह दो खास हिस्सों का इस्तेमाल करती है:
- गाइड RNA, जो टारगेट DNA सीक्वेंस का पता लगाता है।
- Cas9 प्रोटीन, मॉलिक्यूलर कैंची जो जीन बदलने के लिए DNA को काटती है।
यह सटीकता मरीज़ के सेल्स में सिकल सेल म्यूटेशन को टारगेट करके ठीक करने में मदद करती है, जिससे ऑफ-टारगेट असर कम होते हैं।
स्टैटिक GK फैक्ट: CRISPR टेक्नोलॉजी सबसे पहले 1987 में खोजी गई थी और इसने दुनिया भर में जेनेटिक इंजीनियरिंग में क्रांति ला दी है।
भारत में सिकल सेल डिज़ीज़
सिकल सेल डिज़ीज़ एक खानदानी बीमारी है जो रेड ब्लड सेल्स में हीमोग्लोबिन पर असर डालती है, जिससे वे सिकल जैसी सख्त हो जाती हैं। ये असामान्य सेल्स ब्लड फ्लो को रोकती हैं, जिससे दर्द, अंगों को नुकसान और इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। भारत में, SCD ज़्यादातर अनुसूचित जनजातियों को प्रभावित करता है, ST आबादी में 86 में से 1 बच्चा इससे प्रभावित होता है।
स्टैटिक GK फैक्ट: भारत में आदिवासी आबादी में SCD का सबसे ज़्यादा फैलाव ओडिशा, छत्तीसगढ़ और झारखंड में है।
enFnCas9 सहयोग
यह थेरेपी enFnCas9 का इस्तेमाल करती है, जो IGIB द्वारा बनाया गया एक इंजीनियर्ड हाई-फिडेलिटी CRISPR-Cas9 प्लेटफॉर्म है। सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के साथ पार्टनरशिप का मकसद इस टेक्नोलॉजी को बढ़ाना है, ताकि यह देश भर में जेनेटिक बीमारियों के लिए एक सस्ती थेरेपी बन सके।
स्टेटिक GK टिप: सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया, डोज़ बनाने के हिसाब से दुनिया की सबसे बड़ी वैक्सीन बनाने वाली कंपनी है।
भविष्य के असर
BIRSA 101 के लॉन्च से भारत जीनोम-एडिटिंग थेरेपी में सबसे आगे हो गया है। यह आदिवासी स्वास्थ्य, सटीक दवा और सस्ते बायोटेक्नोलॉजिकल इनोवेशन में एक बड़ी कामयाबी है। यह पहल भारत में आम दूसरी जेनेटिक बीमारियों पर रिसर्च के रास्ते भी खोलती है।
स्टैटिक उस्तादियन करेंट अफेयर्स टेबल
| विषय | विवरण |
| उपचार का नाम | बिरसा–101 |
| विकसित करने वाला संस्थान | सी.एस.आई.आर.–जीनोमिक्स एवं समन्वित जीवविज्ञान संस्थान (आई.जी.आई.बी.) |
| लक्षित रोग | सिकल सेल रोग |
| प्रयुक्त प्रौद्योगिकी | क्रिस्पर–कैस9 तथा ई.एन.एफ.एन.–कैस9 |
| प्रमुख घटक | गाइड आर.एन.ए., कैस9 प्रोटीन |
| सहयोगी संस्था | सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया प्रा. लि. |
| लक्षित जनसमूह | अनुसूचित जनजाति समुदाय |
| नामकरण | भगवान बिरसा मुंडा के सम्मान में |
| उद्देश्य | किफ़ायती एवं स्वदेशी जीन–उपचार उपलब्ध कराना |
| वैश्विक महत्व | भारत द्वारा विकसित पहला क्रिस्पर–आधारित उपचार |





